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Stubble Burning: पंजाब में 2175 स्थानों पर जली पराली, कई शहरों की हवा अब भी 'खराब' की श्रेणी में
Sun, 13 Nov 2022 08:09 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 13 Nov 2022 08:09 PM IST
सार
इस सीजन पराली जलाने के 5186 मामलों के साथ संगरूर पहले स्थान पर है।4008 मामलों के साथ फिरोजपुर दूसरे, 4006 मामलों के साथ बठिंडा तीसरे और 3296 मामलों के साथ पटियाला चौथे नंबर पर है। रविवार को पंजाब के अमृतसर का एक्यूआई 201, मंडी गोबिंदगढ़ का 223 और जालंधर का 229 दर्ज किया गया।
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अमृतसर में जल रही पराली।
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
पंजाब सरकार भले ही कितने दावे करे लेकिन प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में फिलहाल कमी आती नजर नहीं आ रही है। रविवार को पराली जलाने के 2175 मामले सामने आए हैं। इसके बाद इस सीजन में पराली जलाने के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 45319 पहुंच गई है। रविवार को सबसे अधिक 337 मामले मोगा जिले में दर्ज किए गए हैं और सबसे कम केवल एक मामला पठानकोट जिले में आया है।
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उधर, लगातार पराली जलाने से पंजाब के बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर अभी भी खराब श्रेणी में बना है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 200 के पार रह रहा है। पंजाब में 15 सितंबर से पराली जलाने के मामले आना शुरू हो गए थे। अभी तक यह सिलसिला जारी है। इस सीजन में अब तक सबसे अधिक 3916 पराली जलाने के मामले दो दिन पहले 11 नवंबर को सामने आ चुके हैं।
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इससे पहले दो नवंबर को 3634 मामले सामने आए थे। रविवार को पराली जलाने के 2175 मामले सामने आए। हालांकि पिछले दो सालों के मुकाबले यह कम रहे। यहां गौरतलब है कि साल 2020 में 13 नवंबर को 2450 और साल 2021 में 3742 मामले सामने आए थे।
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इस साल अब तक के सीजन में पराली जलाने के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 45319 पहुंच गई है। रविवार को सबसे अधिक मोगा में पराली जली और इसके बाद दूसरे स्थान पर 304 मामलों के साथ मुक्तसर रहा है। बठिंडा में 274 और लुधियाना में 214 मामले दर्ज किए गए हैं। इस सीजन पराली जलाने के 5186 मामलों के साथ संगरूर पहले स्थान पर है।
4008 मामलों के साथ फिरोजपुर दूसरे, 4006 मामलों के साथ बठिंडा तीसरे और 3296 मामलों के साथ पटियाला चौथे नंबर पर है। रविवार को पंजाब के अमृतसर का एक्यूआई 201, मंडी गोबिंदगढ़ का 223 और जालंधर का 229 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के प्रदूषण में लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है।