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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सेवा में कोताही की दोषी करार, जुर्माना लगा
अमित शर्मा/अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 04 May 2016 12:45 PM IST
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मोहाली की परमानेंट लोक अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सेवा में कोताही की दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक पर जहां 25 हजार जुर्माना लगाया है। साथ ही दस हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप के बैंक को चुकाने होंगे। इस संबंधी सुमन रानी रूपनगर ने अदालत में केस दायर किया था। बैंक को सारा भुगतान तीस दिन में करना होगा। साथ ही छह प्रतिशत ब्याज भी चुकाना होगा।
अदालत में महिला ने बताया कि उसके पति ने बैंक से हाउसिंग लोन लिया हुआ था। पति की मौत 15 अप्रैल 2015 को मौत हो गई थी। उसने बाद में बैंक के लोन का सारा भुगतान कर दिया। जबकि बैंक की तरफ से 20 अगस्त 2015 को उन्हें नो डयूज सर्टिफिकेट जारी कर दिया। लेकिन बैंक की तरफ से उन्हें ओरिजन सेल डीड वापस नहीं की गई। उन्होंने बैंक को नोटिस भी भेजा। इसके बाद भी बैंक ने उन्हें ओरिजनल सेल डीड वापस नहीं की।
अदालत ने बैंक में माना है कि मृतक के पति ने लोन लिया हुआ था। लोन उन्होंने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस करवाई हुई थी। जिसके बाद एसबीआई ने 95 प्रतिशत लोन की अदायगी कर दी। जबकि पांच प्रतिशत लोन की अदायगी उन्होंने की। अदालत ने सुनवाई माना कि मृतक की पत्नी ने लोन भर दिया था। इसके बाद उसकी पत्नी लगातार बैंक में संपर्क में थी। उसने कई सेल डीड के लिए बैंक से संपर्क किया। लेकिन उसके अनुरोध करने पर भी बैंक द्वारा सेल डीड देने से मना कर दिया। इस तरह से उसे परेशान किया गया।
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अदालत में महिला ने बताया कि उसके पति ने बैंक से हाउसिंग लोन लिया हुआ था। पति की मौत 15 अप्रैल 2015 को मौत हो गई थी। उसने बाद में बैंक के लोन का सारा भुगतान कर दिया। जबकि बैंक की तरफ से 20 अगस्त 2015 को उन्हें नो डयूज सर्टिफिकेट जारी कर दिया। लेकिन बैंक की तरफ से उन्हें ओरिजन सेल डीड वापस नहीं की गई। उन्होंने बैंक को नोटिस भी भेजा। इसके बाद भी बैंक ने उन्हें ओरिजनल सेल डीड वापस नहीं की।
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अदालत ने बैंक में माना है कि मृतक के पति ने लोन लिया हुआ था। लोन उन्होंने एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस करवाई हुई थी। जिसके बाद एसबीआई ने 95 प्रतिशत लोन की अदायगी कर दी। जबकि पांच प्रतिशत लोन की अदायगी उन्होंने की। अदालत ने सुनवाई माना कि मृतक की पत्नी ने लोन भर दिया था। इसके बाद उसकी पत्नी लगातार बैंक में संपर्क में थी। उसने कई सेल डीड के लिए बैंक से संपर्क किया। लेकिन उसके अनुरोध करने पर भी बैंक द्वारा सेल डीड देने से मना कर दिया। इस तरह से उसे परेशान किया गया।
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