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पंजाब चुनाव: सनमुख सिंह मोखा ने थामा ढींढसा की पार्टी का दामन, भाजपा गठबंधन बना सकता है अपना प्रत्याशी

Tue, 18 Jan 2022 09:09 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम ऊधम सिंह वाला (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 18 Jan 2022 09:09 PM IST
सार

संगरूर में सनमुख सिंह मोखा ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का दामन थाम लिया है। भाजपा गठबंधन उन्हें अपना प्रत्याशी बना सकता है। जल्द ही गठबंधन पंजाब में अपने उम्मीदवारों व घोषणा पत्र का एलान करेगी। 

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Sanmukh Singh Mokha joins Shiromani akali dal Sanyukt
सुनाम में सनमुख सिंह मोखा का सम्मान करते सुखदेव सिंह ढींढसा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

संगरूर की सियासत में आए दिन उथल पुथल हो रही है। मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एसजीपीसी के पूर्व सदस्य सनमुख सिंह मोखा ने अकाली दल संयुक्त में शामिल होकर इलाके की सियासत में भूचाल ला दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा की मौजूदगी में मोखा के शिअद संयुक्त में शामिल होने के बाद कई नेताओं के सुनाम सीट से चुनाव लड़ने के अरमान धरे के धरे रह गए हैं। 

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चुनाव लड़ने की चाहत के चलते कुछ नेताओं ने दल भी बदले लेकिन सियासी बिसात पर मोखा की चाल ने ऐसे नेताओं को चारों खाने चित्त कर दिया है। ऐसे नेताओं के लिए अब हालात आगे कुआं, पीछे खाई वाले बन गए हैं। तय माना जा रहा है कि भाजपा, कैप्टन व ढींढसा गठबंधन के प्रत्याशी मोखा ही होंगे। सांसद ढींढसा व पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर ढींढसा ने मोखा के निवास पर पहुंचकर उन्हें पार्टी में शामिल किया।
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सुखदेव सिंह ढींढसा की हार का कारण बने थे मोखा
सनमुख सिंह मोखा मजबूत आधार वाले नेता हैं। 1997 के विधानसभा चुनाव में सुनाम सीट से आजाद प्रत्याशी के रूप में 20 हजार से ज्यादा वोट हासिल कर मोखा सुखदेव सिंह ढींडसा की हार का कारण बने थे। हालांकि हार के बाद भी ढींढसा, वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और केंद्रीय राजनीति में अहम मुकाम हासिल करने में सफल रहे लेकिन दोनों नेताओं में दूरी ज्यों की त्यों रही। 

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लंबे अंतराल के बाद सियासी खेल फिर दोनों नेताओं को करीब ले आया है। ढींडसा मोखा के मिलन ने साबित कर दिया कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता है। मोखा एसजीपीसी का चुनाव जीत चुके हैं। पिछले करीब एक दशक से कांग्रेस के साथ जुडे़ रहे हैं। इससे पहले मोखा ने 1992 में विधानसभा चुनाव लड़ा था और तब 1681 मतों के अंतर से पूर्व मंत्री भगवान दास अरोड़ा से चुनाव हार गए थे। अकाली दल के टिकट पर वे संगरूर सीट से भी चुनाव लड़ चुके हैं। 

जल्द साझा घोषणा पत्र होगा जारी: ढींढसा
पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने कहा कि उनकी पार्टी, भाजपा और पंजाब लोक कांग्रेस के साथ मिलकर साझा चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। उन्होंने कहा कि पंजाब की आर्थिक स्थिति को संभालना, बेरोजगारी को दूर करना और जनता के भरोसे को जीतना उनका मुख्य एजेंडा है। गठबंधन के घोषणा पत्र में पूरे होने वाले वादे ही किए जाएंगे। 

ढींढसा ने कहा कि केंद्र सरकार से संबंधित मुद्दों को लेकर सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। उनकी मांग है कि आचार संहिता के दायरे में नहीं आने वाले मुद्दों पर अभी फैसला लिया जाए। शेष मुद्दों को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा और इनका समाधान बाद में अवश्य करवाया जाएगा।

गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर अगले एक या दो दिन में फैसला हो जाएगा। तीनों दल इस बात पर एकमत हैं कि सीटें जीतना उनकी प्राथमिकता है। सीटों के बंटवारे को लेकर कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीमार होने के कारण प्रत्याशियों की घोषणा में देरी हो रही है। कैप्टन के स्वस्थ्य होते ही प्रत्याशियों का एलान हो जाएगा। 

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