नोटबंदी के बीच राजनीतिक पार्टियों के बिना रिकॉर्ड चंदा लेने पर सवाल
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राजनीतिक दलों को मिलने वाले 20 हजार से नीचे के चंदे का रिकार्ड न होने और इसपर टैक्स न लगने के इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल कर एक्ट के सेक्शन 13ए को अवैध घोषित कर रद्द करने के आदेश जारी करने की अपील की गई है। याचिका पर संभवत सोमवार को सुनवाई होगी।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट के एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 13ए के माध्यम से देश की राजनीतिक पार्टियों को जो राहत दी गई है वह सीधे तौर पर लोगों के साथ अन्याय है।
आम ईमानदार टैक्स देने वाले को अपनी पाई-पाई का हिसाब रखना पड़ता है और रिफंड व अन्य तरह से बचत दिखाने के लिए उसके पसीने छूट जाते हैं और इससे ठीक विपरीत राजनीतिक पार्टियों को 20 हजार से नीचे के चंदे का हिसाब रखने से ही छूट दे दी गई है।
सोमवार को मामले में हो सकती है सुनवाई
आयकर की धारा 13 ए के तहत राजनीतिक पार्टियां किसी से भी 20000 तक का चंदा ले सकती हैं और दान देने वाला की सूची भी राजनैतिक दलों के लिए बनाना अनिवार्य नहीं है। अरोड़ा ने याचिका में आरोप लगाया कि जन प्रतिनिधित्व एक्ट के तहत आयकर की धारा 13ए में राजनीतिक दलों को जो यह छूट दी गई है यह कानून के खिलाफ है।
राजनीतिक पार्टी इसका गलत प्रयोग करती हैं और मिलने वाले चंदे के बड़े हिस्से को 20 हजार से कम की किश्तों में दिखा देती हैं। एडीआर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए साल 2014 - 2015 के आंकड़ों को बताते हुए याची ने कहा कि इस वर्ष पार्टिंयों ने अपने कुल चंदे का 51 प्रतिशत ऐसे ही 20 हजार के नीचे के चंदे से हासिल किया था।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि वो इस एक्ट को रद्द करने देश के नागरिकों के साथ इंसाफ करने की अपील की। हाईकोर्ट संभवत इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करे।