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Chandigarh: स्मार्ट साइलेंट अलार्म सिस्टम ब्रिज टूटने से पहले करेगा आगाह, जम्मू कश्मीर के ग्रुप ने बनाया
Wed, 10 Dec 2025 11:32 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 10 Dec 2025 11:32 AM IST
सार
जम्मू के कार्तिक जिन्होंने यह प्रोजेक्ट बनाया, ने बताया कि भारत में ब्रिज, फ्लाईओवर और सरकारी ढांचे अब भी मैन्युअल इंस्पेक्शन और देर से जांच पर निर्भर हैं, जिससे अंदरूनी क्षति देर से पता चलती है और हादसों की आशंका बढ़ती है।
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कार्तिक अपने प्रोजेक्ट के साथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल के अंतर्गत सीएसआईओ में आयोजित हैकथॉन में एक अनोखा और बेहद उपयोगी नवाचार चर्चा में रहा।
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कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस सिस्टम विद ऑटोनॉमस स्ट्रक्चरल फ्रीक्वेंसी ड्रिफ्ट अलार्म। यह प्रोजेक्ट उन पुलों और सार्वजनिक ढांचों को समय रहते चेतावनी देने के लिए बनाया गया है, जिनकी छिपी हुई क्षति आंखों से नहीं दिखती लेकिन खतरा बढ़ाती रहती है।
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जम्मू के कार्तिक जिन्होंने यह प्रोजेक्ट बनाया, ने बताया कि भारत में ब्रिज, फ्लाईओवर और सरकारी ढांचे अब भी मैन्युअल इंस्पेक्शन और देर से जांच पर निर्भर हैं, जिससे अंदरूनी क्षति देर से पता चलती है और हादसों की आशंका बढ़ती है।
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जम्मू में अगस्त 2025 में नदी में अचानक आए पानी के उफान के दौरान पुल के क्षतिग्रस्त होने का मामला इसी कमजोरी का उदाहरण रहा। कार्तिक का कहना है कि यह कॉम्पैक्ट और ऑटोनॉमस सिस्टम भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा को मजबूत करेगा, दुर्घटनाओं को रोकेगा और भारी मेंटेनेंस लागत बचाएगा, यानी अब पुल समय रहते खुद बता पाएंगे कि वे बीमार है।
इस समस्या के समाधान के तौर पर कार्तिक ने एक एज-एफएफटी ( यह फास्ट फूरियर ट्रांसफॉर्म (FFT) से संबंधित है, जो एक शक्तिशाली एल्गोरिथम है जो सिग्नल को टाइम-डोमेन (समय क्षेत्र) से फ्रीक्वेंसी-डोमेन (आवृत्ति क्षेत्र) में बदलता है, जिससे इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को सिग्नल के घटकों (जैसे ऑडियो या कंपन) का विश्लेषण करने, शोर हटाने और डेटा को संपीड़ित करने में मदद मिलती है) आधारित स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया, जो इंस्पेक्शन को मैनुअल से बदलकर 24×7 रियल-टाइम मॉनिटरिंग में बदल देता है।
एमपीयू6050 माइक्रो सेंसर कंपन और मूवमेंट को कैप्चर करता है जबकि ईएसपी 32 माइक्रोकंट्रोलर पुल की नैचुरल फ्रीक्वेंसी में बदलाव का पता लगाता है। जैसे ही किसी स्ट्रक्चर में फ्रीक्वेंसी ड्रिफ्ट होती है यानी अंदरूनी नुकसान बढ़ता है सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देता है ताकि मरम्मत समय रहते हो सके।
प्रोजेक्ट की खासियतें
- कम लागत वाले सेंसर बड़े पैमाने पर ब्रिज और सरकारी ढांचों में लगाए जा सकते हैं।
- मॉड्यूलर डिजाइन शहर से राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग तक विस्तार योग्य है।
- क्लाउड व आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स)इंटीग्रेशन इसे भविष्य की एआई आधारित स्मार्ट सिटीज मॉनिटरिंग के लिए तैयार करता है।