किसानों के मोर्चे को चुनाव आयोग ने दी मान्यता: अब चुनाव चिह्न पर नजर, किसानों ने मांगे ट्रैक्टर-ट्रॉली निशान
पंजाब में 22 किसान जत्थेबंदियां संयुक्त समाज मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ रही हैं। मोर्चा का नेतृत्व पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल कर रहे हैं। आचार संहिता घोषित होने के बाद एसएसएम की ओर से आयोग में राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कत होने के कारण आवेदन वापस भेज दिया गया था।
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पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संयुक्त समाज मोर्चा को राजनीतिक पार्टी के तौर पर मान्यता मिलने के बाद अब किसानों की नजर चुनाव निशान पर है। हालांकि मोर्चा के सभी प्रत्याशियों द्वारा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया गया है। मान्यता मिलने के बाद मोर्चा की ओर से आयोग में सभी प्रत्याशियों को एक जैसा चुनाव निशान दिए जाने की मांग की है जिसमें कहा गया है कि किसानों को ट्रैक्टर ट्रॉली, हल जोतता किसान और ट्रॉली चुनाव निशान आवंटित किया जाए। संयुक्त समाज मोर्चा (एसएसएम) इस चुनाव में संयुक्त संघर्ष मोर्चा के साथ लड़ रहा है। गुरनाम सिंह चढूनी के संयुक्त संघर्ष मोर्चा को 10 सीटें दी गई थीं और संयुक्त समाज मोर्चा को 97 सीटें मिली थीं।
पंजाब में 22 किसान जत्थेबंदियां संयुक्त समाज मोर्चा बनाकर चुनाव लड़ रही हैं। मोर्चा का नेतृत्व पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल कर रहे हैं। आचार संहिता घोषित होने के बाद एसएसएम की ओर से आयोग में राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कत होने के कारण आवेदन वापस भेज दिया गया था। जिसके बाद मोर्चा की ओर से संशोधित आवेदन पत्र आयोग को भेज दिया गया था। इसके बाद आयोग की तरफ से कोई जवाब नहीं आने के कारण किसानों ने नामांकन के अंतिम दिन मंगलवार को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया था। देर रात मोर्चा को आयोग की तरफ से पंजीकरण पत्र प्राप्त हुआ।
इसके बाद किसानों की तरफ से इस मामले में तीखी प्रतिक्रिया दी गई। राजेवाल ने कहा कि यह भाजपा और आप की संयुक्त साजिश के तहत किया गया है। चुनाव में किसान जीत न सकें इसलिए पंजीकरण में राजनीतिक दलों ने यह खेल किया है। अब संयुक्त समाज मोर्चा की तरफ से लेटर दिया जाएगा कि उन्हें एक जैसा ही चुनाव चिह्न मिले। कयास यह लगाए जा रहे हैं कि आयोग इस पर भी जल्द फैसला लेगा। मोर्चा की तरफ से ट्रैक्टर ट्रॉली, हल जोतता किसान और अकेली ट्रॉली चुनाव चिह्न में से एक चुनाव चिह्न देने की मांग की गई है।
किसानों में मान्यता पर खुशी, देरी पर गम
संयुक्त समाज मोर्चा को राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मिलने पर किसानों में खुशी है, लेकिन इसमें हुई देरी पर उन्होंने दुख प्रकट किया है। मोर्चा प्रवक्ता रवनीत सिंह ने ट्वीट कर लिखा है कि यदि मान्यता एक दिन पहले मिल जाती तो किसान निर्दलीय के तौर पर पर्चा नहीं भरते। अब पार्टी के तौर पर मान्यता मिल गई है तो सभी को एक ही चुनाव चिह्न मिलेगा और इसका हमें फायदा जरूर होगा।
25 दिसंबर को हुआ था फैसला
25 दिसंबर को किसानों ने फैसला लिया कि किसान संगठन बनाकर चुनाव लड़ेंगे। इसी दिन संयुक्त समाज मोर्चा का एलान कर दिया गया था। हालांकि चुनाव लड़ने के फैसले में पंजाब की 32 किसान जत्थेबंदियों में से 22 ही मोर्चा का समर्थन कर रही हैं।
आम आदमी पार्टी और भाजपा के अधिवक्ताओं ने जानबूझ कर मोर्चा के पंजीकरण पर आपत्तियां लगाई गईं। हालांकि किसानों के संयुक्त प्रयास से मोर्चा को मान्यता मिल चुकी है। जल्द ही चुनाव निशान पर भी फैसला हो जाएगा। - बलबीर सिंह राजेवाल, किसान नेता, एसएसएम