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जिस केस के लिए प्रमोशन-इनाम मिला, उसे कोर्ट में साबित ही नहीं कर पाई
ब्यूरो/अमर उजाला-चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Jan 2014 01:55 AM IST
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तनिष्क डकैती में सोमवार को आठ आरोपी रिहा हो गए जबकि इसे सुलझाकर चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने वाहवाही के साथ-साथ प्रमोशन और मेडल हासिल किए थे। प्रमोशन और इनाम लेने के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने इस केस में दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। वे शोरूम में लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से भी डकैती के आरोपियों की पहचान साबित नहीं कर पाई। वहीं तनिष्क शोरूम का सिक्योरिटी गार्ड स्वर्ण सिंह भी आरोपियों की पहचान करने के बाद कोर्ट में अपने बयान से पलट गया। पुलिस ने केस इतने कमजोर तरीके से रखा कि आर्म्स एक्ट को साबित नहीं कर पाई। सिक्योरिटी गार्ड को जहरीला पदार्थ खिलाने और उसे चोट पहुंचाने को भी पुलिस साबित नहीं कर सकी। ध्यान रहे कि तनिष्क डकैती के नौ आरोपियों को सोमवार को सिर्फ ज्वैलरी रिकवर होने के आधार पर तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई जो कि वे काट चुके थे। सोमवार को ही वे जेल से छूट गए। पुलिस इन पर डकैती और आर्म्स एक्ट की धारा साबित करने में नाकाम रही। मनीमाजरा में तनिष्क के शोरूम में डकैती 12 जनवरी,2011 को हुई थी। पुलिस ने तीन दिन बाद ही 15 जनवरी को इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें से एक आरोपी को जुवेनाइल कोर्ट ने रिहा कर दिया जबकि गिरोह का सरगना पारस सोनी फरार है। उसे अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
47 जवानों को मिला था पुरस्कार
तनिष्क डकैती सुलझाने पर चंडीगढ़ पुलिस के 47 जवानों को नगद इनाम और फर्स्ट क्लास सर्टिफिकेट मिले थे। जवानों को नगद इनाम पांच से लेकर दस हजार के बीच में दिया गया था।
इनको मिली थी प्रमोशन
सब इंस्पेक्टर रणजीत सिंह को प्रमोट कर इंस्पेक्टर बनाया
-कांस्टेबल कंवरपाल को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल दुर्जन सिंह को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल जसबीर कुमार को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल जसविंदर सिंह को हेड कांस्टेबल
प्रशासनिक मेडल भी मिला था इंस्पेक्टर को
इंस्पेक्टर गुरमुख सिंह को तनिष्क डकैती में ही प्रशासनिक मेडल हासिल हुआ था।
डीएसपी को मिली थी इनोवा :
डीएसपी क्राइम सतबीर सिंह को यह केस सुलझाने पर जिप्सी की जगह इनोवा गाड़ी मिली थी।
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47 जवानों को मिला था पुरस्कार
तनिष्क डकैती सुलझाने पर चंडीगढ़ पुलिस के 47 जवानों को नगद इनाम और फर्स्ट क्लास सर्टिफिकेट मिले थे। जवानों को नगद इनाम पांच से लेकर दस हजार के बीच में दिया गया था।
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इनको मिली थी प्रमोशन
सब इंस्पेक्टर रणजीत सिंह को प्रमोट कर इंस्पेक्टर बनाया
-कांस्टेबल कंवरपाल को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल दुर्जन सिंह को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल जसबीर कुमार को हेड कांस्टेबल
-कांस्टेबल जसविंदर सिंह को हेड कांस्टेबल
प्रशासनिक मेडल भी मिला था इंस्पेक्टर को
इंस्पेक्टर गुरमुख सिंह को तनिष्क डकैती में ही प्रशासनिक मेडल हासिल हुआ था।
डीएसपी को मिली थी इनोवा :
डीएसपी क्राइम सतबीर सिंह को यह केस सुलझाने पर जिप्सी की जगह इनोवा गाड़ी मिली थी।