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जिंदल यूनिवर्सिटी गैंग रेप मामला, तीनों दोषियों को करना होगा समर्पण
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 07 Nov 2017 02:11 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
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सुप्रीम कोर्ट ने ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में दोषी तीन छात्रों की सजा को निलंबित करने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सोमवार को रोक लगा दी। अब इन तीनों छात्रों को समर्पण करना होगा।
न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने पीड़ित पक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए तीनों दोषी छात्रों को नोटिस जारी किया है। इससे पहले पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने पीठ के समक्ष कहा कि मामला गैंगरेप का है और हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा को निलंबित कर दिया है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की गुहार की थी।
मालूम हो कि इस मामले में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी हार्दिक और उसके दोस्त करण को 20-20 वर्ष कैद जबकि तीसरे आरोपी को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। तीन दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तीनों ने अपील लंबित होने की वजह से जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी इस गुहार को स्वीकार करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि हाईकोर्ट ने तीनों को देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा तीनों को मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराने के लिए भी कहा था। तीनों के अभिभावकों को छह महीने में इस संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने तीनों की सजा निलंबित करते हुए कहा था कि वह पीड़िता की चिंता, समाज की मांग, कानून और सुधारात्मक व पुनर्वास न्याय के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पीड़िता के बयानों पर गहन विचार करने पर ऐसा लगता है ये विकृत विचार हैं।
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न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने पीड़ित पक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए तीनों दोषी छात्रों को नोटिस जारी किया है। इससे पहले पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस ने पीठ के समक्ष कहा कि मामला गैंगरेप का है और हाईकोर्ट ने दोषियों की सजा को निलंबित कर दिया है। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की गुहार की थी।
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मालूम हो कि इस मामले में निचली अदालत ने मुख्य आरोपी हार्दिक और उसके दोस्त करण को 20-20 वर्ष कैद जबकि तीसरे आरोपी को सात वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। तीन दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। तीनों ने अपील लंबित होने की वजह से जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी इस गुहार को स्वीकार करते हुए उनकी सजा निलंबित कर दी। हालांकि हाईकोर्ट ने तीनों को देश से बाहर जाने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा तीनों को मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग कराने के लिए भी कहा था। तीनों के अभिभावकों को छह महीने में इस संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने तीनों की सजा निलंबित करते हुए कहा था कि वह पीड़िता की चिंता, समाज की मांग, कानून और सुधारात्मक व पुनर्वास न्याय के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पीड़िता के बयानों पर गहन विचार करने पर ऐसा लगता है ये विकृत विचार हैं।
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