Haryana: मोरनी में पौधरोपण के नाम पर चार करोड़ का घोटाला! 90 हजार पौधों में से 47 फीसदी ही मिले जीवित
सवा सौ हेक्टेयर क्षेत्र की जांच में 90 हजार पौधों में से 47 फीसदी ही जीवित मिले। जिससे जांच टीमों को संदेह हुआ कि पूरे निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण हुआ ही नहीं है। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने संभावना जताई है कि सत्यापन कार्य रुकवाकर घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
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हरियाणा के मोरनी वन मंडल में आरडीएफ यानि रिहेबलिटेशन ऑफ डीग्रेडेड फॉरेस्ट योजना के तहत पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। 750 हेक्टेयर में साढ़े आठ लाख पौधे न लगाने का संदेह है। यह गड़बड़ी वन विभाग के जांच एचं मूल्यांकन परिमंडल करनाल की टीमों ने अपने शुरूआती निरीक्षण में पकड़ी है।
मामला मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण तक पहुंच चुका है। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल के मुख्य वन संरक्षक ने इन सभी को पत्र लिखकर पूरे घोटाले की विजिलेंस जांच की मांग की है। साथ ही कहा है कि विजिलेंस से जांच नहीं कराना चाहते तो सेवानिवृत्त न्यायाधीश या आईएएस की अध्यक्षता में समीति गठित कर जांच कराई जाए जिससे कि दूध का दूध, पानी का पानी हो।
जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल की टीमों ने बीते जुलाई महीने में 750 हेक्टेयर का निरीक्षण शुरू किया था। पौधरोपण की जांच शुरू होते ही वन विभाग के मुख्यालय में हड़कंप मच गया और दस दिन के भीतर ही जांच एवं मूल्यांकन टीमों का भौतिक सत्यापन बंद करा दिया।
सवा सौ हेक्टेयर क्षेत्र की जांच में 90 हजार पौधों में से 47 फीसदी ही जीवित मिले। जिससे जांच टीमों को संदेह हुआ कि पूरे निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण हुआ ही नहीं है। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने संभावना जताई है कि सत्यापन कार्य रुकवाकर घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार वन विभाग अपने स्तर पर मोरनी रेंज के उन्हीं अधिकारियों से पौधरोपण की जांच करा रहा है, जिन पर घोटाले का आरोप है। पौधरोपण के लिए कुल बजट आठ करोड़ रुपये का था।
भिवानी, हिसार, गुरुग्राम, रोहतक में थी जरूरत
आरडीएफ के तहत पौधरोपण की जरूरत भिवानी, हिसार, गुरुग्राम और रोहतक वन रेंज में थी, चूंकि इन क्षेत्रों में पेड़-पौधे काफी कम हैं। योजना के तहत पूरे प्रदेश में कुल 1300 हेक्टेयर में पौधरोपण होना था, जिसमें से अकेले मोरनी मंडल को ही 750 हेक्टेयर क्षेत्र आवंटित कर दिया गया। मोरनी में इस पौधरोपण की जरूरत नहीं थी, यहां पहले से ही घना जंगल है। ये पौधरोपण उस जमीन पर होना था, जो बंजर है।
पीसीसीएफ से मांगा जवाब : गर्ग
वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग ने कहा कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक से पूरे मामले में जवाब मांगा गया है। उनका जवाब आने के बाद सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर अगला कदम उठाया जाएगा।
बैठक में हूं, बाद में बात करुंगा : जगदीश
हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक जगदीश चंद्र ने कहा कि अभी बैठक में हूं, बाद में इस बारे में बात करुंगा।