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Chandigarh News: सेना से रिटायर, देशसेवा का जज्बा बरकरार
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चंडीगढ़। भारतीय सेना से बेशक मैं रिटायर हो गया हूं, लेकिन सेवाएं अब भी जारी रहेंगी। यह कहना है शौर्य चक्र, सेना मेडल गैलेंट्री और युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित मेजर जनरल मनप्रीत सिंह बैंस का। उन्होंने सेना की सबसे खास मानी जाने वाली 9 पैरा स्पेशल फोर्स बटालियन में कमीशन लिया था और 31 अगस्त 2026 को सेना से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी सोशल गतिविधियों के माध्यम से समाज सेवा जारी रखेंगे।
मेजर जनरल बैंस ने बताया कि देश सेवा के दौरान उनकी बटालियन ने चीन और कश्मीर में 100 से अधिक ऑपरेशन किए। कश्मीर के बेहद संवेदनशील पीर पंजाल क्षेत्र में अभियानों के दौरान जवानों ने दिन-रात मेहनत की। उन्होंने बताया कि यह माउंटेन रेंज ऐसा इलाका था, जहां किसी भी दिशा से हमला होने की आशंका रहती थी। इसके बावजूद रणनीति ऐसी बनाई गई कि उनकी बटालियन आतंकियों को घेरकर कार्रवाई करती रही।
गोलियां लगीं, फिर भी डटे रहे
उन्होंने बताया कि अभियानों के दौरान कई आतंकियों को मार गिराया गया। ऑपरेशन में उन्हें खुद भी कई गोलियां लगीं, लेकिन वह और उनके साथी जवान डटे रहे। लगातार चार साल की मेहनत के बाद पीर पंजाल क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त कराने में सफलता मिली। चीन सीमा पर तैनाती को भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश का नाम सामने हो तो मुश्किल चुनौतियां भी आसान लगने लगती हैं।
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दो डिवीजन की कमान संभाली
पैरा स्पेशल फोर्स को कमांड करने के दौरान उन्हें युद्ध सेवा मेडल मिला। बेहतर सैन्य सेवा के लिए उन्हें मेजर जनरल रैंक मिली और उन्होंने दो डिवीजन की कमान संभाली। इनमें चीन सीमा पर माउंटेन डिवीजन और ट्राई सर्विस स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन शामिल हैं।
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मेजर जनरल बैंस ने बताया कि देश सेवा के दौरान उनकी बटालियन ने चीन और कश्मीर में 100 से अधिक ऑपरेशन किए। कश्मीर के बेहद संवेदनशील पीर पंजाल क्षेत्र में अभियानों के दौरान जवानों ने दिन-रात मेहनत की। उन्होंने बताया कि यह माउंटेन रेंज ऐसा इलाका था, जहां किसी भी दिशा से हमला होने की आशंका रहती थी। इसके बावजूद रणनीति ऐसी बनाई गई कि उनकी बटालियन आतंकियों को घेरकर कार्रवाई करती रही।
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गोलियां लगीं, फिर भी डटे रहे
उन्होंने बताया कि अभियानों के दौरान कई आतंकियों को मार गिराया गया। ऑपरेशन में उन्हें खुद भी कई गोलियां लगीं, लेकिन वह और उनके साथी जवान डटे रहे। लगातार चार साल की मेहनत के बाद पीर पंजाल क्षेत्र को आतंकवाद से मुक्त कराने में सफलता मिली। चीन सीमा पर तैनाती को भी उन्होंने चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश का नाम सामने हो तो मुश्किल चुनौतियां भी आसान लगने लगती हैं।
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दो डिवीजन की कमान संभाली
पैरा स्पेशल फोर्स को कमांड करने के दौरान उन्हें युद्ध सेवा मेडल मिला। बेहतर सैन्य सेवा के लिए उन्हें मेजर जनरल रैंक मिली और उन्होंने दो डिवीजन की कमान संभाली। इनमें चीन सीमा पर माउंटेन डिवीजन और ट्राई सर्विस स्पेशल ऑपरेशन डिवीजन शामिल हैं।