अंतिम रिपोर्ट फाइल कर सीबीआई ने मांगी जांच जारी रखने की अनुमति, कोर्ट का सवाल- कहना क्या चाहते हैं
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चंडीगढ़ के सुखमनप्रीत सिंह उर्फ सिप्पी हत्याकांड में सीबीआई ने सोमवार को अंतिम रिपोर्ट दायर कर दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई को इस केस की संदिग्ध आरोपी कल्याणी सिंह के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला है, लेकिन उसे शक भी है कि सिप्पी की हत्या में इस युवती की कोई भूमिका जरूर है। इसलिए उसके आवेदन को स्वीकार करने के साथ उसे मामले की जांच आगे भी जारी रखने के निर्देश दिए जाएं।
इस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने सवाल खड़े किए हैं। विशेष अदालत का कहना है कि जांच एजेंसी के इस आवेदन को क्या माना जाए। एक तरफ तो जांच एजेंसी कह रही है कि यह उसकी अंतिम रिपोर्ट है और दूसरी तरफ यह भी मांग कर रही है कि उसे जांच जारी रखने के निर्देश भी दिए जाएं। फाइनल रिपोर्ट किसी भी केस की जांच के बाद दी जाती है। अदालत ने अपने आदेश में जांच एजेंसी के अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि एक तो वह तय करके बताएं कि यह क्या है। अदालत इसे अंतिम रिपोर्ट माने या स्टेटस रिपोर्ट। साथ ही इस नतीजे तक पहुंचने के लिए जो आधार तय किए गए हैं, उसके कागजात भी जमा कराए जाएं। उसके बाद ही कोई फैसला दिया जाएगा।
दरअसल, सीबीआई को कल्याणी सिंह पर शक तो है, लेकिन जांच एजेंसी उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटा पाई है। कल्याणी सिंह सिप्पी की जानकार थी। वहीं पीड़ित परिवार ने भी जांच एजेंसी के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सीबीआई ऐसा कैसे कर सकती है। उन्हें अभी तक इस पर विश्वास नहीं है। अदालत की कॉपी मिलने के बाद ही वह अपनी बात आगे रखेंगे।
बीते हफ्ते दो लोगों के पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने की मांगी थी मंजूरी
एक हफ्ते पहले ही सीबीआई ने एक याचिका दायर कर इस केस में दो युवकों सिमरनपाल सिंह संधू और कर्मपाल सिंह का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने की मंजूरी मांगी थी। अदालत ने स्वीकृति भी दे दी थी। दरअसल, किसी केस में अंतिम रिपोर्ट तभी दायर की जाती है, जब केस की जांच पूरी हो गई हो।
राष्ट्रीय स्तर का शूटर था सिप्पी, पांच साल पहले हुई थी हत्या
सिप्पी की हत्या पांच साल पहले 20 सितंबर 2015 को चंडीगढ़ के सेक्टर-27 के एक पार्क में हुई थी। अज्ञात लोगों ने उसे गोली मार दी थी। पोस्टमार्टम में उसके शरीर से चार गोलियां मिली थीं। सिप्पी राष्ट्रीय स्तर के शूटर होने के साथ वकील भी था। एक साल तक जांच के बावजूद चंडीगढ़ पुलिस इस मामले में कोई सुबूत नहीं जुटा पाई। हालांकि पुलिस के रडार में कई नामी लोग थे। बाद में इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दूसरी तरफ परिजन लगातार इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस को कठघरे में खड़ा कर गंभीर आरोप लगा रहे थे। परिजनों ने चंडीगढ़ में जगह-जगह प्रदर्शन करने अलावा प्रधानमंत्री आवास के पास भी प्रदर्शन किया। उसके बाद साल 2016 में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
सीबीआई ने जांच में पाया कि इस मामले में एक युवती की भूमिका है, लेकिन उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला। इस बारे में सीबीआई ने अखबार में विज्ञापन भी दिया, जिसमें लिखा था कि हत्या के समय सिप्पी के हत्यारे के साथ एक युवती भी थी। उक्त युवती को अवसर दिया जा रहा है कि यदि वह निर्दोष है तो वह उनसे संपर्क करे अन्यथा यह माना जाएगा कि वह भी अपराध में बराबर की भागीदार है। लेकिन इसका भी कोई असर नहीं हुआ। कुछ दिन बाद सीबीआई ने सुराग देने वाले को 5 लाख का इनाम देने की घोषणा की, फिर भी कामयाबी नहीं मिली।
सिप्पी की मां व परिजनों ने जज की बेटी पर लगाया था आरोप
सिप्पी की मां दीपिंदर कौर (63) ने इस मामले में एक जज की बेटी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि सिप्पी की हत्या में उसका अहम रोल है। परिजनों ने यह भी दावा किया था कि यूटी पुलिस ने घरों के बाहर लगे कैमरों की सीसीटीवी फुटेज एकत्र की थी। इनमें एक कैमरे में मंकी कैप पहने एक युवक को कार से जाते हुए देखा गया था, जबकि युवती को दूसरी कार में जाते हुए।
जरूर कुछ गड़बड़ है, सीबीआई ऐसा नहीं कर सकती : जिप्पी सिद्धू
सुखमनप्रीत सिंह सिद्धू उर्फ सिप्पी के छोटे भाई जिप्पी सिद्धू ने कहा कि कुछ दिन पहले ही सीबीआई ने इस मामले में सिमरनदीप और उसके दोस्त करमपाल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को कहा था। इसमें सीबीआई की विशेष अदालत ने आदेश भी जारी किया था। अब इतनी जल्दी सीबीआई इस केस में अंतिम रिपोर्ट कैसे फाइल कर सकती है। इस मामले में जरूर कुछ गड़बड़ है। इस संबंध में वह सीबीआई और वकील से बातचीत करके ही आगे कुछ बोल सकते हैं।