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कोरोना में थिएटर हुए बंद तो बना डालीं 20 शॉर्ट फिल्में
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शॉर्ट फिल्मों का निर्देशन करते मुकेश शर्मा।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। कोरोना माहमारी का नुकसान थिएटर ग्रुप और कलाकारों पर हुआ है लेकिन उन कलाकारों पर अधिक असर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी थिएटर से ही चलती थी। शहर में थिएटर ग्रुप चलाने वाले कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने इस कोरोना काल में अपनी रूटीन की जिंदगी से कुछ अलग करना सीखा। इसे वह करने का कभी सोच नही सकते थे। इनमें से एक है शहर के जाने-माने वरिष्ठ कलाकार और निर्देशक मुकेश शर्मा। उन्हें कोरोना ने काफी कुछ सिखा दिया। इस दौरान उन्होंने खाली घर में बैठने की बजाय शॉर्ट फिल्में बनानी की ठानी और उसे बनाकर भी दिखाया। उनके लिए यह अलग अनुभव रहा। इसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
कोरोना के डर से डरे लोगों को उभारने के लिए शॉर्ट फिल्म
वरिष्ठ कलाकार मुकेश शर्मा ने बताया कि पिछले 6 महीने से थिएटर बंद पड़ा है और वहीं कोरोना का कहर भी काफी उभर कर सामने आ रहा है। करेाना का डर लोगों के अंदर इतना फैल चुका है कि लोग तनाव का शिकार हो रहे हैं। लोगों की नौकरियां चली गईं, कमाई का साधन बंद हो गया। ऐसे में मुझे लगा कि लोगों को उत्साहित करने की जरूरत हैं इसलिए शॉर्ट फिल्म बनाई। इसमें कोरोना काल में काम करने वाले पुलिस स्टाफ, पैरा-मेडिकल स्टाफ के बहादुर लोग शामिल हैं। वहीं लॉकडाउन के दौरान जमाखोरी के साथ गरीबों को खाने की दिक्कतों को भी फिल्म में दिखाया।
नाटक और शॉर्ट फिल्में
मुकेश शर्मा ने बताया कि 1990 से 2008 तक बतौर एक कलाकार के नाते मैंने करीब 50 नाटकों में काम किया। इनमें कोर्ट मार्शल ने अब तक 500 शो का रिकार्ड भी बनाया है। इसमें मैंने जज की भूमिका निभाई थी। यह नाटक आज भी लोगों का पसंदीदा नाटक हैं। वहीं 2008 से मैंने नाटकों का निर्देशन करना शुरू किया और अब तक 200 नाटकों का निर्देशन कर चुका हूं। इनमें जो चर्चित रहे, उनमें वीर सावरकर , काला पानी, भगत सिंह की जेल डायरी, कोमल गंधार शामिल हैं। वहीं कोरोना काल मेें करीब 20 शॉर्ट फिल्में भी बनाईं। इनमें बंदिश की आजादी, आज क्या खाया जाए, कोरोना होना कोई पाप तो नही, हम सब एक है, हम भी फौजी हैं, फ्रंटलाइन कोरोना हीरो, रिस्पेक्ट कोरोना वारियर्स, लॉकडाउन बनाम जिंदगी, बी पॉजटिव मुख्य रही।
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कोरोना ने रूटीन खराब कर दी
संवाद थिएटर ग्रुप के वरिष्ठ कलाकार, लेखक, निर्देशक मुकेश शर्मा पेशे से गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर-32 में रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में तकनीकी अधिकारी के तौर पर काम करते हैं। थिएटर से काफी लगाव है और 1990 से इससे जुड़े हैं। 2008 में संवाद थिएटर ग्रुप को रजिस्टर कराया। करोना ने सारी रूटीन खराब कर दी। पहले रोजाना हम लोग शाम 6 बजे टैगौर थिएटर में मिलते थे और समाजिक विषयों पर आधारित नाटको को बनाने की योजना बनाते थे। यह सबकुछ अब बंद हो गया और मिलना-जुलना भी बंद हो गया।
थिएटर के स्टाफ की फिक्र और मदद का प्रयास
मुकेश शर्मा ने बताया कि संवाद थिएटर ग्रुप में काम करने वालों कलाकारों को काफी मिस करते हैं। कोरोना ने शहर के विभिन्न थिएटर में काम करने वाले उन कलाकारों पर काफी असर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी थिएटर से चलती थी। शहर के थिएटर ग्रुप्स की ओर से इन कलाकारों के भोजन की व्यवस्था के साथ कुछ फंड इकट्ठा करके लॉकडाउन के दौरान इन्हें दिए गए हैं।
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कोरोना के डर से डरे लोगों को उभारने के लिए शॉर्ट फिल्म
वरिष्ठ कलाकार मुकेश शर्मा ने बताया कि पिछले 6 महीने से थिएटर बंद पड़ा है और वहीं कोरोना का कहर भी काफी उभर कर सामने आ रहा है। करेाना का डर लोगों के अंदर इतना फैल चुका है कि लोग तनाव का शिकार हो रहे हैं। लोगों की नौकरियां चली गईं, कमाई का साधन बंद हो गया। ऐसे में मुझे लगा कि लोगों को उत्साहित करने की जरूरत हैं इसलिए शॉर्ट फिल्म बनाई। इसमें कोरोना काल में काम करने वाले पुलिस स्टाफ, पैरा-मेडिकल स्टाफ के बहादुर लोग शामिल हैं। वहीं लॉकडाउन के दौरान जमाखोरी के साथ गरीबों को खाने की दिक्कतों को भी फिल्म में दिखाया।
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नाटक और शॉर्ट फिल्में
मुकेश शर्मा ने बताया कि 1990 से 2008 तक बतौर एक कलाकार के नाते मैंने करीब 50 नाटकों में काम किया। इनमें कोर्ट मार्शल ने अब तक 500 शो का रिकार्ड भी बनाया है। इसमें मैंने जज की भूमिका निभाई थी। यह नाटक आज भी लोगों का पसंदीदा नाटक हैं। वहीं 2008 से मैंने नाटकों का निर्देशन करना शुरू किया और अब तक 200 नाटकों का निर्देशन कर चुका हूं। इनमें जो चर्चित रहे, उनमें वीर सावरकर , काला पानी, भगत सिंह की जेल डायरी, कोमल गंधार शामिल हैं। वहीं कोरोना काल मेें करीब 20 शॉर्ट फिल्में भी बनाईं। इनमें बंदिश की आजादी, आज क्या खाया जाए, कोरोना होना कोई पाप तो नही, हम सब एक है, हम भी फौजी हैं, फ्रंटलाइन कोरोना हीरो, रिस्पेक्ट कोरोना वारियर्स, लॉकडाउन बनाम जिंदगी, बी पॉजटिव मुख्य रही।
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कोरोना ने रूटीन खराब कर दी
संवाद थिएटर ग्रुप के वरिष्ठ कलाकार, लेखक, निर्देशक मुकेश शर्मा पेशे से गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर-32 में रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में तकनीकी अधिकारी के तौर पर काम करते हैं। थिएटर से काफी लगाव है और 1990 से इससे जुड़े हैं। 2008 में संवाद थिएटर ग्रुप को रजिस्टर कराया। करोना ने सारी रूटीन खराब कर दी। पहले रोजाना हम लोग शाम 6 बजे टैगौर थिएटर में मिलते थे और समाजिक विषयों पर आधारित नाटको को बनाने की योजना बनाते थे। यह सबकुछ अब बंद हो गया और मिलना-जुलना भी बंद हो गया।
थिएटर के स्टाफ की फिक्र और मदद का प्रयास
मुकेश शर्मा ने बताया कि संवाद थिएटर ग्रुप में काम करने वालों कलाकारों को काफी मिस करते हैं। कोरोना ने शहर के विभिन्न थिएटर में काम करने वाले उन कलाकारों पर काफी असर पड़ा है जिनकी रोजी-रोटी थिएटर से चलती थी। शहर के थिएटर ग्रुप्स की ओर से इन कलाकारों के भोजन की व्यवस्था के साथ कुछ फंड इकट्ठा करके लॉकडाउन के दौरान इन्हें दिए गए हैं।