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आउट ऑफ कंट्रोल हुआ पीजीआई का ट्रैफिक
अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Fri, 13 Dec 2013 08:49 AM IST
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पीजीआई में ओवरस्पीड वाहन बेलगाम हो रहे। इससे मरीजों की जान पर आफत आ रही है। रोजाना से दो से तीन एक्सीडेंट के मामले सामने आ रहे हैं।
पीजीआई की ओर से इन वाहनों को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। न तो बैरिकेड लगे हैं और न ही गति अवरोधक।
साथ ही ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी इन वाहनों के चालान नहीं काटे जा रहे। अस्थाई तौर पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, उससे मरीजों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गई है।
पीजीआई में आने वाले मरीज भी मानते हैं कि यहां पर ट्रैफिक आउट ऑफ कंट्रोल है और इस पर लगाम लगनी चाहिए।
न्यूनतम स्पीड 30 है
पीजीआई की ओर से बनाए गए मानक के मुताबिक संस्थान के अंदर आने वाले वाहनों की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा के हिसाब से निर्धारित की गई है। यहां पर वाहनों की स्पीड निर्धारित से कहीं ज्यादा होती है।
वाहन चालक काफी तेजी से हार्न बजाते हुए अस्पताल में दाखिल होते हैं। रोड चौड़ी होने के कारण चालक भी इसका भरपूर फायदा उठाते हैं। प्रेशर हॉर्न की आवाज से मरीजों और डाक्टर व स्टाफ को भी परेशानी आती है।
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मानक पर खरे नहीं उतरते स्पीड ब्रेकर
ओवरस्पीड वाहनों की रफ्तार रोकने के लिए पीजीआई की ओर से बनाए गति अवरोधक पूरी तरह से घिस चुके हैं। अब इनका कोई फायदा नहीं है।
हालांकि इस कमी को पूरा करने के लिए पीजीआई की ओर से प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ये स्पीड ब्रेकर मेन रोड पर बनाए गए हैं। इससे जो भी मरीज इमरजेंसी से एडवांस कार्डियक सेंटर या फिर ओपीडी से नेहरू हॉस्पिटल या इमरजेंसी जाता है तो उसका दर्द बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि पीजीआई जैसे हॉस्पिटल में इस तरह के स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते।
इस बारे में मरीजों ने पीजीआई के डायरेक्टर से भी शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक स्पीड बम्पस के बजाए स्पीड हम्पस लगाए जाने चाहिए।
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पीजीआई की ओर से इन वाहनों को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। न तो बैरिकेड लगे हैं और न ही गति अवरोधक।
साथ ही ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी इन वाहनों के चालान नहीं काटे जा रहे। अस्थाई तौर पर जो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, उससे मरीजों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ गई है।
पीजीआई में आने वाले मरीज भी मानते हैं कि यहां पर ट्रैफिक आउट ऑफ कंट्रोल है और इस पर लगाम लगनी चाहिए।
न्यूनतम स्पीड 30 है
पीजीआई की ओर से बनाए गए मानक के मुताबिक संस्थान के अंदर आने वाले वाहनों की स्पीड 30 किलोमीटर प्रति घंटा के हिसाब से निर्धारित की गई है। यहां पर वाहनों की स्पीड निर्धारित से कहीं ज्यादा होती है।
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वाहन चालक काफी तेजी से हार्न बजाते हुए अस्पताल में दाखिल होते हैं। रोड चौड़ी होने के कारण चालक भी इसका भरपूर फायदा उठाते हैं। प्रेशर हॉर्न की आवाज से मरीजों और डाक्टर व स्टाफ को भी परेशानी आती है।
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मानक पर खरे नहीं उतरते स्पीड ब्रेकर
ओवरस्पीड वाहनों की रफ्तार रोकने के लिए पीजीआई की ओर से बनाए गति अवरोधक पूरी तरह से घिस चुके हैं। अब इनका कोई फायदा नहीं है।
हालांकि इस कमी को पूरा करने के लिए पीजीआई की ओर से प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ये स्पीड ब्रेकर मेन रोड पर बनाए गए हैं। इससे जो भी मरीज इमरजेंसी से एडवांस कार्डियक सेंटर या फिर ओपीडी से नेहरू हॉस्पिटल या इमरजेंसी जाता है तो उसका दर्द बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि पीजीआई जैसे हॉस्पिटल में इस तरह के स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते।
इस बारे में मरीजों ने पीजीआई के डायरेक्टर से भी शिकायत की थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक स्पीड बम्पस के बजाए स्पीड हम्पस लगाए जाने चाहिए।