राम रहीम और डेरा सच्चा सौदा के लिए खड़ी हो गई नई मुसीबत, जानिए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जेल में कैद राम रहीम और उसके डेरा सच्चा सौदा के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। मामला लखनऊ के निजी मेडिकल कॉलेज में शवों की सप्लाई का है। दरअसल, सिरसा डेरे से 14 शवों को लखनऊ के निजी मेडिकल कॉलेज में भेजने का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। मंत्रालय अपने स्तर पर इसकी जांच कराएगा। जांच टीम का गठन भी कर दिया गया है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमारी चौबे ने यहां प्रेस द मीट कार्यक्रम में दी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने स्तर पर भी शवों को भेजने की जांच कराने का निर्णय लिया है। चूंकि, अभी तक की हरियाणा सरकार की जांच में शवों का रिकार्ड दुरुस्त नहीं पाया गया है। जांच टीम जल्दी अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी। डेरामुखी को सजा व अन्य मामलों पर उन्होंने सिर्फ यही कहा कि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर कार्रवाई कर रही है। चौबे ने स्वास्थ्य और शिक्षा के व्यापारीकरण पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि महंगी दवाओं और सरकारी अस्पतालों में सीनियर सिटीजन को लंबी लाइनों में लगने के मामले में उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने महज आठ दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला है, इसलिए किसी भी मामले में कार्रवाई को लेकर टिप्णी करना वह उचित नहीं समझते। जेनरिक दवाएं महंगी दवा व्यवस्था से छुटकारा दिला सकती हैं। सीनियर सिटीजन के लिए अलग काउंटर होने से समस्याओं का समाधान निकलेगा।
कॉलेज में आए डेरा अनुयायियों के 14 शव
लखनऊ के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों के 14 शव आए। बच्चों की पढ़ाई के लिए ये शव इस साल जनवरी से लेकर अगस्त के बीच आए हैं। मामले की खबर मिलते ही पुलिस ने कॉलेज प्रबंधक से शवों से जुड़े कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। आरोप यह है कि इनके साथ न तो डेथ सर्टिफिकेट था और न ही सरकार से इसके लिए कोई अनुमति ली गई थी।
मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने भी इस कॉलेज के प्रबंधकों से संपर्क किया। उधर, जीसीआरजी मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन अभिषेक यादव के पिता व कॉलेज के ट्रस्टी ओमकार यादव कहते हैं कि हम ही नहीं लखनऊ के ज्यादातर मेडिकल कॉलेज डेरा सच्चा सौदा से ही डेड बॉडी मंगाते हैं। उन्होंने बताया कि डेरा सच्चा सौदा अपने अनुयायियों को निधन होने के बाद अपनी बॉडी मेडिकल कॉलेजों को पढ़ाई के लिए दान देने के लिए तैयार करते थे।
उन्होंने बताया कि उनका कॉलेज अभी नया है इसलिए उन्होंने यहां पहले से स्थापित कॉलेजों से संपर्क किया तो उन्होंने डेरा सच्चा सौदा के बारे में बताया। हमने भी वहां से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को जरूरत की 90 प्रतिशत डेड बॉडी डेरा सच्चा सौदा के सहयोग से ही मिलती है। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. केके गुप्ता कहते हैं कि जीसीआरजी कॉलेज में डेड बॉडी डेरा आश्रम से मंगाए जाने का मामला संज्ञान में आया है। इस मामले की जांच करवा रहे हैं।
मौत के दो से तीन घंटे में लखनऊ भेजा जाता है कैडवर
निजी मेडिकल कॉलेजों में डेरा के अनुयायियों के शवों को मौत के मात्र दो से तीन घंटे में ही लखनऊ के लिए रवाना कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार शवों को खराब होने से बचाने के लिए समय का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर वाली एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जाता है। जो 16 से 18 घंटे में कैडवर को लखनऊ के निजी मेडिकल कॉलेजों में पहुंचा दी जाती है।
हमारे मेडिकल कॉलेज में सभी मानकों का पालन करके कैडवर मंगाए जाते हैं। ये कैडवर डेरा के अनुयायियों के होते हैं और देहदान के माध्यम से मेडिकल कॉलेज लाए जाते हैं। इन्हें डेरा से नहीं लाया जाता है। सभी देहदानियों का पहचान प्रमाण पत्र, उनके परिवारीजन के फोटो के साथ शपथ पत्र लिया जाता है कि वह अपनी मर्जी से देहदान कर रहे हैं। इसके बाद उन्हें देहदान का सर्टिफिकेट जीसीआरजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के पैड पर दिया जाता है। जिसके आधार पर वह डेथ सर्टिफिकेट अपने निवास स्थान से बनवाते हैं। जो उनके भविष्य की जरूरतों के काम आता है। जीसीआरजी से मिले देहदान सर्टिफिकेट के आधार पर मृतकों का मृत्यु प्रमाण बनता है न कि मेडिकल कॉलेज उनसे डेथ सर्टिफिकेट लेता है।
- आसिफ अताउल्लाह खान प्रशासनिक अधिकारी, जीसीआरजीआईएमएस