गुरमीत राम रहीम को माफी पर RSS सरपरस्त के बड़े बोल
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आरएसएस यानी राष्ट्रीय सिख संगत के संस्थापक व सरपरस्त ज्ञानी चिरनजीव सिंह ने राम रहीम को माफी मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा है कि अकाल तख्त सर्वोच्च है। इसके हुक्मनामे को चुनौती नहीं दी जा सकती। चिरनजीव सिंह राष्ट्रीय सिख संगत के मालवा जोन इंचार्ज पूर्व सांसद राजदेव सिंह खालसा के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
ज्ञानी चिरनजीव सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि एसजीपीसी सिर्फ गुरुद्वारों तक सीमित होकर रह गई है। सिखी के प्रसार व प्रचार के लिए एसजीपीसी कोई कदम नहीं उठा रही। जबकि हर धर्म अपने अपने प्रचार के लिए ठोस प्रयास कर रहा है। एसजीपीसी के प्रबंधकों का ध्यान सिर्फ गुरुद्वारों की गोलकों की तरफ है।
आरएसएस कभी भी सिख विरोधी नहीं रहा
चिरनजीव सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सिख संगत तमाम ऐसे लोगों को वापस सिख धर्म में ला चुकी है, जो सिखी से विमुख होकर दूसरा धर्म अपना चुके थे।
उन्होंने कहा कि आरएसएस कभी भी सिख विरोधी नहीं रहा, जबकि सिखों व आरएसएस के कारकूनों ने इकट्ठे कई संघर्ष किए और इकट्ठे जेलें भी काटीं।
उन्होंने कहा कि बेशक राष्ट्रीय सिख संगत शिरोमणि कमेटी के चुनाव नहीं लड़ती लेकिन एसजीपीसी चुनाव में उनसे सहयोग जरूर लिया जाता है।
उनके साथ राष्ट्रीय सिख संगत के राज्य अध्यक्ष गुरबचन सिंह बडरूखां, मालवा जोन के इंचार्ज पूर्व सांसद राजदेव सिंह खालसा, एडवोकेट जतिंदरजीत सिंह गोल्डी उगोके, नछत्तर सिंह, अवतार सिंह संधू भी मौजूद थे।