बेबसी की कहानी...28 घंटे के सफर में एक बोतल पानी, यूपी के मजदूरों ने सुनाया सफर का दर्द
- श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भी अव्यवस्था का आलम, सुबह न नाश्ता मिला, न पानी
- ट्रेन में बैठाते ही चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म, आगे यूपी सरकार जाने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
स्पेशल ट्रेन में भी परेशानी श्रमिकों का पीछा नहीं छोड़ रही है। यूपी और बिहार जाने वाले इन मजदूरों को पहले तो स्क्रीनिंग के लिए धक्के खाने पड़ते हैं फिर ट्रेन में सवार होने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। सबसे बड़ी दिक्कत तो ट्रेन में बैठने के बाद सामने आती है। एक बोतल पानी के सहारे 12 से 28 घंटे का सफर काटना पड़ता है। हालांकि चंडीगढ़ प्रशासन कोल्ड ड्रिंक भी मुहैया करा रहा है। लेकिन श्रमिकों का कहना है कि उन्हें पानी की बोतलें ज्यादा दी जाएं।
दस मई को चंडीगढ़ से गोंडा का सफर, जिंदगी भर याद रहेगा
दस मई को चंडीगढ़ से गोंडा के लिए करीब शाम सात बजे श्रमिक स्पेशल ट्रेन रवाना हुई। इस ट्रेन में सवार यात्री कलीम और प्रमोद तिवारी ने बताया कि चंडीगढ़ में स्क्रीनिंग के बाद ट्रेन खुलने से चार घंटे पहले उन्हें ट्रेन में बैठा दिया गया। वे दिन में करीब तीन बजे ट्रेन में बैठ गए थे, बैठते समय चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से एक खाने का पैकेट और एक बोतल पानी दिया गया था, महज दो घंटे में पानी समाप्त हो गया तो उसी बोतल में स्टेशन के नल से पानी भरकर रख लिया लेकिन अंबाला जाते जाते पानी समाप्त हो गया। इसके बाद यह ट्रेन कहीं रुकी ही नहीं।
प्यास के मारे गला बार-बार सूख रहा था। गर्मी के चलते ट्रेन में सबका बुरा हाल था। ट्रेन के कई पंखे भी बंद पड़े थे, जो पूरे रास्ते नहीं चले। एक जगह रास्ते में ट्रेन कहीं रूकी तो उम्मींद जगी की कोई स्टेशन है, बाहर निकलकर देखा तो कहीं जंगल में ट्रेन खड़ी और दूर-दूर तक कोई पानी का नल दिखाई नहीं दे रहा था।
रात से सुबह हो गई, पर कोई पूछने नहीं आया। सोचा नाश्ते के साथ कहीं पानी की बोतल मिले। लेकिन नाश्ता भी नहीं मिला। जैसे ही ट्रेन गोंडा पहुंची तो भागकर पानी के नल के पास गया, पानी पीने के बाद थोड़ी राहत मिली। चंडीगढ़ में तो खाना भी मिल गया, गोंडा में तो सिर्फ सूखा राशन देकर घर भेज दिया।
दोनों यात्रियों ने बताया कि स्कीनिंग से लेकर ट्रेन में बैठने तक करीब सात से आठ घंटे पहले निकलना पड़ रहा है, सिर्फ एक बोतल पानी के भरोसे चौबीस घंटे कैसे कोई काटेगा। इसका मतलब तो साफ है कि ट्रेन में बैठाने के बाद यूटी प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म और यूपी सरकार रास्ते में पूछती नहीं।
15 मई चंडीगढ़ से उन्नाव का सफर, ट्रेन में न साबुन न हैंड सैनिटाइजर, पूरे सफर में सुरक्षा भी जीरो
शुक्रवार 15 मई की रात आठ बजे चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से उन्नाव के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन निकली। इस ट्रेन में 1200 से ज्यादा श्रमिक सवार थे। ट्रेन में सफर करने वाले दीपक और जीवन लाल ने बताया कि चंडीगढ़ स्टेशन पर शुक्रवार को एक बोतल पानी, कोल्ड ड्रिंक व खाना मिला तो काफी अच्छा लगा। लेकिन जैसे ही ट्रेन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से निकली, उसके बाद कोई पूछने नहीं आया।
ट्रेन में अधिकतर लोगों के पास पीने के लिए पानी नहीं था। ट्रेन में कई छोटे बच्चे भी प्यास के चलते रो रहे थे। कुछ लोग अपने साथ पानी की बड़ी बोतल लाए थे, उनसे बच्चों का तो काम चल गया, लेकिन हमलोग पूर रास्ते पानी के लिए परेशान रहे।
बाथरूम में नहीं था, साबुन और सैनिटाइजर
दीपक ने बताया ट्रेन की व्यवस्थाएं चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन तक सही थीं, लेकिन ट्रेन के बाथरूम में गए तो देखा न तो यहां कोई साबुन था और न ही हैंड सैनिटाइजर।
रोजाना लौटाए जा रहे पंचकूला में फंसे लोग
पंचकूला जिला प्रशासन की ओर से दूसरे प्रदेशों के श्रमिकों को अभी भेजा नहीं जा रहा है, नतीजा वे रोजाना चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने घर जाने के लिए अपना सामान लेकर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को भी करीब 100 से ज्यादा श्रमिक पंचकूला के चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे। पुलिस ने उन्हें वहां से किसी तरह समझाकर भेजा।
पंचकूला सेक्टर बीस में रहने वाले श्रमिक जितेंदर ने बताया कि उनके साथ करीब बीस लोग चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन आए थे, सुना था कि श्रमिकों के लिए स्पेशल ट्रेन यूपी और बिहार जा रही है लेकिन यहां तो सिर्फ चंडीगढ़ वालों को भेज रहे हैं, मोहाली और पंचकूला प्रशासन कब श्रमिकों को भेजेगा।