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SYL और बिल के समर्थन में उतरे बनूड़ के किसान, विरोध प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, बनूड़(मोहाली)
Updated Tue, 22 Mar 2016 02:10 PM IST
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एसवाईएल के समर्थन में आए किसान नहर पाटने का विरोध करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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एसवाईएल नहर और बिल के समर्थन में अब बनूड़ के किसान भी उतर आए हैं। उन्होंने बनूड़ में नहर पाटने का विरोध करते हुए धरना दिया। विधानसभा में सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को बंद करने के लिए पास किए गए बिल के बाद अकाली वर्करों ने नहर भरनी शुरू कर दी थी। किसानों की हमदर्दी लेने के लिए शुरू किया गया यह खेल अब सत्ताधारी और विरोधी पार्टियों के लिए गले की हड्डी बनने लगा है।
सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने चितकारा युनिवर्सिटी के पास हाईवे पर धरना देकर नहर बंद करने का विरोध किया। किसानों का कहना है कि उनको नहर से पानी चाहिए, जिससे वह खेतों की सिंचाई कर सकें। बता दें कि चितकारा युनिवर्सिटी के पास अकाली वर्करों ने जेसीबी मशीनें लगाकर एसवाईएल नहर बंद कर दी थी।
मार्केट कमेटी के चेयरमैन साधू सिंह खलोर, किसान यूनियन के प्रधान बलवंत सिंह नंडियाली, आम आदमी पार्टी के जिला सचिब बलबीर सिंह पुंज, मुख्तियार सिंह पूर्व सरपंच नडियाली, महिंदर सिंह, पुनीत जैन, अमर सिंह पूर्व सरपंच मिर्जापुर, सुखदेव सिंह वजीदपुर, प्रेम कुमार मानकपुर ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को मूर्ख बना रही है।
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उन्होंने कहा कि बनूड़, राजपुरा, डेराबस्सी, लालड़ू और घनोर क्षेत्रों में जहां एसवाईएल नहर निकलती है, वहां के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर नहर नहीं चली तो इस क्षेत्र के किसानों की जमीनें बंजर हो जाएंगी। साथ ही किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएंगे। किसानों ने घोषणा कि अगर राज्य सरकार ने एसवाईएल नहर बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया तो वह गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।
वह बताएंगे कि सरकार 2017 की विधान सभा के चुनाव नजदीक आते देख नहर को बंद करने का ड्रामा कर रही है। किसानों ने कहा कि इसकी शुरुआत गांव जांसलां, जासली और फरीदपुर गढ़ी से गई है। इस मौके पर किसानों ने कहा कि अगर सरकार ने नहर बंद करने का निर्णय वापस नहीं किया तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे।
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सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने चितकारा युनिवर्सिटी के पास हाईवे पर धरना देकर नहर बंद करने का विरोध किया। किसानों का कहना है कि उनको नहर से पानी चाहिए, जिससे वह खेतों की सिंचाई कर सकें। बता दें कि चितकारा युनिवर्सिटी के पास अकाली वर्करों ने जेसीबी मशीनें लगाकर एसवाईएल नहर बंद कर दी थी।
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मार्केट कमेटी के चेयरमैन साधू सिंह खलोर, किसान यूनियन के प्रधान बलवंत सिंह नंडियाली, आम आदमी पार्टी के जिला सचिब बलबीर सिंह पुंज, मुख्तियार सिंह पूर्व सरपंच नडियाली, महिंदर सिंह, पुनीत जैन, अमर सिंह पूर्व सरपंच मिर्जापुर, सुखदेव सिंह वजीदपुर, प्रेम कुमार मानकपुर ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को मूर्ख बना रही है।
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उन्होंने कहा कि बनूड़, राजपुरा, डेराबस्सी, लालड़ू और घनोर क्षेत्रों में जहां एसवाईएल नहर निकलती है, वहां के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि अगर नहर नहीं चली तो इस क्षेत्र के किसानों की जमीनें बंजर हो जाएंगी। साथ ही किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाएंगे। किसानों ने घोषणा कि अगर राज्य सरकार ने एसवाईएल नहर बंद करने का निर्णय वापस नहीं लिया तो वह गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।
वह बताएंगे कि सरकार 2017 की विधान सभा के चुनाव नजदीक आते देख नहर को बंद करने का ड्रामा कर रही है। किसानों ने कहा कि इसकी शुरुआत गांव जांसलां, जासली और फरीदपुर गढ़ी से गई है। इस मौके पर किसानों ने कहा कि अगर सरकार ने नहर बंद करने का निर्णय वापस नहीं किया तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे।