हरियाणा: इस बार 200 धान खरीद केंद्र ज्यादा बनेंगे, 25 सितंबर से खरीद की तैयारी
- केंद्र सरकार को पत्र लिखकर ली जाएगी अनुमति, उपमुख्यमंत्री ने तैयारियों की समीक्षा की
- मंडी में फसल लेकर आए किसान को नहीं होनी चाहिए कोई दिक्कत: डिप्टी सीएम
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हरियाणा सरकार सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली के लिए खरीदी जाने वाले धान की खरीद पहली अक्टूबर के बजाय 25 सितंबर से शुरू करना चाह रही है। इसकी अनुमति के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी पत्र लिखेंगे। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सोमवार को हरियाणा निवास में फसल खरीद की तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि किसानों को धान की फसल बेचने में कोई दिक्कत न आए, इसलिए पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष 200 खरीद केंद्र ज्यादा बनाए जाएंगे। ये खरीद केंद्र प्रदेश के उन आठ जिलों में बनाए जाएंगे जिनमें धान की पैदावार अधिक होती है। हिसार, सिरसा, भिवानी क्षेत्र में बाजरा की पैदावार अच्छी है।
किसानों को बाजरे की फसल बेचने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े इसलिए पिछले साल के मुकाबले खरीद केंद्र करीब दोगुने कर दिए हैं। इसी तरह मूंग की खरीद के लिए भी 15 से बढ़ाकर 30 खरीद केंद्र बनाने का फैसला लिया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ की फसल मंडियों में आने वाली है। मंडी में फसल लेकर आने वाले किसी भी किसान को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। मंडियों में शेड, सड़कें, पैकेजिंग के लिए बैग, तुलाई मशीनें आदि ठीक कर लें ताकि किसान परेशान न हो। फसल खरीद में कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में खाद्य, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड, हैफेड, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन, भारतीय खाद्य निगम समेत अन्य एजेंसियों के अधिकारी मौजूद रहे। चौटाला ने अधिकारियों से कहा कि एक अक्तूबर से प्रस्तावित खरीफ की फसलों की खरीद की पूरी तैयारी कर लें। डिप्टी सीएम ने मक्का, कपास व गन्ना की फसल खरीदने को लेकर भी अधिकारियों के साथ चर्चा की। अगली बैठक में अधिकारी इस संबंध में रिपोर्ट देंगे।
रबी की तरह होगी खरीफ की भी तैयारी
दुष्यंत चौटाला ने बताया कि रबी की फसल खरीद प्रक्रिया में कोरोना का संक्रमण था लेकिन कर्मचारियों एवं किसानों के कारण एक भी व्यक्ति खरीद प्रक्रिया के दौरान महामारी की चपेट में नहीं आया। उन्होंने कहा कि इस बार भी ऐसी व्यवस्था करने के प्रयास किए जाएंगे कि मंडी में आने वाला किसान, व्यापारी और कर्मचारी इस महामारी से सुरक्षित रहे। सरकार का यह प्रयास रहेगा कि किसान की फसल का एक-एक दाना खरीदा जाए और उसे किसी तरह की कोई परेशानी न आए।
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बाजरे का 10 और अन्य फसलों का 15 तक हो सकेगा पंजीकरण
हरियाणा में बाजरा उत्पादक किसान जिन्होंने अब तक ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’(एमएफएमबी) योजना के तहत पंजीकरण नहीं करवाया है। वे अब 10 सितंबर तक पोर्टल पर अपनी फसल का विवरण अपलोड कर सकते हैं। जबकि अन्य खरीफ फसलों का पंजीकरण 15 सितंबर तक करवाया जा सकता है। इस योजना के तहत अब तक 7,33,067 किसानों ने पोर्टल पर 40,72,047.23 एकड़ जमीन का पंजीकरण किया है।
कृषि और किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजीव कौशल ने आज यहां यह बताते हुए कहा कि इस संबंध में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में लिया गया। ताकि राज्य के सभी किसानों के लिए पूरी कवरेज सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की उपज की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा सकेगी।
इसके साथ-साथ विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत प्रोत्साहन व अनुदान का लाभ भी किसानों को दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे अन्य राज्यों से लाई गई फसल या भंडारित फसल की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसान किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 18001802117 और 18001802060 पर संपर्क कर सकते हैं।
सफेद मक्खी, पैराविल्ट से बर्बाद फसल को मिलेगा मुआवजा
उन्होंने बताया कि कृषि और किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल के निर्देशानुसार राजस्व विभाग से अनुरोध किया गया था कि वे उन कपास उत्पादकों के खेतों में समयबद्ध तरीके से विशेष गिरदावरी करें, जिन्होंने फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण नहीं कराया है। जिन लोगों ने योजना के तहत पंजीकरण करवाया हुआ है उनको फसल कटाई प्रयोगों के दौरान नुकसान के आकलन के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों को व्यक्तिगत रूप से आवेदन करने की जरूरत नहीं है क्योंकि नुकसान का आकलन ग्राम स्तर पर किया जाएगा। कौशल ने कहा कि सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, जींद और भिवानी जिलों में सफेद मक्खी के हमलों की रिपोर्ट के बाद विभाग ने कपास उत्पादकों को उनकी फसलों पर दो या इससे अधिक कीटनाशकों के मिश्रण का उपयोग करने के प्रति आगाह किया था।
इसके बजाय किसानों को सफेद मक्खी और पैराविल्ट से निपटने के लिए नीम आधारित उपचार का उपयोग करने और फसल की निगरानी करने की विशेष तौर पर सिंचाई या बारिश के बाद सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के सही तरीके से उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रभावित जिलों में एक जागरूकता अभियान भी शुरू किया गया है।