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देशद्रोह के मामले को लेकर रामपाल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 May 2016 12:37 PM IST
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करौंथा कांड केस में रामपाल की कोर्ट में पेशी
- फोटो : अमर उजाला
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सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके उसके खिलाफ देशद्रोह का दर्ज मामला रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही जिन हालातों में एफआईआर हुई और आश्रम के अनुयायियों पर पुलिसिया कार्रवाई हुई, उसकी सीबीआई जांच कराने की मांग भी की गई है। जस्टिस एमएमएस बेदी की एकल बेंच ने सुनवाई लंबे समय के लिए स्थगित करते हुए मामला 26 जुलाई तक टाल दिया है।
रामपाल की ओर से पेश हुए सीनियर वकील एसके गर्ग नरवाना ने बेंच से कहा है कि किसी कारणवश वह हाईकोर्ट की आपराधिक अवमानना के मामले में पेश नहीं हो सके, ऐसे में उनके खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। कहा है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे देश के खिलाफ बगावत जैसी कार्रवाई प्रतीत होती हो। याचिका में कहा गया है कि जितनी धाराएं उसके खिलाफ लगाई हैं, उतनी धाराएं कसाब के खिलाफ भी नहीं लगी होंगी।
नरवाना ने कहा है कि रामपाल पर सिर्फ अदालत की आपराधिक अवमानना का है। गलती या किसी अन्य कारण के वह इस आदेश का पालन नहीं कर पाया, इसका अर्थ यह नहीं हो जाता है की उन्हें देशद्रोही करार दे दिया जाये। रामपाल ने दायर याचिका में कहा सरकार ने उनके खिलाफ जानबूझ कर इतनी धाराएं लगाई है। कहा है कि ऐसी ही धाराएं अन्य सैंकड़ों लोगों के खिलाफ भी लगाई गई थीं और उनमें से अधिकतर अब जेल से बाहर हैं, लेकिन उसे (रामपाल को) अभी तक जमानत नहीं दी जा रही है। लिहाजा रामपाल ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है ताकि सच सामने आ सके।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की आपराधिक अवमानना में पेश नहीं होने के कारण जस्टिस एम जियापाल व जस्टिस दर्शन सिंह ने पुलिस को सख्त निर्देश दिया था कि रामपाल बंकर में भी छिपा हो तो उसे निकालकर हाईकोर्ट में पेश किया जाना चाहिए। पुलिस ने जब आप्रेशन गिरफ्तारी चलाया तो आश्रम के भीतर से पुलिस का बड़ा विरोध हुआ और वहां खून संघर्ष चला था। इसी कारण पुलिस ने हिसार के बरवाला थाने में 18 नवंबर 2014 कोरामपाल के देश द्रोह सहित अन लॉफुल एक्टिविटी प्रिवेन्शन एक्ट व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया था।
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रामपाल की ओर से पेश हुए सीनियर वकील एसके गर्ग नरवाना ने बेंच से कहा है कि किसी कारणवश वह हाईकोर्ट की आपराधिक अवमानना के मामले में पेश नहीं हो सके, ऐसे में उनके खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। कहा है कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे देश के खिलाफ बगावत जैसी कार्रवाई प्रतीत होती हो। याचिका में कहा गया है कि जितनी धाराएं उसके खिलाफ लगाई हैं, उतनी धाराएं कसाब के खिलाफ भी नहीं लगी होंगी।
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नरवाना ने कहा है कि रामपाल पर सिर्फ अदालत की आपराधिक अवमानना का है। गलती या किसी अन्य कारण के वह इस आदेश का पालन नहीं कर पाया, इसका अर्थ यह नहीं हो जाता है की उन्हें देशद्रोही करार दे दिया जाये। रामपाल ने दायर याचिका में कहा सरकार ने उनके खिलाफ जानबूझ कर इतनी धाराएं लगाई है। कहा है कि ऐसी ही धाराएं अन्य सैंकड़ों लोगों के खिलाफ भी लगाई गई थीं और उनमें से अधिकतर अब जेल से बाहर हैं, लेकिन उसे (रामपाल को) अभी तक जमानत नहीं दी जा रही है। लिहाजा रामपाल ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है ताकि सच सामने आ सके।
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उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की आपराधिक अवमानना में पेश नहीं होने के कारण जस्टिस एम जियापाल व जस्टिस दर्शन सिंह ने पुलिस को सख्त निर्देश दिया था कि रामपाल बंकर में भी छिपा हो तो उसे निकालकर हाईकोर्ट में पेश किया जाना चाहिए। पुलिस ने जब आप्रेशन गिरफ्तारी चलाया तो आश्रम के भीतर से पुलिस का बड़ा विरोध हुआ और वहां खून संघर्ष चला था। इसी कारण पुलिस ने हिसार के बरवाला थाने में 18 नवंबर 2014 कोरामपाल के देश द्रोह सहित अन लॉफुल एक्टिविटी प्रिवेन्शन एक्ट व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया था।