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#Visra: पहेली बनकर रह गई 929 लोगों की मौत, बोतलों में बंद हैं राज, खुलने अब भी इतंजार

Sun, 15 Dec 2019 01:23 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 15 Dec 2019 01:23 PM IST
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The secret of 929 deaths in six years is hidden in the bottle
प्रतीकात्मक तस्वीर

छह साल पहले शहर में संदिग्ध परिस्थितियों हुई 929 लोगों की मौतों के राज का खुलासा अभी तक नहीं हो सका है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में इन अज्ञात लोगों के शव चंडीगढ़ पुलिस को बरामद हुए थे। इनमें से ज्यादातर मामलों में अभी भी विसरा रिपोर्ट का इंतजार है। संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने वाले शव का विसरा सैंपल बोतलों में बंद करके जांच के लिए सेक्टर-36 की फोरेंसिक लैब में भेजा गया था। लेकिन अभी तक सैकड़ों विसरा की रिपोर्ट आने का इंतजार है। ऐसे में यह पहेली बनकर रह गया है कि इन लोगों की मौतों का क्या राज है।

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वर्ष 2014 से अब तक पुलिस को शहर के अलग-अलग सेक्टरों से करीब 929 अज्ञात लोगों के शव बरामद हुए हैं। इन शवों में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल हैं। काफी समय इंतजार के बाद शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर, इनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। बता दें कि वर्ष 2014 में 160, 2015 में 186, 2016 में 152, 2017 में 185, 2018 में 146 और जनवरी 2019 से अब तक शहर की पुलिस को करीब 102 शव बरामद हो चुके हैं। हैरानी की बात है कि इतने साल से न तो मृतक के परिजन आए और न ही पुलिस इन शवों की अब तक पहचान करवा सकी है।
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तीस दिन के अंदर भेजा जाता है विसरा
कोई भी शव मिलने के बाद पुलिस केस में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट लगा देती है और साथ ही विसरा सुरक्षित रखने की बात लिख देती है। लेकिन जांच रिपोर्ट कई साल तक पेश ही नहीं की जाती है। वहीं पुलिस आला अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर विसरा रिपोर्ट मंगवा ली जाती है। जिसके आधार पर पुलिस कोर्ट में फाइल पेश करती है। नियमानुसार विसरा को जांच के लिए तीस दिन के अंदर फोरेंसिक लैब भेजा जाता है।

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इन मामलों में विसरा जांच जरूरी

जो शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलते हैं। इनमें पुलिस को भी नहीं पता होता है कि मौत किन कारणों से हुई है और जिस व्यक्ति की मौत हुई है वो कौन है। इनकी मौत का कारण जानने के लिए विसरा जांच कराई जाती है। शव की छोटी आंत, आंत, लीवर या फिर गुर्दे को जांच के लिए भेजा जाता है। ज्यादातर मामलों में विसरा की रिपोर्ट सालो-साल बंद बोतलों में ही बंद रहती है।

शरीर के ये पार्ट रखे जाते हैं सुरक्षित
लीवर का टुकड़ा, छोटी आंत का टुकड़ा, खाने की थैली, स्पलीन (तिल्ली), किडनी

जरूरत पड़ने पर भेजा जाता है रिमाइंडर
शहर की फोरेंसिक लैब सेक्टर-36 में है। इस लैब में देश के अलग-अलग जगहों से रिपोर्ट के लिए विसरा आते हैं। इनमें चंडीगढ़ के भी सैकड़ों केस शामिल हैं। इनमें कुछ को छोड़ दें तो बाकी की रिपोर्ट लटक जाती है। सूत्रों के अनुसार अभी तक 700 से ज्यादा विसरा रिपोर्ट आनी बाकी है। जबकि पुलिस को जिस केस की विसरा रिपोर्ट लेनीे होती है, उसमें रिमाइंडर भेज दिया जाता है।

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