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Hindi News ›   Chandigarh ›   Sri Guru Gobind Singh Ji Maharaj shri Sahib (Kirpan) has decided to face the public.

EXCLUCIVE: आप भी देख सकेंगे गुरु गोबिंद की किरपाण

Sat, 12 Apr 2014 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मालेरकोटला (संगरूर)
ब्यूरो/अमर उजाला, मालेरकोटला (संगरूर) Updated Sat, 12 Apr 2014 11:44 PM IST
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Sri Guru Gobind Singh Ji Maharaj shri Sahib (Kirpan) has decided to face the public.

करीब तीन सदियों के बाद नवाब घराने ने दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज द्वारा भेजी श्री साहिब (किरपाण) को जनता के रूबरू करने का फैसला कर लिया है।

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किसी समय नवाबी रियासत रही मालेरकोटला के आखिरी नवाब जनाब इफ्तिखार अली खान की एकमात्र जीवित मंझली बेगम मुन्नव्वर-उन-निसां ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में यह महत्वपूर्ण फैसला करके सिख समाज को दशमेश पिता की किरपाण साहिब को प्रत्यक्ष रूप से खालसे की सृजना (बैसाखी) के दो दिन बाद यानी 15 अप्रैल को सामने लाने की घोषणा की है।

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ऐतिहासिक धरोहर को संभालेगा ट्रस्ट

Sri Guru Gobind Singh Ji Maharaj shri Sahib (Kirpan) has decided to face the public.

आखिरी बेगम मुन्नव्वर-उन-निसां ने मुस्लिम सिख समाज में आपसी भाईचारे की पुरातन सांझ को बरकरार रखने के लिए और इस विरासत को संभाले रखने के लिए एक विशेष ट्रस्ट भी स्थापित किया है जो आने वाले समय में इस बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर को संभालने का काम करेगा।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बेगम की मौजूदगी में बताया कि उन्हें खुशी है कि अब शीघ्र ही उनके बुजुर्गों को गुरु गोबिंद सिंह द्वारा भेंट स्वरूप भेजी किरपाण के श्रद्धालु दर्शन करेंगे।

ट्रस्ट के अधिकारी एडवोकेट मुबीन फारूकी ने बताया कि 15 अप्रैल को एक धार्मिक समारोह का आयोजन करके दशमेश पिता की किरपाण को नवाब खानदान के खंडहरनुमा ऐतिहासिक महल (मुबारक मंजल) में रखा जाएगा। इस धार्मिक कार्यक्रम को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है।

यह है श्री साहिब का मामला

Sri Guru Gobind Singh Ji Maharaj shri Sahib (Kirpan) has decided to face the public.

इतिहास इस बात की गवाही भर रहा है कि दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज और मुस्लिम शासक औरंगजेब के बीच चले संघर्ष के दौरान जिस समय सरहिंद के सूबेदार द्वारा छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चिनवाया जा रहा था उस समय एकमात्र मुस्लिम नवाब मालेरकोटला शेर मोहम्मद खान ने सूबेदार को पत्र लिखकर इसका विरोध किया था।

नवाब की इस दलेरी की प्रशंसा करते हुए दशमेश पिता ने उस समय एक श्री साहिब (किरपाण) भेंट स्वरूप नवाब मालेरकोटला को भेजी थी। दशकों से इस श्री साहिब को श्रद्धालुओं के रूबरू किए जाने की मांग उठ रही है। हालांकि यह किरपाण कहां है, इस बारे में नवाब घराने द्वारा लगातार चुप्पी साधी हुई थी।

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