{"_id":"41bb4a7b3a8db0d0b31827326daa29a4","slug":"scam-chandigarh-chandigarh-administration","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ में उजागर हुआ एक बड़ा घोटाला, पढ़िए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ में उजागर हुआ एक बड़ा घोटाला, पढ़िए
मयंक मिश्रा/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 05 Apr 2014 09:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दक्षिणी सेक्टरों में बनी कोऑपरेटिव सोसाइटियों के फ्लैटों के ट्रांसफर से चंडीगढ़ प्रशासन को पिछले पांच साल में हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की जांच अब विजिलेंस ने शुरू कर दी है।
कुछ कोऑपरेटिव सोसाइटियों के सदस्यों की ओर से सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) को भेजी गई शिकायत के बाद यह जांच शुरू की गई है।
चंडीगढ़ प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर आए कुछ अधिकारियों ने कुछ लोगों को राहत देने के लिए प्रशासन को करोड़ों का चूना लगा दिया।
शिकायत में आरोप है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव से पहले सभी नियमों, बायलॉज और कानून को ताक पर रख कर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैटों का जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी (जीपीए) के जरिये ट्रांसफर करने की फीस को बेहद कम कर दिया।
विज्ञापन
कुछ कोऑपरेटिव सोसाइटियों के सदस्यों की ओर से सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) को भेजी गई शिकायत के बाद यह जांच शुरू की गई है।
चंडीगढ़ प्रशासन में प्रतिनियुक्ति पर आए कुछ अधिकारियों ने कुछ लोगों को राहत देने के लिए प्रशासन को करोड़ों का चूना लगा दिया।
शिकायत में आरोप है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव से पहले सभी नियमों, बायलॉज और कानून को ताक पर रख कर कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैटों का जनरल पॉवर ऑफ अटार्नी (जीपीए) के जरिये ट्रांसफर करने की फीस को बेहद कम कर दिया।
विज्ञापन
कुछ इस तरह खेला गया खेल
वित्त विभाग ने फ्लैटों की ट्रांसफर फीस फ्लैट की कैटेगरी के अनुसार 3.80 लाख से 5.25 लाख के बीच निकाली थी। इसे जमीन की मौजूदा मार्केट वैल्यू के अनअर्न्ड बढ़ोतरी के एक तिहाई हिस्से के अनुसार तय किया गया था।
लेकिन, 2 मार्च, 2009 को तत्कालीन गृह और सहकारिता सचिव राम निवास ने जो आदेश जारी किए उसमें स्पष्ट किया गया कि ए कैटेगरी की ट्रांसफर फीस 50 हजार, बी कैटेगरी की 25 हजार और सी कैटेगरी की 15 हजार रुपये होगी।
शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि यह बेहद कम ट्रांसफर फीस सिर्फ इसलिए तय कर दी गई क्योंकि कुछ अफसरशाहों के फ्लैट इन सोसाइटियों में थे और वह इन्हें जीपीए के जरिये ट्रांसफर करना चाहते थे। इस आदेश के बाद सभी ने फ्लैट ट्रांसफर करा लिए।
ऐसे में प्रशासन को एक फ्लैट के ट्रांसफर पर 3.50 से 4.75 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। चंडीगढ़ में 112 कोऑपरेटिव सोसाइटियां हैं जिनमें 15 हजार के करीब फ्लैट हैं। इनमें से सिर्फ 36 सोसाइटियां फ्री होल्ड जमीन पर हैं।
लेकिन, 2 मार्च, 2009 को तत्कालीन गृह और सहकारिता सचिव राम निवास ने जो आदेश जारी किए उसमें स्पष्ट किया गया कि ए कैटेगरी की ट्रांसफर फीस 50 हजार, बी कैटेगरी की 25 हजार और सी कैटेगरी की 15 हजार रुपये होगी।
शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि यह बेहद कम ट्रांसफर फीस सिर्फ इसलिए तय कर दी गई क्योंकि कुछ अफसरशाहों के फ्लैट इन सोसाइटियों में थे और वह इन्हें जीपीए के जरिये ट्रांसफर करना चाहते थे। इस आदेश के बाद सभी ने फ्लैट ट्रांसफर करा लिए।
ऐसे में प्रशासन को एक फ्लैट के ट्रांसफर पर 3.50 से 4.75 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है। चंडीगढ़ में 112 कोऑपरेटिव सोसाइटियां हैं जिनमें 15 हजार के करीब फ्लैट हैं। इनमें से सिर्फ 36 सोसाइटियां फ्री होल्ड जमीन पर हैं।
गलत तरीकों से फ्लैट ट्रांसफर के आरोप
प्रशासन के इस फैसले के बाद विभिन्न कोऑपरेटिव सोसाइटियों के 60 फीसदी फ्लैट जीपीए पर ट्रांसफर हो गए।
आरोप है कि यह फ्लैट न सिर्फ जाली और गलत दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर कर दिए गए बल्कि बिना रजिस्टर्ड कन्वेयंस डीड के ट्रांसफर किए गए जो कि प्रापर्टी के ट्रांसफर के लिए अनिवार्य है।
कोऑपरेटिव सोसाइटियों के फ्लैट्स के लिए निर्धारित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और सोसाइटीज के फ्लैट्स और शेयर ट्रांसफर डायरेक्ट खरीद फरोख्त के आधार पर सोसाइटियां अपने आप करती रहीं।
आरोप है कि यह फ्लैट न सिर्फ जाली और गलत दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर कर दिए गए बल्कि बिना रजिस्टर्ड कन्वेयंस डीड के ट्रांसफर किए गए जो कि प्रापर्टी के ट्रांसफर के लिए अनिवार्य है।
कोऑपरेटिव सोसाइटियों के फ्लैट्स के लिए निर्धारित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और सोसाइटीज के फ्लैट्स और शेयर ट्रांसफर डायरेक्ट खरीद फरोख्त के आधार पर सोसाइटियां अपने आप करती रहीं।
एक नेता और गृह सचिव राम निवास पर आरोप
सेंट्रल विजिलेंस कमीशन को भेजी शिकायत में कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटियों के सदस्यों ने स्पष्ट किया है। 2 मार्च, 2009 को लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के साथ ही चुनाव आचार संहिता लग गई थी।
लेकिन शहर से चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार के कहने पर प्रशासन के तत्कालीन गृह सचिव राम निवास ने चुनाव आचार संहिता के लागू होने के बाद भी जीपीए पर हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैटों की ट्रांसफर की फीस को कम कर दिया। राम निवास ने यह आदेश सहकारिता सचिव के तौर पर जारी किए।
हैरानी की बात यह है कि यही आदेश उसी दिन वित्त विभाग ने भी जारी कर दिए। शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इससे पहले तत्कालीन वित्त सचिव संजय कुमार ने फ्लैटों के ट्रांसफर संबंधी आदेश 15 अगस्त, 2008 को जारी किए थे। राष्ट्रीय अवकाश के दिन इस तरह के आदेश जारी होने पर भी सवालिया निशान लगते हैं।
लेकिन शहर से चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार के कहने पर प्रशासन के तत्कालीन गृह सचिव राम निवास ने चुनाव आचार संहिता के लागू होने के बाद भी जीपीए पर हाउसिंग सोसाइटियों के फ्लैटों की ट्रांसफर की फीस को कम कर दिया। राम निवास ने यह आदेश सहकारिता सचिव के तौर पर जारी किए।
हैरानी की बात यह है कि यही आदेश उसी दिन वित्त विभाग ने भी जारी कर दिए। शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इससे पहले तत्कालीन वित्त सचिव संजय कुमार ने फ्लैटों के ट्रांसफर संबंधी आदेश 15 अगस्त, 2008 को जारी किए थे। राष्ट्रीय अवकाश के दिन इस तरह के आदेश जारी होने पर भी सवालिया निशान लगते हैं।
गड़बड़ी का पता चलते ही लगाई रोक
चंडीगढ़ के उपायुक्त और कोऑपरेटिव सोसाइटीज के रजिस्ट्रार मोहम्मद शाईन को जब इस गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने चार महीने पहले हाउसिंग सोसाइटीज के फ्लैटों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।
उन्होंने यह आदेश जारी कर दिए कि यह फ्लैट्स लीज होल्ड से फ्री होल्ड होने के बाद ही ट्रांसफर किए जा सकेंगे। फ्लैटों के ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्री भी अनिवार्य कर दी। इस आदेश के बाद फ्लैट ट्रांसफर कराने के लिए दस गुना ज्यादा फीस देनी पड़ेगी।
ए कैटेगरी फ्लैट की ट्रांसफर फीस लगभग 4.45 लाख रुपये हो गई है जबकि बी कैटेगरी फ्लैट की ट्रांसफर फीस 3.22 हो गई है। इसी तरह से सी कैटेगरी फ्लैट की फीस 2.22 लाख रुपये के करीब हो गई है।
इसके साथ कनवेंस डीड के लिए भी लगभग एक लाख रुपये अलग से देने होंगे। चंडीगढ़ में रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी 5 फीसदी है।
उन्होंने यह आदेश जारी कर दिए कि यह फ्लैट्स लीज होल्ड से फ्री होल्ड होने के बाद ही ट्रांसफर किए जा सकेंगे। फ्लैटों के ट्रांसफर के लिए रजिस्ट्री भी अनिवार्य कर दी। इस आदेश के बाद फ्लैट ट्रांसफर कराने के लिए दस गुना ज्यादा फीस देनी पड़ेगी।
ए कैटेगरी फ्लैट की ट्रांसफर फीस लगभग 4.45 लाख रुपये हो गई है जबकि बी कैटेगरी फ्लैट की ट्रांसफर फीस 3.22 हो गई है। इसी तरह से सी कैटेगरी फ्लैट की फीस 2.22 लाख रुपये के करीब हो गई है।
इसके साथ कनवेंस डीड के लिए भी लगभग एक लाख रुपये अलग से देने होंगे। चंडीगढ़ में रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी 5 फीसदी है।