जालंधर: तेज बुखार के बाद अस्पताल में किशोरी की मौत, परिजनों का आरोप- इंजेक्शन लगाने के बाद उठी नहीं
एसएमओ डॉ. संजीव कुमार और डॉ. जेके संधू ने कहा कि लड़की का इलाज पूरी तरह ठीक से किया गया। लेकिन जब लड़की अस्पताल पहुंची, उसे तेज बुखार था। डॉक्टरों ने कहा कि उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. जसबीर ने पैरासिटामोल दिया और एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन लगाया। इससे मरीज की मौत नहीं हो सकती।
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जालंधर के नकोदर सिविल अस्पताल में रविवार सुबह 15 वर्षीय लड़की की तेज बुखार के बाद मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। लड़की के पिता देसराज निवासी गांव कोटला जंगा ने बताया कि वह गांव महूवाल के जसवंत राय और गांव के ही रूपिंदर जीत के साथ सुबह पांच बजे बेटी मानसी कुमारी (15) को सिविल अस्पताल नकोदर लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने कहा कि भर्ती कर लो लेकिन काफी देर तक इलाज नहीं मिला। सुबह साढ़े सात बजे के करीब स्टाफ नर्स ने एक इंजेक्शन लगाया। इसके बाद सोई बेटी उठी ही नहीं।
रूपिंदर जीत ने कहा कि मानसी उनके पड़ोस में रहती है। वह खुद उसे लेकर अस्पताल पहुंचे थे लेकिन डॉक्टरों ने ठीक से इलाज नहीं किया। मृतक की मां ने कहा कि उन्हें एक बजे फोन आया कि उसकी बेटी की मौत हो चुकी है। रात को बेटी थोड़ी देर से सोई थी क्योंकि स्कूल में पेपर चल रहे हैं। लेकिन सुबह अचानक से तेज बुखार के बाद बेटी पिता के साथ अस्पताल गई थी। सोचा नहीं था कभी लौट कर नहीं आएगी। घटना के बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने 174 की कार्रवाई की है।
एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन से नहीं हो सकती मौत: डॉक्टर
नकोदर सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. संजीव कुमार और डॉ. जेके संधू ने कहा कि लड़की का इलाज पूरी तरह ठीक से किया गया। लेकिन जब लड़की अस्पताल पहुंची, उसे तेज बुखार था। डॉक्टरों ने कहा कि उस दौरान ड्यूटी पर मौजूद मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. जसबीर ने पैरासिटामोल दिया और एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन लगाया। इससे मरीज की मौत नहीं हो सकती।
वहीं ब्लड टेस्ट किया तो पता चला कि उसके तेजी से सेल कम हो रहे थे। हो सकता है कि डेंगू से मौत हुई हो। मौत की सही वजह पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगी। अगर डेंगू से मौत हुई है तो यह जालंधर में पहला मामला होगा। उधर, सिविल सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने मामले में जांच की बात कही है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।