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महान नाटककार गुरशरण सिंह को जन्मदिवस पर किया याद
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सेक्टर-43 में नाटककार गुरशरण सिंह के जन्म दिवस के मौके पर कैंडल जलाकर उनको याद करते लोग।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। पंजाबी रंगमंच के महान नाटककार गुरशरण सिंह का वीरवार को जन्मदिवस मनाया गया। उनका निधन 2011 में हुआ था। उनका जन्मदिवस गुरशरण सिंह मेमोरियल गैलरी में मनाया गया। इस दौरान मोमबत्ती जलाकर उन्हें याद किया गया।
गुरशरण सिंह की बेटी डॉ. अरीत कौर ने पिता के रंगमंच की परंपरा को निभा रहे कलाकारों के योगदान को सलाम किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता सिर्फ कलाकार नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने समाज के प्रति अनेकों कार्य किए। साथ ही नाटकों के जरिए समाज को जागरुकता का संदेश दिया। गुरशरण सिंह से जुड़े कई कलाकार उनके आखिरी सफर की गवाह बेड को प्रणाम करते हुए भावुक हो गए।
इस मौके पर अनीता शब्दीश ने अपने अनुभव साझा बताते हुए कहा कि भाजी अपनी प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप लड़ रही पंजाबियत के महानायक बन गए। बता दें इस गैलरी सुचेतक रंगमंच को गुरशरण की शार्गिद अनीता शब्दीश ने तैयार की है। यह गैलरी 2012 से 2019 तक सारंग लोक मोहाली में लगाई गई थी। इसे परिवार के सुझाव पर गुरशरण सिंह की सेक्टर- 43 स्थित आवास मकान नंबर 1245 चंडीगढ़ में बदल दिया गया। सुचेतक रंगमंच ने वर्ष 2004 में गुरशरण सिंह नाट्य उत्सव का आगाज किया था। तब से यह लगातार होता आ रहा है। अनीता शब्दीश ने कहा कि इसी प्रकार संस्था ने वर्ष 2005 में तस्वीरों पर आधारित जीवन सफर पेश करता हुआ स्लाइड शो ‘सिरत को सलाम’ तैयार किया था। 2010 में गुरशरण सिंह मेमोरियल गैलरी तैयार की गई थी।
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कलाकारों ने झल्ली कित्थे जावे नुक्कड़ नाटक का किया मंचन
इस मौके पर अनीता शब्दीश से अभिनय सीख रहे नए कलाकारों ने पाकिस्तानी पंजाब के नाटककार साहिद नदीम का ‘झल्ली कित्थे जावे’ नुक्कड़ नाटक पेश किया। साथ ही गुरशरण सिंह की परंपरा के गीत संगीत झलकियां भी दर्शकों के सामने प्रस्तुत की गईं। इस समागम में पंजाबी साहित्य जगत की प्रमुख हस्ती गुलजार सिंह संधू, पंजाब कला परिषद के पूर्व चेयरपर्सन हरजिंदर कौर, नाटक निर्देशक सुदेश शर्मा और लक्खा लहरी, नाटक और फिल्म जगत से जुड़े गुरप्रीत कौर भंगू, महिंदर डोगरा, जगजीत सरीन, रमन ढिल्लों, जसबीर ढिल्लों सहित अन्य रंगकर्मी उपस्थित रहे।
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गुरशरण सिंह की बेटी डॉ. अरीत कौर ने पिता के रंगमंच की परंपरा को निभा रहे कलाकारों के योगदान को सलाम किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता सिर्फ कलाकार नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने समाज के प्रति अनेकों कार्य किए। साथ ही नाटकों के जरिए समाज को जागरुकता का संदेश दिया। गुरशरण सिंह से जुड़े कई कलाकार उनके आखिरी सफर की गवाह बेड को प्रणाम करते हुए भावुक हो गए।
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इस मौके पर अनीता शब्दीश ने अपने अनुभव साझा बताते हुए कहा कि भाजी अपनी प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप लड़ रही पंजाबियत के महानायक बन गए। बता दें इस गैलरी सुचेतक रंगमंच को गुरशरण की शार्गिद अनीता शब्दीश ने तैयार की है। यह गैलरी 2012 से 2019 तक सारंग लोक मोहाली में लगाई गई थी। इसे परिवार के सुझाव पर गुरशरण सिंह की सेक्टर- 43 स्थित आवास मकान नंबर 1245 चंडीगढ़ में बदल दिया गया। सुचेतक रंगमंच ने वर्ष 2004 में गुरशरण सिंह नाट्य उत्सव का आगाज किया था। तब से यह लगातार होता आ रहा है। अनीता शब्दीश ने कहा कि इसी प्रकार संस्था ने वर्ष 2005 में तस्वीरों पर आधारित जीवन सफर पेश करता हुआ स्लाइड शो ‘सिरत को सलाम’ तैयार किया था। 2010 में गुरशरण सिंह मेमोरियल गैलरी तैयार की गई थी।
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कलाकारों ने झल्ली कित्थे जावे नुक्कड़ नाटक का किया मंचन
इस मौके पर अनीता शब्दीश से अभिनय सीख रहे नए कलाकारों ने पाकिस्तानी पंजाब के नाटककार साहिद नदीम का ‘झल्ली कित्थे जावे’ नुक्कड़ नाटक पेश किया। साथ ही गुरशरण सिंह की परंपरा के गीत संगीत झलकियां भी दर्शकों के सामने प्रस्तुत की गईं। इस समागम में पंजाबी साहित्य जगत की प्रमुख हस्ती गुलजार सिंह संधू, पंजाब कला परिषद के पूर्व चेयरपर्सन हरजिंदर कौर, नाटक निर्देशक सुदेश शर्मा और लक्खा लहरी, नाटक और फिल्म जगत से जुड़े गुरप्रीत कौर भंगू, महिंदर डोगरा, जगजीत सरीन, रमन ढिल्लों, जसबीर ढिल्लों सहित अन्य रंगकर्मी उपस्थित रहे।