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कोरोना के कारण अदालत बंद होने से आर्थिक संकट में मुंशी
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चंडीगढ़। कोरोना के कारण डेढ़ साल से जिला अदालत बंद है। केवल जरूरी मामलों पर सुनवाई हो रही है। अदालत के मुंशी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। उनके पास आय का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वह वकीलों पर निर्भर है। इस समय सुनवाई बंद होने के कारण वकीलों की आय भी नहीं हो रही है। ऐसे में उनके पास मुंशियों को देने के लिए भी कुछ नहीं है। कोरोना के कारण दो मुंशी अपनी जान गंवा चुके हैं। कुछ तो परेशान होकर अन्य काम ढूंढ रहे हैं ताकि अपने परिवार का खर्च चला सकें। 30 जून तक जिला अदालत की छुट्टियां है। मुंशी एक जुलाई को अदालतें खुलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि अदालत की कार्रवाई पहले की तरह शुरू हो जाए और उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।
आर्थिक मंदी से परेशान होकर किया था प्रदर्शन
पिछले साल भी मुंशियों ने अदालत में प्रवेश के लिए प्रदर्शन किया था। मुंशियों का कहना था कि उनके पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है। परिसर में प्रवेश ना होने के कारण वह पूरा दिन कच्ची पार्किंग में धूप और बारिश में खड़े रहते थे। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि वह कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करेंगे। इसके बाद उन्हें अदालत परिसर और वकीलों के चेंबर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी।
आर्थिक सहायता मुहैया करवाए सरकार
पहले माता जी का देहांत हो गया और उसके बाद मैं खुुद भी बीमार हो गया। पीजीआई में काफी दिन तक दाखिल रहा। इस दौरान काफी आर्थिक समस्या झेलनी पड़ी। हर महीने बिजली-पानी के बिल और घर के अन्य खर्च चलाने के लिए तनाव रहता है। सरकार को या तो आर्थिक सहायता करनी चाहिए या फिर बिलों में राहत देनी चाहिए।
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-गोल्डी, मुंशी, जिला अदालत
इस बार स्थिति काफी भयावह
सभी मुंशियों के सामने रोजी रोटी का संकट हैं। पिछली बार तो वकीलों ने थोड़ी बहुत मदद कर संकट से बचा लिया था। लेकिन इस बार स्थिति काफी भयावह है। सभी मुशियों की स्थिति खराब चल रही है। बीच में अदालत खुलने से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन उसके बाद फिर से सब बंद हो गया।
-बिल्लू, मुंशी, जिला अदालत
उधार लेकर काम चला रहे हैं मुंशी
बच्चों की पढ़ाई, एलआईसी की किश्त, घर का सामान यह सब खर्च कैसे चलेगा, यही सोचकर चिंता सता रही है। पिछले साल का कर्ज अभी तक नहीं उतरा है, ऐसे में दोबारा काम ठप हो गया है। सरकार को मदद करनी चाहिए। पिछली बार भी कहीं से कोई भी सहायता नहीं मिली थी। सभी मुंशी अपने जानने वालों से उधार लेकर काम चला रहे हैं।
-जीवाराज, मुंशी, जिला अदालत
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आर्थिक मंदी से परेशान होकर किया था प्रदर्शन
पिछले साल भी मुंशियों ने अदालत में प्रवेश के लिए प्रदर्शन किया था। मुंशियों का कहना था कि उनके पास आजीविका का कोई और साधन नहीं है। परिसर में प्रवेश ना होने के कारण वह पूरा दिन कच्ची पार्किंग में धूप और बारिश में खड़े रहते थे। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि वह कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन करेंगे। इसके बाद उन्हें अदालत परिसर और वकीलों के चेंबर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी।
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आर्थिक सहायता मुहैया करवाए सरकार
पहले माता जी का देहांत हो गया और उसके बाद मैं खुुद भी बीमार हो गया। पीजीआई में काफी दिन तक दाखिल रहा। इस दौरान काफी आर्थिक समस्या झेलनी पड़ी। हर महीने बिजली-पानी के बिल और घर के अन्य खर्च चलाने के लिए तनाव रहता है। सरकार को या तो आर्थिक सहायता करनी चाहिए या फिर बिलों में राहत देनी चाहिए।
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-गोल्डी, मुंशी, जिला अदालत
इस बार स्थिति काफी भयावह
सभी मुंशियों के सामने रोजी रोटी का संकट हैं। पिछली बार तो वकीलों ने थोड़ी बहुत मदद कर संकट से बचा लिया था। लेकिन इस बार स्थिति काफी भयावह है। सभी मुशियों की स्थिति खराब चल रही है। बीच में अदालत खुलने से थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन उसके बाद फिर से सब बंद हो गया।
-बिल्लू, मुंशी, जिला अदालत
उधार लेकर काम चला रहे हैं मुंशी
बच्चों की पढ़ाई, एलआईसी की किश्त, घर का सामान यह सब खर्च कैसे चलेगा, यही सोचकर चिंता सता रही है। पिछले साल का कर्ज अभी तक नहीं उतरा है, ऐसे में दोबारा काम ठप हो गया है। सरकार को मदद करनी चाहिए। पिछली बार भी कहीं से कोई भी सहायता नहीं मिली थी। सभी मुंशी अपने जानने वालों से उधार लेकर काम चला रहे हैं।
-जीवाराज, मुंशी, जिला अदालत