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एक्सक्लूसिव: अब राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी खिलाड़ियों का होगा डोप टेस्ट, यहां पढ़ें पूरा फैसला
Sat, 25 May 2019 02:52 PM IST
खुशबू गोयल
हरीश पौड़िया, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
हरीश पौड़िया, अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 25 May 2019 02:52 PM IST
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dope test
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खिलाड़ी बनने की चाह रखने वालों के लिए बड़े काम की खबर है। दरअसल, अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी डोप टेस्ट का सामना करना होगा। वर्तमान दौर में खिलाड़ियों में बेहतर प्रदर्शन करने व आगे बढ़ने की होड़ लगी हुई है। इस होड़ में बेहतर नतीजे लाने के लिए वे नशे का इस्तेमाल तक करने लगे हैं, जो डॉप टेस्ट के दायरे में आता है। नशे व डोप के इस प्रकोप से उभरते हुए खिलाड़ियों को बचाने के लिए खेल संघ के साथ-साथ खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय ने भी अपनी कमर कस ली है।
इसके तहत अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के दौरान ही खिलाड़ियों का डोप टेस्ट होगा। इस बारे में कुछ दिन पहले ही नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय के सचिव ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया व एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। मंत्रालय के खेल सचिव राधे श्याम जुलानिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य स्तरीय खेलों में भी डोप टेस्ट कराने का फैसला लिया गया। बैठक में खेल संघों से उनकी प्रतियोगिताओं व ट्रेनिंग कैंप के कैलेंडर मांगे गए हैं।
ये सभी कैलेंडर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) को भी भेजे जाएंगे। इसके बाद नाडा की टीम किसी भी राज्य स्तरीय टूर्नामेंट या ट्रेनिंग कैंप में जाकर किसी भी खिलाड़ी का डोप टेस्ट कर सकती है। इसके अतिरिक्त इस बैठक में खिलाड़ियों, कोच व अन्य स्टाफ को डोपिंग पर जागरूक करने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर कोई राज्य एसोसिएशन सहयोग नहीं करता तो उस खेल संघ द्वारा उस राज्य में हुई प्रतियोगिता या ट्रेनिंग कैंप के परिणाम की मान्यता को रद्द करने के निर्देश दिए हैं।
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इसके तहत अब राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के दौरान ही खिलाड़ियों का डोप टेस्ट होगा। इस बारे में कुछ दिन पहले ही नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्रालय के सचिव ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया व एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। मंत्रालय के खेल सचिव राधे श्याम जुलानिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य स्तरीय खेलों में भी डोप टेस्ट कराने का फैसला लिया गया। बैठक में खेल संघों से उनकी प्रतियोगिताओं व ट्रेनिंग कैंप के कैलेंडर मांगे गए हैं।
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ये सभी कैलेंडर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) को भी भेजे जाएंगे। इसके बाद नाडा की टीम किसी भी राज्य स्तरीय टूर्नामेंट या ट्रेनिंग कैंप में जाकर किसी भी खिलाड़ी का डोप टेस्ट कर सकती है। इसके अतिरिक्त इस बैठक में खिलाड़ियों, कोच व अन्य स्टाफ को डोपिंग पर जागरूक करने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर कोई राज्य एसोसिएशन सहयोग नहीं करता तो उस खेल संघ द्वारा उस राज्य में हुई प्रतियोगिता या ट्रेनिंग कैंप के परिणाम की मान्यता को रद्द करने के निर्देश दिए हैं।
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कुश्ती संघ ने पत्र जारी कर डोप पर स्पष्ट की थी अपनी मंशा
कुछ दिन पहले ही भारतीय कुश्ती संघ ने डोपिंग टेस्ट पर अपनी मंशा साफ करते हुए एक पत्र अपने सभी राज्य संघों को लिखा था। इस पत्र में संघ की ओर से साफ किया गया था कि अगर कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय शिविर या अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में डोप टेस्ट में फेल होता है तो वहां नियुक्त प्रशिक्षकों पर भी प्रतिबंध व जुर्माना लगाया जाएगा।
इस पत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने भारतीय कुश्ती संघ को 32 लाख रुपये का जुर्माना यूनाइटेड वर्ल्ड फेडरेशन को देना पड़ा था जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब होने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा था।
इस पत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने भारतीय कुश्ती संघ को 32 लाख रुपये का जुर्माना यूनाइटेड वर्ल्ड फेडरेशन को देना पड़ा था जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब होने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा था।