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Punjab News: शिरोमणि अकाली दल ने कहा- दविंदरपाल सिंह भुल्लर की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज करना निंदनीय

Tue, 23 Jan 2024 08:09 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 23 Jan 2024 08:09 PM IST
सार

अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने दविंदरपाल सिंह भुल्लर को न्याय न देने के मामले में मिलकर काम किया है। मजीठिया ने याचिका खारिज करने की वजह को सार्वजनिक करने की मांग की। 

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Rejecting the petition for premature release of Davinderpal Singh Bhullar is condemnable says SAD
अकाली नेता बिक्रम मजीठिया। - फोटो : twitter

विस्तार

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने मंगलवार को दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा प्रो. दविंदरपाल सिंह भुल्लर की समय से पहले रिहाई की याचिका को खारिज करने की निंदा की। साथ ही उन्होंने याचिका खारिज करने के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग की। मंगलवार को प्रेसवार्ता के दौरान मजीठिया ने मान सरकार से कहा कि वह यह स्पष्ट करें कि वह पिछले दो साल से गुरमीत राम रहीम के खिलाफ धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज करने की एसआईटी की सिफारिश को क्यों दबा रहे हैं? 

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उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केजरीवाल और भगवंत मान ने दविंदरपाल सिंह भुल्लर को न्याय न देने के मामले में मिलकर काम किया है, जो पिछले 29 साल से जेल में बंद है। वहीं वह गुरमीत राम रहीम के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे हरियाणा विधानसभा चुनाव से पूर्व इस मुद्दे पर उन्हें नाराज नहीं करना चाहते हैं।

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उन्होंने भुल्लर के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि पंजाबियों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी समयपूर्व रिहाई की याचिका को पिछले पांच साल से क्यों लंबित रखा गया और अब इसे खारिज क्यों कर दिया गया है? यह प्रो. भुल्लर के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इससे साफ है कि आम आदमी पार्टी हमेशा दोहरे मापदंड अपना रही है।

मजीठिया ने एक मामले में आरोपी विधायक अमरजीत सिंह संदोआ के कनाडा से निर्वासन को रोकने के लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह सिंधवां द्वारा पुलिस क्लीयरेंस प्रमाण पत्र प्राप्त करने की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि संदोआ को कनाडाई हवाई अड्डे के अधिकारियों ने रोका था और सात घंटे तक मामले में पूछताछ की थी। 

उन्हें आप नेता हिम्मत सिंह शेरगिल की शादी में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि कोर्ट के स्पष्ट दिशा निर्देश के बावजूद पीड़ित और संदोआ के बीच कथित समझौते के आधार पर जल्दबाजी में अपराध की तह तक जाए बगैर पुलिस क्लीयरेंस प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जो गलत है।

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