16 को काटने वाले स्ट्रे डॉग की मौत, रेबिज की दहशत
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जिस स्ट्रे डॉग ने मनीमाजरा में 11 बच्चों सहित 16 लोगों को काटा था, उसकी वीरवार को मौत हो गई। उसे घटना के बाद से ही नगर निगम ने आब्जर्वेशन में रखा था।
उसकी मौत के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि इस स्ट्रे डॉग को रेबिज था। हालांकि, सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी अधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
नगर निगम कसौली स्थित सेंट्रल इस्टीट्यूट में शुक्रवार को सैंपल जांच के लिए भेजेगी। पिछले साल भी जिस स्ट्रे डॉग ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों को काटा था, उसकी भी एक दिन बाद मौत हो गई थी और उसमें भी रेबिज की पुष्टि हुई थी।
उधर, लोगों को काटने वाले स्ट्रे डॉग के मरने से पीड़ित बच्चों के परिवार वाले भी दहशत में हैं, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि जिस डॉग या डॉगी को रेबिज होता है, वह जिसे काटता है, उसकी 24 घंटे के बीच मौत हो सकती है।
एमओएच विभाग के डॉ. एमएल कंबोज का कहना है कि सैंपल की जांच के बाद ही रेबिज की पुष्टि की जा सकती है। जिस स्ट्रे डॉग ने लोगों को काटा था, उसे पत्थर मारकर लोगों ने गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसलिए बिना रिपोर्ट आए कुछ भी कहना मुश्किल है।
ट्राइसिटी में नहीं मिला इंजेक्शन, अंबाला से लाना पड़ा
स्ट्रे डॉग की शिकार पांच साल की बच्ची सादिया की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। बुधवार रात करीब तीन बजे पीजीआई के डाक्टरों ने उसके होंठ और कान की सर्जरी की। इससे पहले एंटी रैबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिंस वैक्सीन उसे लगाई गई। इस वैक्सीन की इस समय जबरदस्त कमी है।
वैक्सीन के लिए सादिया के परिजन पूरी रात भर चंडीगढ़, पंचकूला और मोहली के चक्कर काटते रहे लेकिन किसी भी केमिस्ट शॉप से वैक्सीन नहीं मिली। रात 10 बजे पीजीआई के डाक्टरों ने अंबाला में सीरम मिलने की संभावना जताई। परिजन सीधे अंबाला पहुंचे। रात करीब 12 बजे उन्हें वैक्सीन मिली। उसके बाद उसे वैक्सीन लगाई गई और उसका इलाज हुआ।
प्लास्टिक सर्जरी के डाक्टर अतुल पराशर ने बताया कि बच्ची के जख्म साफ कर सर्जरी कर दी गई है। फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है। यदि जरूरत पड़ी तो दोबारा सर्जरी की जाएगी। सर्जरी के बाद भी बच्ची चेहरे पर निशान बने रहेंगे।
मेयर डाक्टरों को लाईं, तब हुआ इलाज
पांच साल की बच्ची के इलाज में भी पीजीआई के डाक्टरों का रवैया लापरवाही वाला रहा। बच्ची के मामा जिशान ने आरोप लगाया कि सुबह 11 बजे सादिया पीजीआई पहुंच गई थी, लेकिन जब तक वैक्सीन नहीं आई, तब तक डाक्टरों ने बच्ची को छुआ तक नहीं।
अंबाला से वैक्सीन लाने के बाद भी डाक्टर इलाज करने के लिए आनाकानी करते रहे। जब मेयर पूनम शर्मा ने डाक्टरों से इलाज करने को कहा तब जाकर करीब एक बजे उसे वैक्सीन लगाई गई। उसके बाद तीन बजे उसकी सर्जरी की गई।
मेयर उठा रही दवा का खर्चा
सादिया की दवा का खर्चा मेयर पूनम शर्मा उठा रही हैं। सादिया के मामा जिशान ने बताया कि रात में ही मेयर पहुंच गई थी और जब तक सर्जरी नहीं हुई, तब तक वह पीजीआई में मौजूद रहीं। उन्होंने केमिस्ट शॉप को कह दिया कि जो भी दवाई आए, उसका भुगतान वे करेंगी।
शहर में नहीं है ह्यूमन वैक्सीन
जब कुत्ते के काटने से व्यक्ति के शरीर से खून निकलने लगे तो इलाज के तौर पर सीरम का इस्तेमाल किया जाता है। सीरम दो प्रकार के होते हैं। पहली इक्वाइन (एनिमल) और दूसरी इम्यिनोग्लोब्यूलिंस (ह्यूमन)। इक्वाइन सीरम सिर्फ चंडीगढ़ के सेक्टर 19 और 38 की डिस्पेंसरी में मिलती है।
हालांकि यह सभी पर प्रभावी नहीं होता। एक या दो प्रतिशत मरीज पर रिएक्शन करता है। इसलिए पहले इसकी टेस्टिंग की जाती है। फिर मरीजों में लगाया जाता है। इम्यिूनोग्लोब्यूलिंस (ह़यमन) सीरम सभी पर सूट करता है। पीजीआई के डाक्टर इसी का इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल इसकी पूरे शहर में शार्टेज चल रही है।
मार्केट रेट
इक्वाइन सीरम--------450 रुपये (बच्चों के लिए)
इक्वाइन सीरम--------800 रुपये (व्यस्कों के लिए)
(चंडीगढ़ की डिसपेंसरी में यह 50 रुपये में लगाई जाती है)
इम्यिनोग्लोब्यूलिंस (ह्यूमन)---2800 रुपये
(यह डिस्पेंसरी में उपलब्ध नहीं)