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चंडीगढ़ दमकल विभाग में घोटाला: निगम अधिकारियों को पहले से थी जानकारी... 36 माह तक दबाए रहे मामला
Mon, 10 Mar 2025 10:35 AM IST
निवेदिता वर्मा
संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़
संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 10 Mar 2025 10:35 AM IST
सार
चंडीगढ़ दमकल विभाग में 273 पदों पर फायरमैन की भर्ती हुई थी। फायरमैन की लिखित परीक्षा करवाई गई थी। इसमें धांधली हुई थी।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : फाइल
विस्तार
चंडीगढ़ फायर विभाग में हुए घोटाले की जानकारी नगर निगम को पहले से थी। अधिकारी शिकायत के बाद भी करीब 36 महीने से ज्यादा समय से मामले को दबाए हुए है।
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दरअसल, आरोप लगा था कि नगर निगम में नौकरी के नाम पर 8 से 15 लाख रुपये लिए गए है। उसके आधार पर तात्कालिक नगर आयुक्त अंनदिता मित्रा को 21 जनवरी 2021 में ही पत्र लिखा गया था। एक कॉपी गर्वनर और एडवाइजर (चीफ वीजिलेंस कमिशनर) को भेजी गई थी। उस समय नगर निगम की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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उस शिकायत के आधार पर राजभवन ने नगर निगम को मामले की जांच का आदेश दिया। लेकिन उस आदेश को भी ठंडे बस्ते में रख दिया गया। अब एक बार फिर जब मामला खुला है तब भी नगर निगम के अधिकारी मामले से अंजान बने हुए हैं।
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हैरानी इस बात की है कि परीक्षा के बाद लिखित शिकायत दी गई थी। लेकिन नगर निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पुलिस ने फर्जी तरीके से फिजिकल टेस्ट दे रहे 4 आरोपियों समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की। अब जब पुलिस ने लिखित परीक्षा में फर्जीवाडे़ में तीन आरोपियों को पकड़ा तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
शिकायत में लिखा, नगर निगम के कर्मचारी भी भर्ती में शामिल
गांव मलोया निवासी प्यारे लाल अहूजा ने 19 जनवरी 2022 को चंडीगढ़ के तत्कालीन प्रशासक, एडवाइजर-कम-चीफ विजिलेंस ऑफिसर और नगर निगम की तत्कालीन आयुक्त आनिंदिता मित्रा को लिखित में शिकायत दी थी। उन्होंने लिखा था कि नगर निगम में क्लर्क, सब इंस्पेक्टर (इन्फोर्समेंट), फायरमैन, ड्राइवर और अन्य पोस्टों के लिए हुई परीक्षा में धांधली हुई है। एक नौकरी के लिए 8 लाख से 15 लाख रुपये लिए गए। इसमें नगर निगम के ही कुछ कर्मचारी शामिल हैं।प्यारे लाल अहूजा ने अपनी शिकायत में उन कर्मचारियों के नाम और पद भी लिखे थे और यह भी बताया था कि वह कहां तैनात हैं। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा था कि हाल ही में क्राइम ब्रांच ने परीक्षा पास कराने वाले एक गिरोह को पकड़ा था, उसके मुख्य आरोपी ने भी माना कि उसने निगम की तरफ से कराई गई भर्तियों में 8 लोगों को परीक्षा पास कराई है। उन्होंने एक उम्मीदवार का नाम भी बताया था लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी मामले की जांच हुई या नहीं, किसी को भी जानकारी नहीं है।