नौनिहालों को सता रही गरमी: तेज धूप और गर्म हवाओं का बच्चों पर पड़ रहा असर, डॉक्टरों की सलाह-बीट द हीट का फॉर्मूला अपनाएं
जीएमएसएच-16 के बालरोग विभाग की प्रमुख डॉ. सद्भावना का कहना है कि गर्मी के कारण बच्चे जल्दी डिहाइड्रेट हो जाते हैं। इस कारण उन्हें चक्कर आ सकता है। गर्मी के मौसम में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने के लिए कहें ताकि बच्चे दिनभर एक्टिव रहें।
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चंडीगढ़ में बढ़ती गर्मी के साथ ही अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गर्मी का शिकार होकर सबसे ज्यादा बच्चे ही अस्पताल पहुंच रहे हैं। खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों को डिहाइड्रेशन, पेट दर्द, सर्दी जुकाम और गले में संक्रमण की समस्या तेजी से हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल जाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि ठीक दोपहर में वे स्कूल से घर लौट रहे हैं। ऐसे में तेज धूप और गर्म हवाओं के संपर्क में आने से उनकी सेहत प्रभावित हो रही है। इससे बचने के लिए बीट द हीट का फॉर्मूला अपनाएं।
जीएमएसएच-16 के बालरोग विभाग की प्रमुख डॉ. सद्भावना का कहना है कि गर्मी के कारण बच्चे जल्दी डिहाइड्रेट हो जाते हैं। इस कारण उन्हें चक्कर आ सकता है। गर्मी के मौसम में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने के लिए कहें ताकि बच्चे दिनभर एक्टिव रहें। पानी का ज्यादा सेवन लू के प्रभाव को भी कम करता है। यदि बच्चा ज्यादा पानी नहीं पीता तो प्रयास करें कि वो रोजाना 2 से 3 लीटर पानी जरूर पानी पिए। इसके अलावा उन्हें नारियल पानी, नींबू पानी, बेल या खस का शरबत भी दे सकते हैं वहीं, बच्चों को हल्के और पतले कपड़े पहनाएं। इसमें हल्के रंग के कॉटन के कपड़ों को प्रधानता दें क्योंकि कॉटन पसीने को बेहतर तरीके से सोखता है।
हल्के रंग के कॉटन के कपड़ों में गर्मी कम लगती है और बॉडी को ठंडा रहने में मदद भी मिलती है। इसके साथ ही ये स्किन रैशेज और खुजली को भी रोकते हैं। इंटरनल मेडिसिन के डॉ. विकास भूटानी का कहना है कि दोपहर के समय बच्चों की बाहरी गतिविधियों को सीमित करने का प्रयास करें। गर्मी के मौसम में सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। शाम 5 बजे के बाद मौसम थोड़ा बेहतर हो जाता है और लू से जुड़ा जोखिम भी कम होता है। बाहर जाने के लिए इस समय का चुनाव करें।
लाडले के टिफिन को बनाए सेहत से भरपूर
जीएमएसएच-16 की आहार विशेषज्ञ मनीषा अरोड़ा का कहना है कि सब्जियों के पराठे बनाएं जैसे-गाजर, गोभी, चुकंदर, शलजम, पालक, मेथी, बथुआ, लौकी, मूली आदि। इससे सब्जियों के पोषक तत्व बच्चों को आसानी से मिलेंगे। वैसे भी रंग-बिरंगा खाना बच्चों को ज्यादा आकर्षित करता है और वे इससे परहेज भी नहीं करते। इस बात का ध्यान रखें कि पराठे का आटा मल्टीग्रेन हो और आटा ज्यादा बारीक पिसा न हो।
टिफिन का आकर्षक होना बेहद जरूरी
आहार विशेषज्ञ सोनिया गांधी ने बताया कि टिफिन में बच्चों को थोड़ा सलाद भी रखें जिससे उन्हें सलाद खाने की आदत हो और उनका पाचन भी ठीक रहे। यदि बच्चा पनीर नहीं खाता है तो पनीर का पराठा भी दिया जा सकता है जिससे शरीर में प्रोटीन व कैल्शियम की पूर्ति होती है। अंकुरित अनाज का चीला और उसके साथ टमाटर की खट्टी-मीठी चटनी भी बच्चे बहुत पसंद करते हैं। यदि बच्चा दूध नहीं पीता तो उसके रोटी या पराठे का आटा दूध से ही गूंथें। सोनिया के अनुसार बच्चे के विकास के लिए उनके आहार में हाई एंटीऑक्सीडेंट फूड जैसे हल्दी, टमाटर, नीबू, अदरक, तुलसी, बादाम, आंवला, खसखस का उपयोग प्रतिदिन करना चाहिए।
गर्मी के दौरान खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों के खानपान और रहन सहन पर विशेष ध्यान दें। कोशिश करें कि उन्हें तली-भूनी चीजें देने के बजाय तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में दी जाए जिससे उन्हें डिहाइड्रेशन न हो। - डॉ. सदभावना, प्रमुख जीएमएसएच-16 बालरोग विभाग