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रामायण में रावण-सीता के संवाद पर बजीं तालियां
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सेक्टर 18 स्थित टैगोर थियेटर में संगीत नाटक अकादमी द्वारा आयोजित रामलीला उत्सव के दौरान दृश्य दिख
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। सीते हमें उम्मीद है कि तुमने अच्छी तरह से सोच विचार कर लिया होगा। आखिर कब तक यूं ही हठ पर अड़ी रहोगी। चल लंका की पटरानी बन... यह संवाद टैगोर थिएटर में सेक्टर-20 के आजाद ड्रामाटिक क्लब रामलीला एवं दशहरा कमेटी की ओर से रावण की भूमिका निभा रहे अशोक चौधरी ने मां सीता की भूमिका निभा रही सुखबीर कौर के साथ की। जब रावण के संवाद का जवाब सीता ने ऐ जालिम क्यों डराता है मुझे खंजर दिखाकर, वो तेरा बल निकाल देगा चरक पर चढ़ाकर... किया तो दर्शकों ने तालियां बजाकर हौसला बढ़ाया।
इसके बाद सीता भगवान श्री राम के बारे में सोचने का दृश्य स्लाइड से दिखाया गया। इसमे बाद रावण त्रिजटा को एक महीने का समय देकर चला जाता है। इस सीन के बाद हनुमान और सीता का संवाद का मंचन हुआ। रावण की भूमिका में अशोक चौधरी, सीता की भूमिका में सुखवीर कौर और हनुमान की भूमिका में ललित ग्रोवर ने निभाई। अमित ने राम और सुखदेव ने लक्ष्मण की भूमिका में रहे।
दूसरा सीन : रावण-अहिरावण संवाद ने दर्शकों को किया रोमांचित
दूसरे सीन में सेक्टर- 40 के उत्तरांचल रामलीला मंडल एवं दशहरा कमेटी ने रावण-अहिरावण संवाद का मंचन किया। इसने दर्शकों को रोमांचित किया। इस सीन में दिखाया गया कि रावण अपने बेटे मेघनाद और भाई कुंभकर्ण के मौत के बाद पाताल में अहिरावण से सहायता मांगने जाता है। अहिरावण ने रावण को समझाया कि तुमने गलत काम किया है, पर स्त्री को लाए हो उन्हें छोड़ दो। इस पर रावण कहता है कि यह काम राक्षस जाति की भलाई के लिए किया है। इस बात से वह अहिरावण को मना लेता है और रावण का साथ देने के लिए हामी भरता है। अहिरावण कहता है कि वनवासी कल का सूर्य नहीं देख पाएंगे। आज रात को ही मां कामाक्षी को बलि चढ़ा दूंगा। इसके बाद रावण अहिरावण की जय हो कह कर चला जाता है। अहिरावण का भाई महिरावण भी कहता है कि साथ देना ठीक नहीं है लेकिन वह महिरावण को मना लेता है। कमेटी के निर्देशक संजय जखमोला ने बताया कि हीरा सिंह ने रावण, गुरनून ने अहिरावण और माधव ने महिरावण की भूमिका निभाई।
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दृष्टि सीन का किया मंचन
तीसरे सीन में द नेशनल एडी क्लब मनीमाजरा की ओर से दृष्टि सीन का मंचन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक अभिषेक शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से श्री रामलीला उत्सव के दूसरे और अंतिम दिन संयुक्त रामलीला महासभा चंडीगढ़ से संबंधित तीन रामलीला कमेटियों ने अपने दृश्यों का मंचन किया। इस मौके पर संयुक्त रामलीला महासभा चंडीगढ़ के महासचिव परमजीत सिंह पम्म सहित अन्य पदाधिकारियों के अलावा अकादमी के पदाधिकारी व दर्शक उपस्थित रहे।
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इसके बाद सीता भगवान श्री राम के बारे में सोचने का दृश्य स्लाइड से दिखाया गया। इसमे बाद रावण त्रिजटा को एक महीने का समय देकर चला जाता है। इस सीन के बाद हनुमान और सीता का संवाद का मंचन हुआ। रावण की भूमिका में अशोक चौधरी, सीता की भूमिका में सुखवीर कौर और हनुमान की भूमिका में ललित ग्रोवर ने निभाई। अमित ने राम और सुखदेव ने लक्ष्मण की भूमिका में रहे।
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दूसरा सीन : रावण-अहिरावण संवाद ने दर्शकों को किया रोमांचित
दूसरे सीन में सेक्टर- 40 के उत्तरांचल रामलीला मंडल एवं दशहरा कमेटी ने रावण-अहिरावण संवाद का मंचन किया। इसने दर्शकों को रोमांचित किया। इस सीन में दिखाया गया कि रावण अपने बेटे मेघनाद और भाई कुंभकर्ण के मौत के बाद पाताल में अहिरावण से सहायता मांगने जाता है। अहिरावण ने रावण को समझाया कि तुमने गलत काम किया है, पर स्त्री को लाए हो उन्हें छोड़ दो। इस पर रावण कहता है कि यह काम राक्षस जाति की भलाई के लिए किया है। इस बात से वह अहिरावण को मना लेता है और रावण का साथ देने के लिए हामी भरता है। अहिरावण कहता है कि वनवासी कल का सूर्य नहीं देख पाएंगे। आज रात को ही मां कामाक्षी को बलि चढ़ा दूंगा। इसके बाद रावण अहिरावण की जय हो कह कर चला जाता है। अहिरावण का भाई महिरावण भी कहता है कि साथ देना ठीक नहीं है लेकिन वह महिरावण को मना लेता है। कमेटी के निर्देशक संजय जखमोला ने बताया कि हीरा सिंह ने रावण, गुरनून ने अहिरावण और माधव ने महिरावण की भूमिका निभाई।
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दृष्टि सीन का किया मंचन
तीसरे सीन में द नेशनल एडी क्लब मनीमाजरा की ओर से दृष्टि सीन का मंचन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक अभिषेक शर्मा ने बताया कि चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से श्री रामलीला उत्सव के दूसरे और अंतिम दिन संयुक्त रामलीला महासभा चंडीगढ़ से संबंधित तीन रामलीला कमेटियों ने अपने दृश्यों का मंचन किया। इस मौके पर संयुक्त रामलीला महासभा चंडीगढ़ के महासचिव परमजीत सिंह पम्म सहित अन्य पदाधिकारियों के अलावा अकादमी के पदाधिकारी व दर्शक उपस्थित रहे।