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Hindi News ›   Chandigarh ›   Reason behind low turnout in Punjab Assembly elections 2022

पंजाब में कम मतदान की वजह: क्या लोगों को पसंद नहीं आए मुफ्त के वादे, विशेषज्ञ भी हैरान, कहा- इस बार किसी दल की लहर नहीं

Tue, 22 Feb 2022 10:01 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 22 Feb 2022 10:01 PM IST
सार

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब के मूल मुद्दों को हल करने में अभी तक की सरकारें पूरी तरह से विफल रहीं, जिसके कारण लोगों में नाराजगी रही। पंजाब में चुनाव लड़ रहे राष्ट्रीय दलों और क्षेत्रीय दलों को इससे सीख लेने की जरूरत है।

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Reason behind low turnout in Punjab Assembly elections 2022
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब के चुनावी रण में सियासतदानों के मुफ्त के वादे को मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। यही कारण है कि उन्होंने मतदान से दूरी बनाई। पंजाब में कम मतदान को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञ भी काफी हैरान हैं। उनका कहना है कि यह पहला ऐसा चुनाव है जिसमें किसी भी राजनीतिक दल की कोई लहर नहीं थी। कम मतदान को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि इस बार का मतदान बदलाव के लिए नहीं हुआ है। इस चुनाव में 2017 के मुकाबले कम मतदान हुआ है। जानकारों के अनुसार मतदान का गिरा ग्राफ राजनीतिक दलों में लोगों की घटती उम्मीद और चुनावी प्रक्रिया से मोहभंग को दर्शा रहा है। पिछले चुनाव में मतदान प्रतिशत 77.40 था। 

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2002 में यही ग्राफ 65.14 प्रतिशत था। जब शिअद-भाजपा गठबंधन के साथ कड़े मुकाबले में कांग्रेस सत्ता में आई थी। यह भी साफ हो गया है कि चुनाव में यह पहली बार हुआ है कि किसी भी राजनीतिक दल की कोई लहर नहीं थी। कम मतदान यह भी दर्शाता है कि अब लोग राजनीतिक दलों से भी दूर जा रहे हैं। लोक-लुभावने वादे भी मतदाताओं को खींचने में विफल रहे। 
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पंजाब विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने बताया कि कम मतदान यह भी इंगित करता है कि इस बार मतदाताओं ने बदलाव के लिए वोट नहीं किया है। अभी तक चुनावों में एक ट्रेंड यह भी रहा है कि यदि डाले गए वोटों की संख्या में गिरावट आती है तो यह इंगित करता है कि मतदाताओं के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध नहीं थे। इससे यह भी पता चलता है कि लोगों ने चुनाव प्रक्रिया से दूर रहना ज्यादा पसंद किया।

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बड़े चेहरे का रहा अभाव
मतदान का प्रतिशत कम रहने के पीछे एक बड़ा कारण चुनाव में बड़े सियासी चेहरे का अभाव भी रहा। पिछले चुनावों में मतदान अधिक होने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह एक वोट मोबिलाइजर के रूप में बड़े चेहरे के रूप में थे। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव का चेहरा बनाने का प्रयास किया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाई।

शहरी मतदाताओं ने बनाई दूरी
2022 के चुनाव में शहरी मतदाताओं ने दूरी बनाई। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण भी शहरी वोटर मतदान से दूर रहा। मोहाली, लुधियाना, अमृतसर जैसे बड़े जिलों में अपेक्षा से काफी कम मतदान हुआ। जबकि मतदाताओं को रिझाने के लिए इन शहरों में राजनीतिक दलों की ओर से काफी प्रयास किया गया।

ये प्रमुख मुद्दे नहीं हो पाए हल

  • पंजाब को नशा मुक्त करने की मुहिम
  • बेअदबी के मामलों का न हल होना
  • राज्य में गिरता भूजल स्तर बड़ी समस्या
  • पूर्ण ऋण माफी पर सियासदानों की चुप्पी
  • सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं का हल नहीं होना
  • एनआरआई के 10000 लंबित मामले
  • पराली प्रबंधन के लिए ठोस नीति का अभाव
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