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दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के फर्ज से नहीं भाग सकते स्कूल व सरकार : हाईकोर्ट

Wed, 19 Jun 2024 07:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2024 07:00 AM IST
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Schools and government cannot run away from the duty of educating disabled children: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दिव्यांग बच्चे को उसकी मानसिक अवस्था के चलते शिक्षा के अधिकार से वंचित करने के मामले में आदेश के बावजूद नीति बनाकर अमलीजामा पहनाने में नाकाम रहने पर हरियाणा सरकार व यूटी प्रशासन को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगली सुनवाई पर इस बारे में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो दोनों पर मोटा जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ यह भी स्पष्ट कर दिया कि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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याचिका दाखिल कर बच्चे की मां ने बताया कि उसका 13 साल का बेटा डाउन सिंड्रोम का शिकार है। वह पंचकूला के एक निजी स्कूल की स्पेशल विंग में पिछले 5 साल से पढ़ाई कर रहा था। दिव्यांग होने के बावजूद उसने स्पेशल ओलंपिक में रोलिंग स्केटिंग व स्विमिंग में राज्य व राष्ट्र स्तर पर मेडल जीते हैं। उसके बेटे के लिए व्यक्तिगत शिक्षण कार्यक्रम की उसने मांग की थी। इसके बाद लगातार याची के बेटे के अचानक उग्र होने की शिकायत स्कूल याची को भेजने लगा। कुछ समय बाद स्कूल ने बाकी के बच्चों की सुरक्षा की दलील देते हुए याची को कहा कि वह बच्चे को स्कूल से निकाल लें। इसके बाद जब याची ने शिकायत दी तो अधिकारियों की कमेटियों ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस रिपोर्ट में बच्चे को जल्द गुस्सा आने की बात कही गई।
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हाईकोर्ट ने स्कूल व सरकार की दलीलें सुनने के बाद 2022 में अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा का मौलिक अधिकार होता है। स्कूल का कार्य बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाना है और राज्य का काम इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाना। इस कार्य में चाहे कितनी भी मुश्किलें हों न तो स्कूल और न ही सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते हैं। अदालत ने कहा कि पहले दिव्यांग छात्रों को आगे बढ़ने में समस्या आती थी, लेकिन आज दौर बदल गया है। कानून भी मौजूद है जो इनके अधिकारों की रक्षा करें। न्यायालय ने अफसोस जताते हुए कहा कि सब कुछ मौजूद होने के बावजूद इसका पूरा लाभ दिव्यांग बच्चों को नहींं मिल पाता, क्योंकि जिन्हें इनका पालन करने की जिम्मेदारी दी गई है, उनमेंं संवेदनीकरण की कमी है। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में स्कूल ने बच्चे को दोषी बताते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया। इस प्रयास में राज्य सरकार के अधिकारियों ने जांच के दौरान अफसरशाहों वाला रवैया अपनाया और स्कूल का समर्थन किया। कोर्ट ने कहा था कि स्कूल व राज्य के कार्य की कड़ी निंदा जरूरी है। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, उनका समाधान निकाल कर राज्य व स्कूल को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी, जबकि ऐसा नहीं किया गया। बच्चे की पढ़ाई तीन साल के लिए प्रभावित हुई है। ऐसे में दंड के रूप में जब तक बच्चा स्कूल में पढ़ेगा, उसका खर्च स्कूल को उठाना होगा। साथ ही हाईकोर्ट ने बच्चे का स्कूल में दाखिला करने का आदेश दिया था। विस्तृत आदेश में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए नीतिगत निर्णय पर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। तब से यह मामला आदेश के पालन के लिए विचाराधीन है।
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