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वाल्वो में वायरिंग जलते ही जान पर आफत

Thu, 31 Oct 2013 12:52 AM IST
अमर उजाला, पंचकूला
अमर उजाला, पंचकूला Updated Thu, 31 Oct 2013 12:52 AM IST
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Scourge on the lives of Volvo wiring burning
वाल्वो बस का सफर जितना आरामदायक है, उतना ही खतरनाक भी...। इस बस में प्रवेश और निकासी के लिए एक ही गेट होता है और एसी व बैट्री बस के पिछले हिस्से में लगाए जाते हैं।
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यदि स्पार्किंग या आग से वायरिंग जल गई तो एकमात्र गेट भी खोलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, अधिकारी का दावा है कि किसी भी आकस्मिक परिस्थितियों में इमरजेंसी गेट खोला जा सकता है।
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लेकिन, हकीकत यह है कि यह इमरजेंसी गेट नहीं, बल्कि खिड़कियों के शीशे हैं। इसे हथौड़े से ही तोड़ा जा सकता है। आंध्र प्रदेश में वोल्वो बस में आग लगने की घटना होने के बाद भी यदि हरियाणा रोडवेज ने सुरक्षा मानकों को और बेहतर नहीं किया तो यहां भी हादसा हो सकता है।
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वायरिंग जलने आटोमेटिक डोर खोलना भी मुश्किल
वोल्वो बसों में अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के लिए एयरकंडीशन और बड़ी बैटरी का होना अनिवार्य है। तकनीकी विशेषज्ञ टी. सिंह भी मानते हैं कि इन बसों में एंट्री-एग्जिट के लिए एक ही गेट है।

अगर किसी बस में आग लगती है तो सबसे पहले वायरिंग जलते हैं और कई बार बैट्री व एसी में भी धमाका होने की आशंका होती है। आपातकालीन स्थिति में ऐसे में स्पार्किंग का भी खतरा बढ़ जाता है।

 वायरिंग जलने के बाद निकासी गेट भी नहीं खोला जा सकता है। इससे यात्रियों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। हालांकि, हादसे के वक्त, बस के ऊपरी हिस्से से निकलने के लिए एक वेंट होल भी होता है।


चंडीगढ़ से रोजाना 22 वोल्वो
चंडीगढ़ से रोजाना गुड़गांव, दिल्ली, रोहतक, रेवाड़ी सहित अन्य जिलों के लिए 22 वोल्वो बसें चलती हैं। इनमें रोजाना सैकड़ों की संख्या में यात्री सफर करते हैं।

वोल्वो बसों में कमियां
-एक ही एंट्री और एग्जिट गेट
-पिछले हिस्से में बैट्री और एसी का होना, जो स्पार्किंग के बाद बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।

-इमरजेंसी गेट की जगह एक सीट के पास शीशे को दो खिड़कियां होती हैं।

- वेंट होल से काफी मशक्कत के बाद एक बार में एक ही यात्री निकल सकता है। इसे वेंटिलेशन के लिए बनाया गया है, जो एसी बंद होने पर खोल दिया जाता है।


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