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राजनीति: पंजाब में एक हफ्ते नहीं होंगे सुखबीर बादल के कार्यक्रम, मोगा घटना के बाद शिअद का बड़ा फैसला
Fri, 03 Sep 2021 07:51 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 03 Sep 2021 07:51 PM IST
सार
मोगा घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। पंजाब में अब एक हफ्ते तक सुखबीर बादल कोई कार्यक्रम नहीं करेंगे। सुखबीर बादल ने मोगा घटना के पीछे आप और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया और कहा कि दोनों दल किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
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सुखबीर सिंह बादल।
- फोटो : एएनआई
विस्तार
मोगा घटना के बाद शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल के पंजाब में एक सप्ताह तक सभी कार्यक्रमों पर ब्रेक लग गया है। मोगा के बाद बिगड़े हालातों को देखते हुए अकाली दल के वरिष्ठ नेताओं ने यह फैसला किया है। इधर, चंडीगढ़ में सुखबीर सिंह बादल ने मोगा हिंसा के पीछे कांग्रेस और आप नेताओं का हाथ बताया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के कैप्टन केंद्र सरकार के साथ मिलकर पंजाब की शांति को भंग करना चाहते हैं और किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
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मोगा में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हत्या के प्रयास के आरोप सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जिसके विरोध में शुक्रवार को कई किसान संगठनों ने राज्य भर में बैठकें कर आंदोलन की रणनीति बनाई। किसान नेताओं ने घोषणा की है कि है जब तक मुकदमें वापस नहीं लिए जाएंगे तब तक पंजाब में शिअद नेताओं का विरोध जारी रहेगा। जिसके बाद शिअद नेताओं ने सुखबीर के गल पंजाब की मुहिम पर एक सप्ताह के लिए ब्रेक लगाने का फैसला किया है।
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मोगा घटना को लेकर चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में सुखबीर बादल ने कहा कि अकाली दल ने 100 दिवसीय 'गल पंजाब की' कार्यक्रम शुरू किया था, इस दौरान पंजाब में आम आदमी कई मूलभूत सुविधाओं से महरूम देखा। सरकार भी आमजन की समस्याओं को दूर करने के बजाय सियासत कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपील करते हुए कहा कि हम सबका निशाना केंद्र सरकार और उसके बनाए कृषि कानून हैं। पंजाब और किसानी की भलाई के लिए सभी सियासी दलों को एकजुट होकर लड़ाई करनी चाहिए।
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सुखबीर ने कहा कि शिअद ने मोगा हिंसा को भड़काने वाले कांग्रेस और आप कार्यकर्ताओं की सूची भी सार्वजनिक की लेकिन कांग्रेस किसान आंदोलन को बदनाम करने की नीयत से काम करने में जुटी हुई है। कैप्टन चाहते हैं कि पंजाब की शांति व्यवस्था भंग हो और केंद्र की मंशा के अनुरूप पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू हो और किसान आंदोलन समाप्त हो जाए। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वह इन सियासतदारों की नीयत को समझ कर ही फैसला लें।