राजकीय सम्मान के साथ आज होगा शहीद विक्रांत का अंतिम संस्कार, परिवार में किसी ने नहीं खाया खाना
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झज्जर जिले का गांव भदानी ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र गुरुवार को दिनभर अपने लाडले का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचने का इंतजार करता रहा। लेकिन दोपहर बाद स्थिति स्पष्ट हो पाई कि अब जवान सार्जेंट विक्रांत सहरावत का पार्थिव शरीर शुक्रवार की सुबह भदानी गांव पहुंचेगा। वहीं देर शाम सामान्य अस्पताल शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा।
जहां पर एसडीएम शिखा व सीटीएम अश्विनी कुमार पहले से ही मौजूद रहे। शहीद का पार्थिव शरीर सामान्य अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया है। सुबह करीब दस बजे राजकीय सम्मान के साथ शहीद विक्रांत का अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुबह से ही शहीद के परिजन जिला प्रशासन और वायु सेना के अधिकारियों से संपर्क साधते रहे। लेकिन पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पा रही थी।
दोपहर बाद हुई स्थिति स्पष्ट
दोपहर बाद करीब ढाई बजे वायु सेना के अधिकारियों ने शहीद विक्रांत के पिता कृष्ण कुमार को बताया कि शहीदों के पार्थिव शरीर गुरुवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे श्रीनगर से दिल्ली के लिए रवाना किए जाएंगे। शाम करीब साढ़े चार बजे दिल्ली पहुंचेंगे, उसके बाद शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इस प्रक्रिया में भी करीब दो घंटे का समय लगेगा।
उसके बाद गांव पहुंचने में भी समय लगेगा, जिसके चलते शव झज्जर में ही रहेगा। शुक्रवार की सुबह करीब आठ बजे सेना के जवान शहीद विक्रांत के पार्थिव शरीर को लेकर गांव भदानी लेकर पहुंचेंगे। सुबह करीब दस बजे राजकीय सम्मान के साथ शहीद विक्रांत को अंतिम विदाई दी जाएगी।
गांव में पसरा रहा सन्नाटा
बुधवार की शाम को जब विक्रांत की शहादत की जानकारी उनके परिजनों को मिली है। उसके बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव व आसपास लोग शहीद के घर के सामने ही बैठे नजर आए। जबकि बाकी गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। दिनभर गांव व क्षेत्र के लोग शहीद विक्रांत के परिजनों के साथ खड़े दिखे।
लोग पीड़ित परिवार के लोगों का ढाढ़स बंधाते रहे। हर व्यक्ति को यही कहना था विक्रांत ने भारत माता की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है। आज गांव व क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। वह अब उनका नहीं पूरे देश का बेटा है। आज पूरा भारतवर्ष अपने लाडले की शहादत पर गर्व कर रहा है।
परिवार में किसी ने नहीं खाया खाना
गांव, क्षेत्र व परिवार के लोगों को जहां अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। वहीं लाडले के परिवार से चले जाने का गम भी है। शहीद विक्रांत की शहादत के बारे में जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोगों ने खाना तक नहीं खाया है। गांव के लोग उन्हें समझा बुझाकर खाना खिलाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार के ही नहीं बल्कि उसके घर पहुंचे हर व्यक्ति की आंखें नम थी।