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हरियाणा से आरके आनंद ने भरा राज्यसभा के लिए नामांकन

Wed, 01 Jun 2016 05:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 01 Jun 2016 05:56 PM IST
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RK anand nomination for rajya sabha from haryana, difficulties for chandra
अार के आनंद - फोटो : amar ujala

हरियाणा में राज्यसभा की दूसरी सीट पर चुनाव फंस गया है। भाजपा की तरफ से पहले दावेदार अखिलेश दास का पत्ता कटवाकर मैदान में उतरे हरियाणा मूल के उद्यमी सुभाष चंद्रा की राह आसान नहीं रह गई है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आरके आनंद के नामांकन के साथ ही अब यह मुकाबला कांटे का हो गया है।इसके लिए मतदान 11 जून को होगा।

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दोनों प्रत्याशियों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा के लिए अपना आवेदन किया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने खुलकर सुभाष चंद्रा का समर्थन करते हुए पार्टी के 20 विधायकों को उनका प्रस्तावक बनाया, तो विपक्षी दल इनेलो ने आरके आनंद का समर्थन कर दिया।
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प्रदेश का तीसरा विपक्षी दल कांग्रेस इस मामले में अभी चुप है। हरियाणा में अगस्त में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं। 90 विधायकों वाली हरियाणा विधानसभा से किसी भी व्यक्ति को राज्यसभा में जाने के लिए 31 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, जिसके चलते एक सीट के लिए भाजपा ने अपने बहुमत के साथ बीरेंद्र सिंह को राज्यसभा में भेज दिया है। दूसरी सीट पर बहुमत के अभाव में पेच फंस गया है।
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अंतिम समय में अपने पत्ते खोलते हुए पूर्व सांसद आरके आनंद ने इनेलो के समर्थन से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल कर दिया। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन एक सीट पर दो नामांकन होने के कारण यह तय हो गया है कि अब हरियाणा में राज्यसभा की एक सीट के लिए मतदान होगा। नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद सुभाष चंद्रा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिखे।

उन्होंने कहा कि उनकी सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत हो चुकी है। दूसरी तरफ आरके आनंद ने कहा कि वह सिद्धांतों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पहले भी राज्यसभा में होते हुए उन्होंने जनहित के कई बड़े काम किए हैं। अनुभव के आधार पर उनकी जीत तय है। उन्होंने झारखंड में विकास करवाएं हैं। वह भी ऐसी स्थिति में जब वहां पर भाजपा की सरकार थी।


यह है गणित
इनेलो को भाजपा की बी टीम बताने वाली कांग्रेस इनेलो के समर्थन में वोटिंग नहीं करती तो फायदा भाजपा का होे जाएगा। लिहाजा, सैद्धांतिक तौर पर कांग्रेस की मजबूरी आरके आनंद का सपोर्ट करना होगी।

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