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Jalandhar West By Election: पंजाब के उपचुनाव में हमेशा सत्तापक्ष का रहा है दबदबा, इस बार हालात कुछ अलग
Wed, 19 Jun 2024 01:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 19 Jun 2024 01:50 PM IST
सार
जालंधर वेस्ट की सीट शीतल अंगुराल के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। अंगुराल ने आप की टिकट पर यहां से चुनाव जीता था। लोकसभा चुनाव से पहले वे आप छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। मतदान के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लिया लेकिन इससे पहले ही विस स्पीकर ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया।
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वोटिंग
- फोटो : प्रतीकात्मक
विस्तार
पंजाब विधानसभा की जालंधर वेस्ट सीट पर 10 जुलाई को उपचुनाव होगा। भाजपा व आम आदमी पार्टी की तरफ से अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने के बाद इस सीट पर चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
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कांग्रेस व शिअद भी जल्द ही अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। पंजाब के उपचुनाव में ज्यादातर सत्तापक्ष का ही दबदबा रहा है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
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लोकसभा चुनाव के नतीजों से मुकाबला बना रोचक
लोकसभा चुनाव के नतीजों से इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस जिस तरह से लोकसभा चुनाव में 7 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, उससे इस सीट पर भी मुकाबला कड़ा होने वाला है। लोकसभा चुनाव में आप के हाथ सिर्फ तीन व शिअद एक सीट जीतने में सफल रही, जबकि भाजपा के हाथ निराशा लगी। यही कारण है कि इस सीट पर सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर ली है।
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अभी और सीटों पर भी होंगे उपचुनाव
उपचुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी राजनीति दलों की ताकत का प्रदर्शन करेंगे, क्योंकि जालंधर वेस्ट के अलावा बरनाला, गिद्दड़बाहा, डेरा बाबा नानक और चब्बेवाल सीट पर भी उपचुनाव होना है।
अगर लोकसभा जालंधर सीट पर 2023 उपचुनाव की बात की जाए तो उसमें भी सत्तापक्ष ही काबिज रहा था। आप के सुशील कुमार रिंकू ने 302279 मत हासिल करके यह चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कर्मजीत कौर चौधरी को मात दी थी। हालांकि इससे पहले लोकसभा संगरूर सीट आप को गंवानी पड़ गई थी। वर्ष 2022 संगरूर सीट पर हुए उपचुनाव में शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने आप के गुरमेल सिंह को मात दी थी। भगवंत मान के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के लिए साथ ही यह सीट खाली हुई थी।
इसी तरह 2019 फगवाड़ा, मुकेरियां, जलालाबाद विधानसभा चुनाव उपचुनाव के नतीजे भी सत्तापक्ष के ही पक्ष में रहे थे। फगवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस के बलविंदर सिंह धालीवाल ने 49,215, मुकेरियां में इंदू बाला ने 53,910 मत व जलालाबाद में रमिंदर सिंह ने 76,098 मत हासिल करके जीत दर्ज की थी। दाखा विधानसभा सीट पर उपचुनाव में शिअद प्रत्याशी मनप्रीत सिंह अयाली 66,297 मत हासिल करके कांग्रेस से यह जीत छीनने में सफल रहे थे। इस तरह 2019 उपचुनाव में चार में से तीन सीटें सत्तापक्ष के हाथ लगी थीं, क्योंकि उस समय पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। इसी तरह 2018 शाहकोट उपचुनाव में भी सत्तापक्ष ने अपनी जीत जारी रखी थी। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी हरदेव सिंह 51,661 मत लेकर विजय रहे थे।
इन चुनावों में भी सत्तापक्ष ने दर्ज की जीत
खडूर साहिब सीट पर 2016 में हुए उपचुनाव से कांग्रेस ने दूरी बना ली थी। तब अकाली दल के रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने एकतरफा भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इसी तरह वर्ष 2015 में धूरी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी शिअद के गोबिंद लोंगोवाल ने 67,596 मत हासिल करके चुनाव जीता था। इस तरह सत्ताधारी पार्टी ने ही इस चुनाव में भी अपनी जीत जारी रखी थी। वर्ष 2014 उपचुनाव में तलवंडी साबो की सीट पर भी शिअद ने जीत जारी रखी थी। इस चुनाव में तलवंडी साबो से कैप्टन जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू अकाली दल में शामिल हो गए थे और उन्होंने उपचुनाव में 71,747 मत हासिल करके बड़ी जीत दर्ज की थी। 2013 में कांग्रेस को छोड़कर अकाली दल में शामिल हुए जोगिंदरपाल जैन ने अकाली दल की टिकट पर मोगा से जीत दर्ज की थी। उस समय पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार थी।
1995 में गिद्दड़बाहा में हुए उपचुनाव में विपक्ष की एकजुटता काम आई थी। तब मनप्रीत बादल पहली बार चुनाव में उतरे थे और उन्होंने कांटे की टक्कर में कांग्रेस के दीपक कुमार को मात दी थी। इस सरकार होने के बावजूद कांग्रेस को इस सीट से हाथ धोना पड़ा था।