Chandigarh: पीजीआई ने बिना कार्टेज खरीद लिए 199 प्रिंटर, अब पड़े हैं डंप, RTI के जवाब में खुलासा
12 लाख 37 हजार 600 रुपये की लागत से खरीदे गये 221 प्रिंटर में से महज 31 ही अब तक इश्यू किए गए हैं। उन सभी 31 को कंप्यूटर सेक्शन ने लिया है। जहां से 18 विभागों को प्रिंटर दिया गया है।
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चंडीगढ़ पीजीआई में मानकों की अनदेखी कर खरीद की जा रही है। स्थिति यह है कि संस्थान के विशेषज्ञों की कमेटी ने मार्च 2020 में 221 प्रिंटर खरीदने को अनुमति दी थी और प्रिंटर खरीदे भी गए। इनमें से 199 प्रिंटर अब तक डंप पड़े हैं। कारण उन प्रिंटरों के साथ कार्टेज की आपूर्ति का न होना है। चौंकाने वाली बात यह है कि संस्थान ने जिस कंपनी का प्रिंटर लिया है उसके प्रिंटर की कीमत 5500 और कार्टेज की कीमत 12 हजार रुपये है। ऐसे में प्रिंटर की जरूरत होने के बावजूद उसे लेने से कतरा रहे हैं क्योंकि उसे लिया तो उन्हें अलग से खुद कार्टेज खरीदना पड़ेगा। मामले पर पीजीआई प्रशासन मौन है। वहीं संबंधित विभाग उसे दूसरे के कंधे पर डालने के प्रयास में जुटा हुआ है।
मामले पर किए गए एक आरटीआई के जवाब में इस प्रकरण से जुड़ी हकीकत सामने आई है। जिससे संस्थान के टेक्नीकल वैल्युएशन कमेटी की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 नवंबर 2022 के आरटीआई पर संस्थान ने 3 दिसंबर को जवाब दिया है, जिसमें खरीद से जुड़ी प्रक्रिया के लिए स्टोर को महत्वपूर्ण बताया है। जबकि प्रिंटर की खरीद कंप्यूटर सेक्शन के टेक्नीकल इवेल्युएशन के बाद की गई है। एक तरफ संस्थान ने यह जवाब दिया है कि प्रिंटर की खरीद कंप्यूटर सेक्शन ने अपने स्तर पर की है। वहीं दूसरी तरफ कार्टिलेज के सवाल पर मामला स्टोर पर डाल दिया गया है।
महज 31 हुए इश्यू
12 लाख 37 हजार 600 रुपये की लागत से खरीदे गये 221 प्रिंटर में से महज 31 ही अब तक इश्यू किए गए हैं। उन सभी 31 को कंप्यूटर सेक्शन ने लिया है। जहां से 18 विभागों को प्रिंटर दिया गया है। स्थिति यह है कि प्रिंटर में लगे कार्टेज से 300 पन्ने प्रिंट होने के बाद उसका पुन: उपयोग नए कार्टेज के मिलने के बाद ही शुरू हो पाएगा। लेकिन विभाग नए कार्टेज खरीदने से कतरा रहे हैं।
पहले की कंपनी के कार्टेज थे महज 300 रुपये के
वहीं पीजीआई इससे पहले जिन कंपनियों से प्रिंटर खरीदता था उसके कार्टेज 300 रुपये में मिलते थे। लेकिन कमेटी ने उन कंपनियों को टेंडर में शामिल किए बिना उन 10 कंपनियों के आवेदन स्वीकृत किए जिनके कार्टेज 12 हजार रुपये या उससे महंगे हैं। इतना ही नहीं टेंडर के लिए तय आवेदन मानकों में कार्टेज के बिंदु को शामिल ही नहीं किया गया जिससे खरीद के बाद 199 प्रिंटर अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।