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Chandigarh News: एसडीएम ईस्ट करेंगे जांच, दो सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
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चंडीगढ़। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में प्लॉट नंबर-28/9 स्थित इमारत गिरने की घटना के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपायुक्त (डीसी) निशांत कुमार यादव ने इस मामले की जांच के लिए एसडीएम (ईस्ट) पवित्तर सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें। प्रशासन यह पता लगाएगा कि भवन गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं भवन में बिना अनुमति निर्माण, संरचनात्मक बदलाव, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अन्य नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर, इस घटना के बाद प्रशासन ने पूरे इंडस्ट्रियल एरिया की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला लिया है। डीसी निशांत कुमार यादव ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के सभी औद्योगिक प्लॉटों का व्यापक निरीक्षण कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत मंगलवार से एस्टेट ऑफिस की टीमें विशेष अभियान चलाकर क्षेत्र की इमारतों का निरीक्षण करेंगी।
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निरीक्षण के दौरान अधिकारी भवनों में बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन, औद्योगिक प्लॉटों के दुरुपयोग (मिसयूज) और इमारतों की संरचनात्मक मजबूती (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) की जांच करेंगे। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं भवनों में अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिलें, अनधिकृत बदलाव या सुरक्षा मानकों के विपरीत कोई निर्माण कार्य तो नहीं किया गया है।
एस्टेट ऑफिस की टीमें प्रत्येक भवन का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगी। जिन इमारतों में सुरक्षा संबंधी खामियां या नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकना भी है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इंडस्ट्रियल एरिया में कई इमारतें वर्षों पुरानी हैं और समय-समय पर उनमें मरम्मत या बदलाव किए जाते रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि सभी भवनों की सुरक्षा की नियमित जांच हो, ताकि किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान की जा सके।
मंगलवार से विशेष निरीक्षण अभियान
-इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के सभी प्लॉटों की जांच।
-बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन की होगी पड़ताल।
-मिसयूज और अवैध निर्माण की होगी जांच।
-इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) का आकलन।
-खामियां मिलने पर एस्टेट ऑफिस तैयार करेगा विस्तृत रिपोर्ट और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे मामले की विस्तृत जांच कर दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें। प्रशासन यह पता लगाएगा कि भवन गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कहीं भवन में बिना अनुमति निर्माण, संरचनात्मक बदलाव, सुरक्षा मानकों की अनदेखी या अन्य नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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इधर, इस घटना के बाद प्रशासन ने पूरे इंडस्ट्रियल एरिया की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का फैसला लिया है। डीसी निशांत कुमार यादव ने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के सभी औद्योगिक प्लॉटों का व्यापक निरीक्षण कराने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके तहत मंगलवार से एस्टेट ऑफिस की टीमें विशेष अभियान चलाकर क्षेत्र की इमारतों का निरीक्षण करेंगी।
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निरीक्षण के दौरान अधिकारी भवनों में बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन, औद्योगिक प्लॉटों के दुरुपयोग (मिसयूज) और इमारतों की संरचनात्मक मजबूती (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) की जांच करेंगे। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि कहीं भवनों में अवैध निर्माण, अतिरिक्त मंजिलें, अनधिकृत बदलाव या सुरक्षा मानकों के विपरीत कोई निर्माण कार्य तो नहीं किया गया है।
एस्टेट ऑफिस की टीमें प्रत्येक भवन का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगी। जिन इमारतों में सुरक्षा संबंधी खामियां या नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकना भी है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इंडस्ट्रियल एरिया में कई इमारतें वर्षों पुरानी हैं और समय-समय पर उनमें मरम्मत या बदलाव किए जाते रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि सभी भवनों की सुरक्षा की नियमित जांच हो, ताकि किसी भी संभावित खतरे की समय रहते पहचान की जा सके।
मंगलवार से विशेष निरीक्षण अभियान
-इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और फेज-2 के सभी प्लॉटों की जांच।
-बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन की होगी पड़ताल।
-मिसयूज और अवैध निर्माण की होगी जांच।
-इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा (स्ट्रक्चरल सेफ्टी) का आकलन।
-खामियां मिलने पर एस्टेट ऑफिस तैयार करेगा विस्तृत रिपोर्ट और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।