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प्लॉट बताकर बिल्डर ने बेच दिया पहाड़, कब्जा लेने गया मालिक देखकर रह गया दंग

Sun, 12 Aug 2018 06:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Aug 2018 06:51 PM IST
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The builder sold the mountain as the plot
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में एक बिल्डर द्वारा धोखाधड़ी का अजीबोगरीब मामला समाने आया है। यहां, चार कनाल प्लाट का पैसा लेकर बिल्डर ने गैर मुमकिन पहाड़ बेच डाला। यहां तक की जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई लेकिन यह प्लाट शिकायतकर्ता को नहीं मिला। प्रापर्टी डेवलपर्स द्वारा आम लोगों का शोषण किया जा रहा है जो घोर निंदनीय है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और लॉ ऑफ लैंड के तहत मंजूरी भी नहीं दी जा सकती। यह टिप्पणी उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम-2 चंडीगढ़ ने सुनवाई के बाद की।
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उपभोक्त फोरम ने दारा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ सुनवाई करते हुए कंपनी को निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को छह लाख रुपये लौटाए। लौटाई जानेवाली राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करे। साथ ही 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करे।
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शिकायतकर्ता डॉ. विकास दविंद्रा, इंचार्ज रेजिडेंस, रुरल हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर पलसौरा सेक्टर-56 चंडीगढ़ ने खुड्डा लहौरा चंडीगढ़ स्थित मेसर्स दारा एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और इसके डायरेक्टर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। इसमें उन्होंने कहा कि दारा एस्टेट  प्रतिनिधियों ने उन्हें अप्रोच किया और दारा इस्टेट द्वारा ‘व्हिस्पेरिंग ओक फार्म्स प्रोजेक्ट’ के बारे में जानकारी दी।
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The builder sold the mountain as the plot
सांकेतिक तस्वीर
इस प्रोजेक्ट में 6 लाख रुपये में 4 कनाल का एक प्लॉट बेचने की पेशकश की गई। उन्होंने विश्वास करते हुए 2 बीघा 8 बिसवा जमीन गांव बरदार, तहसील रूपनगर स्थित उक्त प्लॉट को बुक करा दिया और 2 लाख रुपये की एक किस्त चेक के जरिए जमा भी करवा दी। शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया कि पूरा प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा होना है और उन्हें प्लाट का कब्जा पूरी डेवलपमेंट के बाद ही दिया जाएगा। लेकिन इस संबंध में दूसरे पक्ष पार्टी की तरफ से कुछ नहीं किया गया और न ही उनके पास इसके लिए जरूरी अप्रूवल और क्लीयरेंस भी थीं।

 शिकायतकर्ता ने दूसरी पार्टी को पूरी 6 लाख रुपये की राशि अदा कर दी। इसमें 30 हजार रुपये सेल डीड का कैश भी शामिल था। उन्होंने कहा कि दारा एस्टेट ने उनके फेवर में 29 फरवरी 2016 को जमीन की रजिस्टर्ड सेल डीड भी करवा दी। उन्होंने कहा कि साइट पर कोई डेवलपमेंट नहीं हुई और ये सिर्फ पेपरों पर ही दिखाई गई। जबकि गैर मुमकिन पहाड़ वाली यह जमीन वाटर बॉडीज के साथ घिरी हुई है। यहां पर किसी भी प्रोजेक्ट और प्लॉट का पता लगाना काफी मुश्किल है। 

इसके बाद ही उन्होंने इसकी फोरम में शिकायत दी। फोरम ने कहा कि रेवन्यू अथॉरिटी ने भी अपनी रिपोर्ट में इस प्लॉट की हदबंदी होने की जानकारी के संबंध में असमर्थता जताई। प्लाट की स्पष्ट रूप से न ही रेवन्यू अथॉरिटी और न ही ओपी की तरफ से हदबंदी की गई, इसलिए शिकायतकर्ता को प्लाट का कब्जा देने का सवाल ही नहीं उठता है और ये सब झूठ है। इसके अलावा जिस दिन 6 फरवरी 2014 को ओपी ने शिकायतकर्ता से पैसे लिए, उस वक्त वह इस जमीन के मालिक भी नहीं थे।दिए गए समय पर दूसरे पक्ष की ओर से जवाब दाखिल न करने पर उपभोक्ता फोरम ने उसे स्ट्रक ऑफ कर दिया। 
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