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कोई शरारत सुनाकर लगा रहा था ठहाके, कोई फिर से कक्षा में बैठकर हुआ भावुक

Sat, 08 Oct 2022 02:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 08 Oct 2022 02:30 AM IST
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Someone was laughing after telling a prank, someone got emotional again sitting in the class
सेक्टर-16 स्थित मॉडल स्कूल में आयोजित एलुमनाई मीट के दौरान पुरानी यादे करतीं पुराने विद्यार्थी। - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। अरे देखो-देखो यहां टेंट लगा था जहां हम बैठकर पढ़ते थे, अब कितनी सुंदर बिल्डिंग बन गई है। अरे... यह नल देखकर कुछ याद आया जहां हमारी चलती थी और किसी को पानी नहीं पीने देते थे। ये रैंप हमें अपने स्कूल के दिनों में लेकर आ जाते हैं, मन करता है पहले जैसे लंच टाइम में एक दूसरे को पकड़ने का खेल खलते थे, फिर से खेलने लगूं। अरे हमें दो घंटे होने को है अब यह भी सोच लो कि घर में बच्चे इंतजार कर रहे होंगे, न जाने कैसे इतनी जल्दी वक्त निकल गया। स्कूल के साथ बंगाली स्वीट्स के पर्दे हटाकर केक चुरा लेते थे। गवर्नमेंट मॉडल स्कूल सेक्टर-16 में शुक्रवार की शाम 4 बजे से लेकर लगभग पौने छह बजे तक इसी तरह का संवाद था उम्र में कुछ ज्यादा लोग स्कूल की कक्षा में बैठकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे। पूछने पर पता चला कि स्कूल का वर्ष 1971 का बैच अपनी यादें ताजा करने आया है।
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6वीं और 7वीं कक्षा के बैच को 50 वर्ष हो गए हैं। इतने सालों बाद लगभग 9 लोग एक फोन पर फिर से स्कूल में पहुंचे। सफलता की सीढ़ी चढ़ने वाले लोग जब अपने मित्रों से मिले तो ऐसा लगा उन्हें सारे जहां की खुशियां मिल गईं। बातें करते हुए एक दूसरे से बोले याद है हम बाहर जाते थे तो 50 पैसे में बर्गर और कोल्डड्रिंक का कोंबो पैक लेते थे। स्कूल की दीवार के साथ ही एक बुजुर्ग छोले कुल्चे लेकर आते थे। 10 पैसे में वह हमें भरपेट खिलाते थे। सेक्टर- 16 स्कूल की प्रिंसिपल पवनीत कौर ने बताया कि वह भी नर्सरी से लेकर 12वीं तक इसी स्कूल में पढ़ी हैं।
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यहां से आए लोगों ने जाता की याद
लंदन से सुशील तिवाना, कनाडा से तरुणजोत कौर और सुषमा शर्मा आईं थीं। इनके अलावा पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के मीडिया सलाहकार सुनील पर्ती, रिटायर कर्नल राजीव के सिंह, डॉ. अरुण रावल, व्यवसायी अशोक बेरी, अजमेर से डॉ. मंजू माथुर, लॉयंस क्लब के प्रधान सुरेंद्र पाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे। अस्सी बैच की पठानकोट निवासी डॉ. मोनिका सलूजा सामान लेकर आते समय चोटिल हो गईं। वहीं लंदन निवासी विजयभूषण ठिंड आने को तैयार थे, लेकिन उन्हें कोविड हो गया। कुछ लोग अपनी पत्नियों को लेकर दोस्तों से मिलवाने लाए थे।
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बोले- कुछ साथी अब दुनिया में नहीं, लेकिन दिलों में हैं जिंदा
इस दौरान कुछ साथी जो नहीं रहे उन्हें भी याद किया गया। सुनील पर्ती ने बताया कि विंग कमांडर प्रदीप चावला, गुड़गांव निवासी हेमंत पुरी, पंजाब में अधिकारी रहे संजीव बावा, मुंबई निवासी जयराम मीरचंदानी, फाइटर प्लेन चालक रोनाल्ड सैमुअल और ओमकार सिंह अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन वह हमारे दिलों में आज भी जिंदा हैं।
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तरुणजोत कौर बोलीं- उनकी साइकिल को पंचर कर उल्टा करदेते लड़के
सुनील पर्ती ने बताया कि तरुणजोत कौर के पिता ज्ञानी भूपेंद्र सिंह गणित के शिक्षक थे। वह थोड़े सख्त भी थे। एक दिन उनका फोन आया तो घर में किसी ने उठाया और इनका नाम बताया। मैंने एकदम कहा कि ज्ञानी की बेटी का फोन है तो सभी ठहाके लगाने लगे। तरुणजोत कौर ने बताया कि यह सब उनकी साइकिल को पंचर कर उल्टा करदेते थे। इसके बाद सभी अपनी कक्षा में पहुंचे। डॉ. अरुण रावल ने बताया कि लड़के शरारत न करें इसलिए एक टेबल पर दो लड़कों के बीच एक लड़की को बैठाया जाता था। सुनील पर्ती ने बताया कि पहले कक्षा में रैकनुमा टेबल थीं। एक बार रैक से एक पर्ची निकली जिसमें एक लड़की ने लिखा था कि उसे सुखना लेक पर एक लड़का मिला जिससे प्यार हो गया। अगले दिन लेक पर जाकर हमने उसे पीट दिया। जैवलिन से कक्षा के कवर्ड तोड़ दिए और एक बार पंखे की पंखुड़ी टेढ़ी कर दीं। शिक्षक के पूछने पर भी किसी ने नाम नहीं बताया।

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मेम आप दिल में हो, इसलिए हम आज आपकी क्लास में हैं
जब सभी एलुमिनाई कक्षा में बैठ गए तो सुषमा शर्मा ने अपनी अंग्रेजी की शिक्षिका और क्लास टीचर ऊषा सहगल को याद कर एक कविता सुनाई। उन्होंने कहा कि ऊषा मेम आप हमारे दिल और दिमाग में बसी हैं। लंबे बाल और सादगी भरा जूड़ा आप पर जंचता था। आपके संस्कार हमारे अंदर हैं इसलिए हम आपकी क्लास में आज भी बैठे हैं। डॉ. मंजू माथुर ने बताया कि हमारे समय में 9 रुपये 60 पैसे फीस थी। एक पेड़ के नीचे बैठकर एक दूसरे का टिफिन खाते थे। सुनील पर्ती ने बताया कि 1971 के युद्ध के दौरान हमें बचाव का प्रशिक्षिण दिया जाता था। एक साइरन बजता था और हम सभी दौड़कर सुरंगों में छिपते थे। एक शिक्षिक से हम सभी परेशान थे, किसी ने उनके पेट्रोल टैंक में चीनी डाल दी।
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