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Haryana Politics: अंबाला में सहानुभूति और करनाल में भाजपा का जातिगत कार्ड; सिरसा में भाजपा ने बदला चेहरा
Thu, 14 Mar 2024 10:14 AM IST
शाहरुख खान
मोहित धुपड़, अमर उजाला, करनाल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, करनाल
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 14 Mar 2024 10:14 AM IST
सार
भाजपा ने दूसरी लिस्ट में अंबाला में सहानुभूति और करनाल में जातिगत कार्ड खेला है। बंतो के समक्ष पति रतनलाल कटारिया की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है। वहीं, मनोहर लाल चंडीगढ़ से दिल्ली वाया करनाल अब केंद्रीय राजनीति में जाने की तैयारी में है।
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Haryana Political
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने हरियाणा में छह सीटों पर प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। भिवानी, फरीदाबाद और गुरुग्राम में जहां तीनों मौजूदा सांसदों को ही चुनावी समर में उतारा गया है, वहीं सिरसा में भाजपा ने चेहरा बदला है। जीटी बेल्ट की कुल तीन सीटों में से करनाल और अंबाला के प्रत्याशी भी घोषित हो गए हैं।
अंबाला सीट पर भाजपा ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए पूर्व सांसद एवं केंद्र में जल शक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रहे रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो को टिकट दिया है। करनाल में भाजपा ने अपनी पुरानी रणनीति के तहत जातिगत कार्ड ही खेलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चुनावी रण में उतारा है।
ऐसा कर भाजपा ने मध्यप्रदेश वाला फार्मूला हरियाणा में भी अपनाया है। वहां भी शिवराज चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें विदिशा सीट से प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह भाजपा हाईकमान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी अब वाया करनाल दिल्ली ले जाकर उन्हें केंद्रीय राजनीति में सक्रिय करने की इच्छा रखता है।
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अंबाला सीट पर 1999 में रतनलाल कटारिया पहली बार भाजपा की टिकट पर सांसद बने थे। उसके बाद दो बार कुमारी सैलजा से शिकस्त खाने के बाद मोदी लहर में कटारिया वर्ष 2014 और 2019 में फिर सांसद बने। इस दौरान बंतो कटारिया भी रतनलाल के साथ उनके सियासी सफर में पूरी तरह सक्रिय रही।
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अंबाला सीट पर भाजपा ने सहानुभूति कार्ड खेलते हुए पूर्व सांसद एवं केंद्र में जल शक्ति मंत्रालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रहे रतनलाल कटारिया की पत्नी बंतो को टिकट दिया है। करनाल में भाजपा ने अपनी पुरानी रणनीति के तहत जातिगत कार्ड ही खेलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चुनावी रण में उतारा है।
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ऐसा कर भाजपा ने मध्यप्रदेश वाला फार्मूला हरियाणा में भी अपनाया है। वहां भी शिवराज चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें विदिशा सीट से प्रत्याशी बनाया है। इसी तरह भाजपा हाईकमान हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को भी अब वाया करनाल दिल्ली ले जाकर उन्हें केंद्रीय राजनीति में सक्रिय करने की इच्छा रखता है।
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अंबाला सीट पर 1999 में रतनलाल कटारिया पहली बार भाजपा की टिकट पर सांसद बने थे। उसके बाद दो बार कुमारी सैलजा से शिकस्त खाने के बाद मोदी लहर में कटारिया वर्ष 2014 और 2019 में फिर सांसद बने। इस दौरान बंतो कटारिया भी रतनलाल के साथ उनके सियासी सफर में पूरी तरह सक्रिय रही।
भाजपा ने बंतो को कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रखा और इस वक्त भी बंतो प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष और कुरुक्षेत्र की प्रभारी हैं। 18 मई 2023 को अचानक मौजूदा सांसद रतनलाल कटारिया के निधन के बाद अंबाला सीट खाली हो गई। इस सीट पर उपचुनाव की अटकलें चलती रहीं मगर उपचुनाव नहीं हो पाया।
इसी दौरान 29 जून को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अंबाला लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत यमुनानगर रैली में बंतो के सिर पर हाथ रखकर वहां मौजूद लोगों के समक्ष यह कह गए थे कि ‘यह बेटी अब आपके हवाले है।’ तभी से यह तस्वीर लगभग साफ हो गई थी कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अंबाला सीट से बंतो को ही मैदान में उतारकर सहानुभूति कार्ड खेल सकती है।
उधर करनाल सीट पर राजनीतिक परिदृश्य काफी हद तक जातिगत फेक्टर के इर्द-गिर्द घूमता है। करनाल क्षेत्र के अंतर्गत पानीपत जिला भी आता है। इस क्षेत्र में चुनाव के दौरान पंजाबी मतदाता निर्णायक माना जाता है।
वर्ष 2014 व 2019 में भाजपा ने इस सीट पर पंजाबी प्रत्याशी को ही लोकसभा का टिकट देकर उतारा था और जीत हासिल की थी। अब 2024 में इस सीट पर भाजपा ने अपनी पुरानी रणनीति के तहत ही एक बार फिर पंजाबी प्रत्याशी पर ही दांव खेला है। अब देखना यह है कि अंबाला और करनाल सीट पर भाजपा की रणनीति कितनी सटीक बैठती है।