अंबाला में राफेल का वाटर सैल्यूट से हुआ स्वागत, पहले एयरबेस की परिक्रमा, फिर जमीन पर गर्जना
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आखिरकार बुधवार को वह पल आ ही गया, जिसका सभी को इंतजार था। सात हजार किलोमीटर की दूरी तय कर दोपहर करीब तीन बजकर 10 मिनट पर अंबाला के एयरफोर्स स्टेशन में राफेल ने सुरक्षित लैंडिंग की। अपने ही अंदाज में पहले तीन और फिर दो राफेल ने आकाश में ही कलाबाजियां दिखाते हुए कट मारे और एक-एक करके सभी पांच राफेल सुरक्षित उतरने के साथ अंबाला के हो गए। अब अंबाला के यह राफेल दुश्मन के सभी मंसूबों को फेल करने के लिए यहीं पर तैनात रहेंगे। लैंडिंग के बाद इनका स्वागत वाटर सैल्यूट के साथ किया गया। हालांकि अभी इंडक्शन के लिए अलग से सेरेमनी होना बाकी है।
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राफेल के आने से पहले शुरू हुई एयर पेट्रोलिंग
जैसे ही अंबाला एयरफोर्स को राफेल के आने की सूचना मिली तो करीब ढाई बजे एयर पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई। इतना ही नहीं आर्मी और एयरफोर्स की अलग-अलग टुकड़ियां भी हरकत में आ गई। इससे पहले पूरे एरिया पर आर्मी और एयरफोर्स की सेना के साथ इंटेलिजेंस की निगरानी रही। सेना नगर से आर्मी एरिया में प्रवेश को वर्जित कर दिया गया। इसी तरह छावनी में इंदिरा चौक की तरफ से आर्मी एरिया में प्रवेश निषेध कर दिया गया।
गर्व से चौड़ा हो गया अंबालावासियों का सीना
पांच राफेल जैसे ही अंबाला की धरती पर उतरे तो प्रत्येक अंबालावासियों और हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। राफेल के दर्शन के लिए अंबालावासी सुबह से ही आकाश व टेलीविजन पर टकटकी लगाए बैठे रहे। बता दें कि बलदेव नगरवासियों सहित छह गांव के लोगों को वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी से रोकने के लिए धारा 144 भी अंबाला उपायुक्त ने लगाई थी। वहीं बलदेव नगर में तो लोगों को अपने ही घरों की छतों पर आने से रोक दिया गया था। इसीलिए यह लोग टेलीविजन स्क्रीन पर राफेल के उतरने तक नजरें गढ़ाए रहे।
1389 किमी प्रति घंटे की गति फिर भी सात हजार की दूरी तय करने में लगे 48 घंटे
पांच लड़ाकू विमान करीब 48 घंटे बाद अंबाला पहुंच गए। सवाल यह है कि आखिर 1389 प्रति घंटे की स्पीड से उड़ने वाले राफेल को मात्र सात हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में दो दिन कैसे लग गए। दरअसल, राफेल सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरते हैं लेकिन उनमें ईंधन कम होता है। इसीलिए वे ज्यादा दूरी तय नहीं कर पाते। यही कारण है कि इनमें बार-बार ईंधन डालना पड़ता है, इसीलिए 48 घंटे का समय भी लगा।
गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन हुई जिंदा
अंबाला में ही राफेल की पहली स्क्वाड्रन तैनात होगी। 17वीं स्क्वाड्रन को गोल्डन-ऐरो नाम दिया गया है। इस स्क्वाड्रन में 18 राफेल लड़ाकू विमान होंगे। तीन ट्रेनर और बाकी 15 फाइटर जेट्स। दरअसल, गोल्डन एरो अभी तक बठिंडा स्थित मिग-21 की स्क्वाड्रन को जाना जाता था। मिग-21 की स्क्वाड्रन ने करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। मिग-21 के रिटायर होने के बाद ये स्क्वाड्रन पिछले कुछ सालों से बंद थी। अब इसे एक बार फिर से राफेल के साथ जीवित कर दिया गया है। पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ भी इसी स्क्वाड्रन से ताल्लुक रखते थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला व गृह मंत्री अनिल विज ने हरियाणा की पावन धरती पर राफेल लड़ाकू विमानों के पहले जत्थे का स्वागत किया है। इन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण व अत्याधुनिक हथियारों से उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राफेल की खरीद इस बात का प्रमाण है।
सुरजेवाला का स्वागत के साथ तंज
रणदीप सुरजेवाला ने रॉफेल का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि वायुसेना के जाबांज लड़ाकुओं को बधाई। यह जरूर पूछते है कि 526 करोड़ रुपये का एक राफेल अब 1670 करोड़ रुपये में क्यों? 126 राफेल की बजाय 36 ही क्यों? मेक इन इंडिया की बजाय मेक इन फ्रांस क्यों? 5 साल की देरी क्यों?