{"_id":"5fe8fb4b8ebc3e3c9037da2d","slug":"religion-of-humanity-is-most-important-gurbachan-singh-chandigarh-news-pkl3986789146","type":"story","status":"publish","title_hn":"सबसे महत्वपूर्ण है इंसानियत का धर्म : गुरबचन सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सबसे महत्वपूर्ण है इंसानियत का धर्म : गुरबचन सिंह
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल नंबर- 6 में रविवार को छोटे साहिबजादों के शहीदी दिवस पर वेबिनार करवाया गया। इसमें गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके परिवार के बलिदान का भारतीय इतिहास में महत्व विषय पर जानकारी दी गई। वार्डन डॉ. मनीषा शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय सिख संगत के ऑल इंडिया एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट गुरबचन सिंह मोखा ने कई जानकारियां दीं।
गुरबचन सिंह मोखा ने कहा कि धर्म में सबसे महत्वपूर्ण है इंसानियत का धर्म। श्री गुरु ग्रंथ साहिब और गीता दोनों ही कर्म पर जोर देते हैं। उन्होंने हिंदू और सिख धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी धर्मों का संदेश सिर्फ इंसानियत है। उन्होंने बताया कि सूबा सरहिंद के दबाव और कई तरह के लालच देने के बावजूद जोरावर सिंह और फतिह सिंह ने धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया था। लगातार तीन दिन तक चली कचहरी के बाद दोनों साहिबजादे दीवार में चुनवा दिए गए थे। उनके दोनों भाई साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह जंग में शहीद हुए। उससे पहले उनके दादा और सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शहीदी दी थी। इन सभी घटनाओं का जिक्र करते हुए गुरबचन सिंह मोखा ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के बलिदान और उसके भारतीय इतिहास पर प्रभाव को बताया।रिसर्च स्कॉलर मोनिका ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया। वार्डन डॉ मनीषा शर्मा ने सभी का आभार जताया। कहा कि बच्चों को अपने गौरवमई इतिहास को अवश्य ही पढ़ाना चाहिए और गुरु परिवार की बलिदानी का सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।
विज्ञापन
गुरबचन सिंह मोखा ने कहा कि धर्म में सबसे महत्वपूर्ण है इंसानियत का धर्म। श्री गुरु ग्रंथ साहिब और गीता दोनों ही कर्म पर जोर देते हैं। उन्होंने हिंदू और सिख धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी धर्मों का संदेश सिर्फ इंसानियत है। उन्होंने बताया कि सूबा सरहिंद के दबाव और कई तरह के लालच देने के बावजूद जोरावर सिंह और फतिह सिंह ने धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया था। लगातार तीन दिन तक चली कचहरी के बाद दोनों साहिबजादे दीवार में चुनवा दिए गए थे। उनके दोनों भाई साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह जंग में शहीद हुए। उससे पहले उनके दादा और सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शहीदी दी थी। इन सभी घटनाओं का जिक्र करते हुए गुरबचन सिंह मोखा ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के बलिदान और उसके भारतीय इतिहास पर प्रभाव को बताया।रिसर्च स्कॉलर मोनिका ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया। वार्डन डॉ मनीषा शर्मा ने सभी का आभार जताया। कहा कि बच्चों को अपने गौरवमई इतिहास को अवश्य ही पढ़ाना चाहिए और गुरु परिवार की बलिदानी का सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।
विज्ञापन