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Chandigarh News: हाईकोर्ट का अहम आदेश, राजस्व अदालतें मैसेजिंग एप पर भेजेंगी नोटिस और समन
Wed, 31 May 2023 12:44 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 31 May 2023 12:44 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने सभी राजस्व अदालतें को आदेश दिया है कि पक्षकारों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं से व्हाट्सएप सुविधा वाला फोन नंबर व ई-मेल आईडी जमा करवाने पर जोर दें। भविष्य में वकीलों को सभी नोटिस ई-मेल या इंस्टेंट मैसेजिंग सेवाओं पर जारी किए जाएं।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की राजस्व अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी को कम करने के लिए हाईकोर्ट ने मैसेजिंग एप व्हाट्सएप और टेलीग्राम के इस्तेमाल का आदेश दिया है। इस बारे में हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब के मुख्य सचिव व चंडीगढ़ प्रशासक को सूचित करने का निर्देश दिया है।
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2021 में विभाजन से जुड़ा एक मामला अदालत के समक्ष आया था और इस मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न होने को लेकर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि विभाजन से जुड़ा यह विवाद 19 साल पुराना था और कोर्ट ने छह महीने के भीतर इसका निपटान करने का निर्देश जारी किया था। जब इस मामले में सरकार से जवाब मांगा गया तो बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड की मूल प्रति अपीलेट कोर्ट के पास लंबित है।
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अक्सर राजस्व अदालतों में मामले लटकते हैं। इसके साथ ही नोटिस या समन आदेश को स्वीकार न करने के चलते भी मामले सालों साल लंबित रहते हैं। कोर्ट ने इस पर कहा कि नोटिस, समन और दलीलों का आदान-प्रदान ई-मेल, फैक्स और व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसी आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली त्वरित संदेश सेवाओं के माध्यम से किया जा सकता है।
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ढोल पीटकर नोटिस की तामील पुरानी प्रथा
हाईकोर्ट ने सभी राजस्व अदालतें को आदेश दिया है कि पक्षकारों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं से व्हाट्सएप सुविधा वाला फोन नंबर व ई-मेल आईडी जमा करवाने पर जोर दें। भविष्य में वकीलों को सभी नोटिस ई-मेल या इंस्टेंट मैसेजिंग सेवाओं पर जारी किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि मुनादी की प्रक्रिया में ढोल पीटकर नोटिस की तामील करवाई जाती है जो अब अप्रचलित हो चुकी है और इसे त्यागने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि राजस्व अदालतों के खिलाफ सुनवाई करते हुए अपीलेट कोर्ट मूल रिकॉर्ड मंगवा लेती हैं जिससे राजस्व अदालतों में मामले लटकते हैं। ऐसे में अपीलेट कोर्ट को रिकॉर्ड की स्कैन की गई कॉपी/फोटोकॉपी ही मंगवानी चाहिए। ऐसे में अपील लंबित रहते भी राजस्व अदालतें अपनी कार्रवाई को (यदि स्टे नहीं है तो)जारी रख सकती हैं।