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शिक्षक सर्वे करें या बच्चों को ऑनलाइन-ऑफलाइन में पढ़ाएं

Sun, 13 Feb 2022 02:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 02:30 AM IST
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Take teacher survey or teach children online-offline
चंडीगढ़। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को इस हफ्ते चाइल्ड मैपिंग सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे करने के लिए वर्ष 2022 के दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सरकारी स्कूल के शिक्षकों पर पहले ही अतिरिक्त बोझ है, शिक्षकों को ऑफलाइन कक्षाओं के साथ ऑनलाइन माध्यम में भी बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। शिक्षक दिन में ऑफलाइन कक्षाएं लेने के साथ शाम में बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं लेते हैं और बच्चों की काउंसलिंग भी करते हैं।
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यूटी कैडर एजुकेशनल इंप्लाइज यूनियन के प्रधान स्वर्ण सिंह कंबोज ने बताया कि कोविड में भी अभी कुछ शिक्षक ड्यूटी दे रहे हैं। वहीं, स्कूल खुलने के बाद से अभी स्कूलों में सभी विद्यार्थी नहीं आ रहे हैं, इसलिए शिक्षक शाम को घर से ऑनलाइन कक्षाएं भी लेते हैं। वहीं, दिन में बच्चों को ऑफलाइन माध्यम में पढ़ाते हैं। इसके साथ ही विभाग ने बच्चों की नियमित काउंसलिंग करने के भी निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग ने चाइल्ड मैपिंग सर्वे की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को सौंप दी है, जबकि ये काम ठेकेदार के जरिए भी करवाए जा सकते हैं।
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बता दें कि शिक्षकों को पढ़ाने की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए, लेकिन उन्हें सरकारी सर्वे, चुनाव, स्वास्थ्य इत्यादि क्षेत्रों में ड्यूटी पर लगा दी जाती है। चाइल्ड मैपिंग सर्वे में शिक्षकों को हर घर में जाकर लाइव सर्वे करना है। ऐसे में महिला शिक्षकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
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18 से कम उम्र के बच्चों का होगा सर्वे
चाइल्ड मैपिंग सर्वे में शहर के 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शामिल करना होगा। सर्वे में बच्चे के नाम, उम्र, कक्षा, पते के साथ कहां, कौन से स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, माता-पिता का व्यवसाय आदि की जानकारी लेनी है। इसके साथ बच्चे की मातृभाषा को भी शामिल करना है। बच्चे की उम्र 5 से 18 वर्ष के बीच है। स्कूल छूट गया है तो उसे ड्राप आउट की श्रेणी में डाला जाएगा। अगर कभी स्कूल नहीं गया है तो नेवर एनरोल्ड की श्रेणी में डाला जाएगा। सर्वे शीट में ही डाटा को भरना है।

स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को खोजना मकसद
चाइल्ड मैपिंग सर्वे का उद्देश्य ऐसे बच्चों का पता लगाना होता है, जो कभी स्कूल नहीं गए या किसी कारणों से स्कूल छोड़ दिया है। शहर में भी कई बच्चे बाजारों में दुकानों और सब्जी के ठेलों पर काम करते हैं। वहीं, शहर क अलग-अलग लाइट प्वाइंट पर गुब्बारे और अन्य सामान बेचते हुए देखे जाते हैं। शिक्षा विभाग का मकसद ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उसका कारण पता लगाकर उन्हें स्कूल तक लेकर आना है।
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