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गाड़ियों के बोझ तले दबने लगा है चंडीगढ़, जाम से निपटने को दीजिए सुझाव

Mon, 30 Oct 2017 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 30 Oct 2017 02:56 PM IST
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traffic jaam problem in chandigarh
अरोमा होटल लाइट प्वाइंट पर जाम की स्थिति - फोटो : अमर उजाला
पांच लाख की आबादी के लिए बने चंडीगढ़ में अब ट्रैफिक जाम विकराल रूप लेने लगा है। अगर आप जाम से निपटने को सुझाव देना चाहते हैं तो वेल्कम। ट्रैफिक जाम से संबंधित कोई राय या सुझाव देना चाहते हैं तो chd-cityreporter@chd.amarujala.com पर अपनी राय मेल कर सकते हैं। मेल में नाम, पता और मोबाइल नंबर जरूर दें।
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वीवीआईपी मूवमेंट हो या स्कूलों की छुट्टी का वक्त। पूरा शहर थम सा जाता है। सबके सब परेशान होते हैं। मगर जाम से निपटने के लिए कोई दूर की योजना नहीं बनाई जाती। तीन साल के लिए अफसर आते हैं और थोड़ा-बहुत कामकर चलते बनते हैं। चरमराए पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए कोई विजन नहीं है। कोई भी शहर के अगले 20 सालों के बारे में नहीं सोचता।
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नतीजा, सुबह दो घंटे (8-10बजे), दोपहर दो घंटे (1-3बजे) और शाम (5-7बजे) शहरवासियों को जाम से जूझना पड़ता है। अमर उजाला शहरवासियों के सहयोग से ट्रैफिक से जुड़े मुद्दे को प्रशासन के सामने जोर-शोर से उठाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम की बीमारी कैंसर न बन पाए। ट्रैफिक सीरिज की पहली किस्त आज पढ़िए और अपने सुझाव भी दें।
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जाम के कारण

traffic jaam problem in chandigarh
अरोमा होटल लाइट प्वाइंट पर जाम की स्थिति - फोटो : अमर उजाला
1. चंडीगढ़ में गाड़ियों का अंबार
शहर में जाम का सबसे बड़ा कारण बढ़ती गाड़ियां हैं। चंडीगढ़ आरएलए के मुताबिक शहर में करीब छह लाख रजिस्टर्ड वाहन हैं। इसमें करीब पौने तीन लाख टू व्हीलर व ढाई लाख फोरव्हीलर हैं। करीब पचास हजार कामर्शियल वाहन होंगे। पंचकूला और मोहाली के करीब सवा लाख वाहन रोजाना चंडीगढ़ में आते हैं।  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की साल 2011-2012 की रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ में हर हजार व्यक्ति में से 702 लोगों के पास अपना वाहन है। जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।

2. स्कूल टाइमिंग में जरूरत से ज्यादा गाड़ियां
चंडीगढ़ के स्कूलों में जब छुट्टी होती तो उस समय शहर थम सा जाता है। जिन सेक्टरों में स्कूल हैं, वहां छुट्टी के वक्त फंसे तो एक से डेढ़ घंटे से पहले निकल पाना मुश्किल होता है। खासकर उन स्कूलों में जहां पर वीवीआईपी लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। हर बच्चे को लेने के लिए एक बड़ी होती है। ज्यादातर पेरेंट्स सड़कों के दोनों तरफ वाहन खड़ा कर देते हैं। न तो ट्रैफिक पुलिस कुछ करती है और न ही स्कूल मैनेजमेंट। परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ती है, जो इन सड़कों से गुजरते हैं।

3. अपनी मंडी भी एक कारण है
अपनी मंडी 30 दिन शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगती है। जिस सेक्टर में अपनी मंडी लगी, वहां पर दोपहर बाद जाम लगना तय है। मंडी में खरीदारी करने आए लोग अपनी कार से आते हैं और कारे सड़कों के किनारे खड़ी कर देते हैं। धीरे-धीरे कारों का अंबार लग जाता है। उसके बाद जाम की शुरुआत होती है। पहले एक सड़क में और फिर धीरे-धीरे आसपास की सड़कों में ट्रैफिक जाम होने लगता है। आड़े-तिरछे खड़ा करने वाले वाहनों के पुलिस चालान नहीं काटती है, जिसकी वजह से स्थिति और बिगड़ जाती है।

4. कभी-कभार वीवीआईपी मूवमेंट
जाम का एक कारण वीवीआईपी मूवमेंट भी होती है। यदि पंजाब व हरियाणा राजभवन से दिन में एक भी बार गाड़ी शहर में निकल आए तो जाम लगना तय है। वीवीआईपी आने से पहले पूरा ट्रैफिक रोक दिया जाता है। जब तक वे जाते नहीं, तब तक ट्रैफिक रुका रहता है। हालांकि ये रोज तो होता नहीं मगर हफ्ते में तीन से चार बार स्थिति जरूरत बनती है। यदि राजभवन की गाड़ी नहीं आती है तो किसी और वीवीआईपी की मूवमेंट शहर में हो जाती है।

5. चरमराया पब्लिक ट्रांसपोर्ट
शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट चरमराया हुआ है। शहर में चार सौ से ज्यादा बसे तो दौड़ रही हैं, मगर अधिकतर समय वे खाली दिखती हैं। इसकी मुख्य वजह पेरीफेरी इलाकों, पंचकूला और मोहाली से फ्रिक्वेंसी काफी कम है। ये बसें सिर्फ मुख्य सड़कों पर दौड़ती हैं। वी-6 रोड तक कनेक्टिविटी नहीं है। मुख्य सड़क तक पहुंचने में ही उन्हें काफी वक्त लग जाता है। इस वजह से लोग अपना वाहन ले जाने में ज्यादा सुविधाजनक होते हैं। जाम लगने की ये भी एक वजह है।

1967 में सिर्फ 940 वाहन थे, अब छह लाख

traffic jaam problem in chandigarh
पंचकूला में जाम - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ बढ़ते वाहनों का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि साल 1967 में शहर में कुल 940 वाहन थे। जबकि साल 2017 में ये संख्या छह लाख के करीब पहुंच गई है। देश का शायद पहला शहर होगा, जहां टू व्हीलर और फोर व्हीलर वाहनों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है। फोर व्हीलर की संख्या 233871 है, जबकि टू व्हीलर की संख्या 276179 है। साल 2000 तक हर साल करीब 18-24 हजार वाहन रजिस्टर्ड होते थे, लेकिन अब तक हर साल 45 से 48 हजार वाहन रजिस्टर्ड हो रहे हैं।

क्या कहते हैं आरएलए व एसटीए के आंकड़े
रजिस्टर्ड टू व्हीलर                 276179
रजिस्टर्ड फोर व्हीलर              233871  
थ्री व्हीलर (गुड्स)                2960
थ्री व्हीलर  (पैसेंजर)               6110
बस                                 1785
एमजीवी - एचजीवी                 1170
लाइट गुड्स व्हीकल                  6418
टूरिस्ट (टैक्सी, रेडियो टैक्सी)       2445
एंबुलेंस                              180
 क्रेन                                 132
कुल वाहन                           ----

जाम से छुटकारा के लिए एक्सपर्ट ने दिए सुझाव

traffic jaam problem in chandigarh
traffic jam
1. सिंगापुर की तर्ज पर निर्धारित हो गाड़ियां
सेव अराइव के प्रमुख हरमन सिद्धू और पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि सिंगापुर ने ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। वहां पर हर एक परिवार के लिए एक गाड़ी निर्धारित की गई है। यदि दूसरी गाड़ी लेनी हो तो उस पर गाड़ी की कीमत से भी दो गुना टैक्स देना होगा। इस वजह से लोग दूसरी गाड़ी नहीं खरीदते हैं। दोनों एक्सपर्ट का कहना है कि चंडीगढ़ में भी इस तरह की पालिसी लानी होगी। क्योंकि हर साल सड़कों पर 50 हजार नई गाड़ियां आ रही हैं।

2. वी-5 और वी-6 रोड तक हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कनेक्टिविटी
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था सिर्फ मुख्य सड़कों पर ही है। अंदर की सड़क यानी वी-5 और वी-6 के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकतर लोग इस वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का फायदा नहीं उठा पाते। इसके लिए प्रशासन को चाहिए वे मिनी बस या फिर इलेक्ट्रिकल वाहनों की ऐसी व्यवस्था करवाएं, जो वी-5 और वी-6 तक जाएं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और फ्रेंडली बनाना होगा।

3. ट्राइसिटी के हिसाब से हो पब्लिक ट्रांसपोर्ट की प्लानिंग
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की प्लानिंग तो होती है मगर सिर्फ अपने-अपने शहर को ध्यान में रखकर। चंडीगढ़ में खरड़ से लेकर कालका तक के लोग हजारों लोग रोजाना चंडीगढ़ में आते हैं। मगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की फ्रिक्वेंसी कम होने के कारण लोग अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। यदि लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट बढ़िया मिलेगा तो वे अपनी गाड़ियां क्यो लाएंगे।

4. मंडी में कंडीशन लगाई जाए
अपनी मंडी में पार्किंग की जगह निर्धारित होनी चाहिए। कंडीशन लगाई जाए कि जहां भी मंडी लगेगी, वहां की आधी जगह पार्किंग को मिलनी चाहिए। जब अंदर जगह मिलेगी तो लोग वाहन बाहर क्यों खड़ा करेंगे। इसके लिए सब्जियों के ठेले भी कुछ कम किए जा सकते हैं। शहर में 30 दिनों मंडी लगती है। कुछेक दिन कम भी किए जा सकते हैं।

5. पेरेंट्स को कार पूल के निर्देश दे
स्कूलों वाली जगह में लगने वाले जाम से छुटकारा पाने के लिए स्कूल मैनेजमेंट व पेरेंट्स को मिलकर निदान निकालना होगा। करीब डेढ़ साल पहले जिला प्रशासन ने पेरेंट्स को कार पूल करने का आह्वान किया था, मगर वह आदेश हवा हो गए हैं। स्कूल में बच्चे को छोड़ना और छुट्टी के वक्त उन्हें लाने के लिए पेरेंट्स अपनी-अपनी कार का इस्तेमाल करते हैं, जबकि कार पूल का इस्तेमाल कर काफी ट्रैफिक से बचा जा सकता है। साथ ही स्कूल की छुट्टी के वक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो और जाम से छुटकारा पाने के लिए कोई इनोवेटिव आइडिया सोंचे।

जाम से बचने को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं

traffic jaam problem in chandigarh
Chandigarh Traffic Jam
वैसे तो पंचकूला और मोहाली से चंडीगढ़ की ओर आने वाले सभी रास्ते व्यस्त रहते हैं। मगर कुछ रास्ते अब भी ऐसे हैं, जिनके इस्तेमाल से जाम जैसे झंझटों से बचा जा सकता है। ये रास्ते थोड़े लंबे हो सकते हैं। लेकिन जाम में फंसने से बेहतर इन रास्तों से निकलना ज्यादा बेहतर होगा।

1. वे लोग जो पंचकूला से चंडीगढ़ जाने के लिए हाउसिंग बोर्ड का इस्तेमाल करते हैं वे कलाग्राम की ओर मुड़ने के बजाए हाउसिंग बोर्ड से फन रिपब्लिक की ओर मुड़ जाएं। वहां से मोटर मार्केट रोड से बाएं मुड़कर ओल्ड रोपड़ रोड पहुंचे। वहां से यह रोड सीधे किशनगढ़ चौक, किशनगढ़ चौक से सेक्टर सात से चंडीगढ़ में प्रवेश कर सकते हैं।

2. जो लोग पंचकूला के सेक्टर छह, सात, सेक्टर चार, दो, ओल्ड पंचकूला, कालका, पिंजौर व हिमाचल के लोग पंचकूला के सिंहद्वार चौक के अंदर से एमडीसी डोल्फिन चौक वाला रास्ता पकड़े। वहां से आईटी पार्क, सेक्टर 26 या सुखना लेक वाला रास्ता पकड़कर चंडीगढ़ में प्रवेश कर सकते हैं।

3. जो लोग बलटाना, पंचकूला सेक्टर 15, सेक्टर 19, सेक्टर 20, 21 में रहते हैं, वे चंडीगढ़ आने के लिए पंचकूला इंडस्ट्रियल एरिया से हल्लोमाजरा की ओर जाने वाली सड़क का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन चालकों को हल्लोमाजरा से पहले रेलवे स्टेशन व दड़वा की ओर जाने वाली सड़क पर मुड़ना होगा। वहां से रेलवे स्टेशन के सामने से गुजरने के बाद सीटीयू वर्कशाप वाली सड़क से आकर चंडीगढ़ में प्रवेश कर सकते हैं।

4. जो लोग रामदरबार व हल्लोमाजरा से चंडीगढ़ में प्रवेश करते हैं वे ट्रिब्यून चौक से सेक्टर 29, 30 से उद्योग पथ का इस्तेमाल करें। वहां से सीधे सेक्टर 17 बस अड्डे के गोल चक्कर पर पहुंचेंगे। यदि सेक्टर 17 जाने से बचना चाहते हैं तो वे इससे जुड़ी अन्य सड़कों का इस्तेमाल कर सकते हैं। अधिकतर लोग दक्षिण मार्ग और मध्य मार्ग से बचने के लिए उद्योग पथ को वैकल्पिक सड़क के तौर पर प्रयोग करते हैं।

5. मोहाली से चंडीगढ़ आने के लिए वैसे तो सभी मार्ग पर जाम लगता है। मगर फर्नीचर मार्केट से मध्यमार्ग की ओर आने वाले रास्ते में थोड़ा जाम कम लगता है। इसी तरह  सेक्टर-45 पीएसईबी के बैक साइड से सेक्टर-45 गऊशाला मार्ग और फेज-11 से ट्रिब्यून चौक आने वाले रोड में जाम कम होता है।

 

विदेशों में इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।

traffic jaam problem in chandigarh
बाटा पुल पर जाम - फोटो : अमर उजाला
सिंगापुर : ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए प्राइवेट गाड़ियों के नंबर्स को फ्रीज करने का फैसला लिया है। यानी अब सिंगापुर के लोगों को गाड़ी खरीदने के पहले एक सर्टिफिकेट लेना होगा। 10 साल के लिए वैलिड इस सर्टिफिकेट की कीमत करीब 2.4 लाख रुपये होगी। यानी लोगों को गाड़ियां काफी महंगी पड़ेंगी। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है। सिंगापुर में गाड़ियों की बिक्री का कोटा पहले ही तय कर चुका है।

लंदन : ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए लंदन में भी नियम सख्त किए गए हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में अपने प्राइवेट गाड़ियों से नहीं जा सकते हैं। आक्सफोर्ड स्ट्रीट जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जाने के लिए सिर्फ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने का नियम है। यदि प्राइवेट गाड़ियों से जाना है तो बाजारों से काफी दूर पार्किंग स्थल है। वहां पर गाड़ियां पार्क करें और वहां से पैदल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाएं।

बीजिंग: ट्रैफिक जाम को खत्म करने के लिए पांच साल का प्लान बनाया गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सुबह सात बजे से पहले यात्रा करने वाले लोगों को हर यात्रा पर 30 प्रतिशत की छूट दी जाती है। इसके साथ ही एक हजार किलोमीटर रेल ट्रांसिट, एक हजार किमी बस रूट का निर्माण करने का लक्ष्य है। इसका मकसद शहर के 75 प्रतिशत रेजिडेंट को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के प्रति निर्भर बनाना है।
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