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चंडीगढ़ः किशोरी से रेप में नाबालिग को सुनाई 7 साल की कैद, ऐसे चलेगी सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 08 Feb 2018 05:06 PM IST
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rapist in jail
- फोटो : google
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चंडीगढ़ जिला अदालत ने एक किशोरी से दुराचार के मामले में नाबालिग को सात साल की सजा सुनाई है। मामला दिसंबर 2016 का है। पीड़िता के पिता की शिकायत पर सेक्टर-39 थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुराचार और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज कराया था। हालांकि अदालत में अपहरण का आरोप अदालत में साबित नहीं हो सका लेकिन अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट 4 के तहत दोषी पाया।
सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जुवेनाइल होम भेज दिया गया है। बालिग होने पर उसे आगे की सजा के लिए बुड़ैल जेल ट्रांसफर कर दिया जाएगा। 3 दिसंबर 2016 को सेक्टर-39 पुलिस थाने में पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 14 वर्षीय बेटी दोपहर में 3 बजे घर से सेक्टर-35 के एक स्कूल स्थित ग्राउंड में गेम्स की प्रैक्टिस के लिए गई थी। नौवीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी को वह खुद ग्राउंड पर छोड़कर आए थे।
देर शाम तक जब उनकी बेटी घर नहीं आई तो वह उसे तलाशने निकले लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। उसके साथ प्रैक्टिस करने वालों ने बताया कि वह शाम पांच बजे ग्राउंड से निकल गई थी। साथ ही यह भी पता चला कि उसे अंतिम बार सेक्टर-38 के गुरुद्वारे के पास देखा गया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जांच पड़ताल की तो अगले दिन पीड़िता को उसके पड़ोस में ही रहने वाले नाबालिग के घर से बरामद किया था।
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पीड़िता ने बताया था कि वह अपनी मर्जी से नाबालिग के साथ गई थी। हालांकि बाद में पीड़िता के बयान के आधार पर ही नाबालिग के खिलाफ दुराचार और पॉक्सो एक्ट 4 की धारा केस में जोड़ी थी। पहले केवल अपहरण की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को जुवेनाइल होम भेज दिया था। वहीं पीड़िता ने मेडिकल करवाने से इंकार कर दिया था।
शुरुआत में राजीव के साढ़े 16 वर्ष का होने के कारण उसके खिलाफ केस का ट्रायल जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चला था लेकिन वहां से केस को स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। ट्रायल के दौरान राजीव के खिलाफ अपहरण का आरोप तय नहीं हो सका, लेकिन अदालत ने उसे दुराचार में दोषी करार दिया।
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सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को जुवेनाइल होम भेज दिया गया है। बालिग होने पर उसे आगे की सजा के लिए बुड़ैल जेल ट्रांसफर कर दिया जाएगा। 3 दिसंबर 2016 को सेक्टर-39 पुलिस थाने में पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 14 वर्षीय बेटी दोपहर में 3 बजे घर से सेक्टर-35 के एक स्कूल स्थित ग्राउंड में गेम्स की प्रैक्टिस के लिए गई थी। नौवीं क्लास में पढ़ने वाली बेटी को वह खुद ग्राउंड पर छोड़कर आए थे।
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देर शाम तक जब उनकी बेटी घर नहीं आई तो वह उसे तलाशने निकले लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। उसके साथ प्रैक्टिस करने वालों ने बताया कि वह शाम पांच बजे ग्राउंड से निकल गई थी। साथ ही यह भी पता चला कि उसे अंतिम बार सेक्टर-38 के गुरुद्वारे के पास देखा गया था। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जांच पड़ताल की तो अगले दिन पीड़िता को उसके पड़ोस में ही रहने वाले नाबालिग के घर से बरामद किया था।
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पीड़िता ने बताया था कि वह अपनी मर्जी से नाबालिग के साथ गई थी। हालांकि बाद में पीड़िता के बयान के आधार पर ही नाबालिग के खिलाफ दुराचार और पॉक्सो एक्ट 4 की धारा केस में जोड़ी थी। पहले केवल अपहरण की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने नाबालिग को जुवेनाइल होम भेज दिया था। वहीं पीड़िता ने मेडिकल करवाने से इंकार कर दिया था।
शुरुआत में राजीव के साढ़े 16 वर्ष का होने के कारण उसके खिलाफ केस का ट्रायल जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चला था लेकिन वहां से केस को स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। ट्रायल के दौरान राजीव के खिलाफ अपहरण का आरोप तय नहीं हो सका, लेकिन अदालत ने उसे दुराचार में दोषी करार दिया।