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गार्डनिंग के शौक ने घर में कराया कॉम्पीटिशन, माता-पिता का किचन गार्डन, बहू-बेटा का टैरेस गार्डन
Sat, 22 Feb 2020 03:57 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 22 Feb 2020 03:57 PM IST
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बागवानी का शौक
- फोटो : अमर उजाला
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पेड़-पौधे और हरियाली के लिए जब टशन हो तो घर में ही कॉम्पीटिशन होने लगता है, वो भी पड़ोसी नहीं बल्कि माता-पिता व बहु-बेटे के बीच। माता-पिता ने किचन गार्डन को ऑर्गेनिक खेती के तौर पर विकसित किया है तो बहू-बेटा ने घर की छत पर टैरेस गार्डन बना डाला। दोनों में लगातार कॉम्पीटिशन चलता है कि किसके गार्डन में कितने सुंदर पेड़ व फूल हैं।
सेक्टर 21 की कोठी नंबर 1105 निवासी संजीव चड्ढा अपनी पत्नी अंजू चड्ढा, बेटे अंकुश चंड्ढा और बहू इलिका चड्ढा के साथ रहते हैं। आलीशान घर के साथ ही संजीव चड्ढा ने बेहतरीन गार्डन बनाए हैं। इसकी देखभाल वे खुद करते हैं। 15 दिन में एक बार माली को बुलाते हैं। किचिन गार्डन में संजीव चड्ढा ने कई सब्जियों और सलाद के पत्ते लगा रखे हैं। वहीं उनके बेटे ने अपने गार्डन में सुंदर फूलों के साथ ही औषधि पौधों को भी लगाया। परिवार ने तय कर रखा है कि प्रतिदिन एक घंटा गार्डन को देना है।
ब्रोकली के साथ ही तुलसी के कई प्रकार
किचन गार्डन में ब्रोकली, बैंगन, पुदीना, सौंफ, अजवायन, सलाद पत्ता, मरवा (महुआ), लौंग, लेमन ग्रास, इलायची के अलावा गोभी, मिर्च, अदरक भी लगाई हुई है। वहीं टैरेस गार्डन में गेंदा, गुलाबों की अलग-अलग प्रजाति, अमरूद और अन्य प्रकार के पौधों को लगाया गया है। पौधों के लिए बेहतर गमले और उन्हें धूप बेहतर तरीके से मिले इसका भी खास ध्यान रखा जाता है।
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सेक्टर 21 की कोठी नंबर 1105 निवासी संजीव चड्ढा अपनी पत्नी अंजू चड्ढा, बेटे अंकुश चंड्ढा और बहू इलिका चड्ढा के साथ रहते हैं। आलीशान घर के साथ ही संजीव चड्ढा ने बेहतरीन गार्डन बनाए हैं। इसकी देखभाल वे खुद करते हैं। 15 दिन में एक बार माली को बुलाते हैं। किचिन गार्डन में संजीव चड्ढा ने कई सब्जियों और सलाद के पत्ते लगा रखे हैं। वहीं उनके बेटे ने अपने गार्डन में सुंदर फूलों के साथ ही औषधि पौधों को भी लगाया। परिवार ने तय कर रखा है कि प्रतिदिन एक घंटा गार्डन को देना है।
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ब्रोकली के साथ ही तुलसी के कई प्रकार
किचन गार्डन में ब्रोकली, बैंगन, पुदीना, सौंफ, अजवायन, सलाद पत्ता, मरवा (महुआ), लौंग, लेमन ग्रास, इलायची के अलावा गोभी, मिर्च, अदरक भी लगाई हुई है। वहीं टैरेस गार्डन में गेंदा, गुलाबों की अलग-अलग प्रजाति, अमरूद और अन्य प्रकार के पौधों को लगाया गया है। पौधों के लिए बेहतर गमले और उन्हें धूप बेहतर तरीके से मिले इसका भी खास ध्यान रखा जाता है।
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एक साथ नहीं जाते कहीं बाहर
संजीव चड्ढा ने बताया कि हम पूरे परिवार के साथ एक दिन से ज्यादा कहीं बाहर नहीं जाते हैं। यदि ऐसी स्थिति आती है कि सभी को जाना है तो एक व्यक्ति घर में जरूर रहता है जो गार्डन का ध्यान रखता है। पौधों को समय पर खाद व पानी मिले इसके लिए एक माली को बुलाते हैं।
टैरेस गार्डन के पास बनाई झोपड़ी
गार्डन में ढाबे का आनंद लेने के लिए छत पर टैरेस गार्डन के पास ही एक कमरे में झोपड़ी बनाई है। जिसे कभी भी खिसकाकर छत पर बाहर लाया जा सकता है। बारिश के मौसम में परिवार के साथ खाने का आनंद झोपड़ी में ही लिया जाता है।
टैरेस गार्डन के पास बनाई झोपड़ी
गार्डन में ढाबे का आनंद लेने के लिए छत पर टैरेस गार्डन के पास ही एक कमरे में झोपड़ी बनाई है। जिसे कभी भी खिसकाकर छत पर बाहर लाया जा सकता है। बारिश के मौसम में परिवार के साथ खाने का आनंद झोपड़ी में ही लिया जाता है।